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इस्राइली विद्यार्थियों का ज़ायोनी सेना में भर्ती होने से इंकार

इस्राइली विद्यार्थियों का ज़ायोनी सेना में भर्ती होने से इंकार

पत्र में लिखा गया कि पहले कहा गया था कि यह एक वक़्ती हालत है, हालांकि अब इसे 50 वर्ष हो चुके हैं हम इस प्रणाली का हिस्सा नहीं बनेंगे, और ना ही फ़िलिस्तीनियों के अधिकार छीनने में सरकार की मदद करेंगे।
ज्ञात रहे की आइ डी एफ़ हर साल कम से कम 7000 नए सिपाही भर्ती करती है, और अब और सैनिकों को भर्ती किया गया है।

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबनाः प्राप्त सूत्रों के अनुसार विद्यार्थियों के एक ग्रुप ने इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने इस्राइली सेना में भर्ती होने से इंकार किया है।
 29 दिसंबर को यह पत्र लिखा गया है जिसमें अनेकों विद्यार्थियों ने इस्राइली डिफेंस फोर्सेज़ ( आइ डी एफ़ ) में भाग लेने से मना कर दिया है, और इस बारे में दो पत्र, इस्राइली प्रधानमंत्री और मिलिट्री चीफ़ को भेजे गए हैं।
इस पत्र पर 63 लोगों ने साइन किए हैं, जिनमें 20 वर्षीय मतान हेल्मन भी हैं जो इस समय सेना में भर्ती होने से इंकार की वजह से जेल की सज़ा काट रहे हैं।
 इस्राइली विद्यार्थियों का कहना है कि हमने प्रण किया है कि अब फ़िलिस्तीनी जनता पर ज़ुल्म और पाबंदी का हिस्सा नहीं बनेंगे, जिसने लोगों को दो कैंपों में बाँट कर रखा है। जब तक लोगों को पाबंद और कै़द में रखा जायेगा उस समय तक हम मानवता और देश के अधिकार हासिल नहीं कर सकेंगे और ना ही शांति स्थापित हो सकेगी।
 पत्र में लिखा गया कि पहले कहा गया था कि यह एक वक़्ती हालत है, हालांकि अब इसे 50 वर्ष हो चुके हैं हम इस प्रणाली का हिस्सा नहीं बनेंगे, और ना ही फ़िलिस्तीनियों के अधिकार छीनने में सरकार की मदद करेंगे।
ज्ञात रहे की आइ डी एफ़ हर साल कम से कम 7000 नए सिपाही भर्ती करती है, और अब और सैनिकों को भर्ती किया गया है।


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