आयतुल्लाह सीस्तानी को मौलाना कल्बे जवाद ने भेजी मुबारकबाद।

आयतुल्लाह सीस्तानी को मौलाना कल्बे जवाद ने भेजी मुबारकबाद।

इराक़ के मूसिल शहर से तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश का अंत हो जाने पर भारत के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जवाद ने आयतुल्लाह सीस्तानी को पत्र लिख कर मुबारकबाद दी है।

इराक़ के मूसिल शहर से तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश का अंत हो जाने पर भारत के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जवाद ने आयतुल्लाह सीस्तानी को पत्र लिख कर मुबारकबाद दी है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार इराक़ का मूसिल शहर जो तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश का मुख्य ठिकाना था उसकी इराक़ी सेना और स्वयं सेवी बलों के हाथों आज़ादी पर जहां एक ओर पूरे इराक़ में जश्न का माहौल है वहीं लखनऊ में भी लोगों ने ख़ुशियां मनाईं और दाइश जैसे ख़ूंखार आतंकी गुट से मिली मुक्ति पर इराक़ के सबसे बड़े धार्मिक नेता आयतुल्लाह सीस्तानी के फ़ैसले की भी जमकर सराहना की है।
आतंकवादी गुट दाइश को उसके मुख्य गढ़ मूसिल में मिली करारी हार के बाद मजलिसे ओलमाए हिंद के महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद नक़वी ने एक पत्र लिखकर इराक़ के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू आयतुल्लाह सैयद अली सीस्तानी को बधाई दी है। मौलाना कल्बे जवाद ने अपने पत्र में लिखा है कि आयतुल्लाह सीस्तानी के उस महत्वपूर्ण फ़तवे के बाद ही इराक़ी सेना और स्वयं सेवी बलों ने मिलकर दुनिया के सबसे ख़तरनाक़ आतंकवादियों के पराजित कर दिया।
उन्होंने लिखा कि अगर स्वयंसेवी बल (हश्दुश्शाबी) बड़ी ईमानदारी, बहादुरी और प्रतिबद्धता के साथ आयतुल्लाह सीस्तानी के नेतृत्व में आतंकवादियों के मुक़ाबले में युद्ध में न आता तो इराक़ सरकार के लिए ऐसी जीत प्राप्त करना असंभव था।
मौलाना कल्बे जवाद ने आयतुल्लाह सैयद अली सीस्तानी को बधाई देते हुए कहा कि दाइश जैसे आतंकवादी गुट से मूसिल की स्वतंत्रता पर आपको बधाई देता हूं। आपके फ़तवे की शक्ति और महत्व को दुनिया ने बहुत क़रीब से देखा है। साथ ही मौलाना जवाद ने अपने बधाई पत्र में इराक़ी सेना की बहादुरी और जनता की दृढ़ता की भी प्रशंसा की और आयतुल्लाह सीस्तानी की लंबी आयु और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना तथा इराक़ में पूरी तरह अमन व शांति की कामना की है।
ज्ञात रहे कि 2014 में तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश ने इराक़ के मूसिल शहर पर कब्ज़ा कर लिया था जिसके बाद आयतुल्लाह सीस्तानी ने इराक़ की जनता विशेषकर जवानों को दाइश के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए एकजुट होने का फ़त्वा दिया था।


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