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नेतनयाहू से सऊदी अरब की दूरी, वजह क्या है?

नेतनयाहू से सऊदी अरब की दूरी, वजह क्या है?

सऊदी अरब के पूर्व ख़ुफ़िया चीफ़ ने दावा किया है कि उनका देश, इस्राईल से संबंध स्थापित करने का कार्यक्रम नहीं बना रहा है।

रशा टूडे के मुताबिक़ सऊदी अरब के गुप्तचर विभाग के पूर्व प्रमुख तुर्की अलफ़ैसल ने ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू और सऊदी अरब के युवराज मुहम्मद बिन सलमान की मुलाक़ात की ख़बर पर प्रतिक्रिया जताते हुए दावा किया कि उनका दे, ज़ायोनी शासन के साथ संबंध स्थापना की तैयारी नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि रियाज़ ने इस तरह की किसी भी मुलाक़ात का खंडन किया है और मेरे विचार में सऊदी अरब की सच्चाई और साख नेतनयाहू जैसे किसी भी व्यक्ति से ज़्यादा है जिस पर भ्रष्टाचार का आरोप है और जो अपनी जनता से बहुत ज़्यादा झूठ बोलता है।

 

सऊदी अरब के पूर्व ख़ुफ़िया चीफ़ का यह बयान ऐसी हालत में सामने आया है जब इससे पहले तुर्की अलफ़ैसल और सऊदी अरब के रिटार्यट जनरल अनवर इश्क़ी को इस्राईल के साथ संबंध स्थापना के लिए जनमत को तैयार करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी संबंध में सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान ने नेतनयाहू व बिन सलमान की मुलाक़ात का खंडन करते हुए ट्वीट किया था कि अमरीकी विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान क्राउन प्रिंस से इस्राईली अधिकारियों की मुलाक़ात की ख़बर में कोई सच्चाई नहीं है और मुलाक़ात में सिर्फ़ अमरीकी अधिकारी मौजूद थे। सेंचरी डील को लागू करने में ट्रम्प सरकार के साथ सहयोग में मुहम्मद बिन सलमान की अहम भूमिका के बावजूद नेतनयाहू से दूर होने की आले सऊद की कोशिश से यह सवाल पैदा होता है कि यह बात क्यों सऊदी अरब के एजेंडे में शामिल हो गई है?

 

ऐसा लगता है कि इस सवाल के तीन संभावित जवाब हैं। पहला यह कि इस मुलाक़ात के बाद ही ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक शहीद डाॅक्टर मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या की गई और नेतनयाहू यही साज़िश लेकर नियोम गए थे ताकि इस मुलाक़ात से फ़ायदा उठा कर यह दिखाने की कोशिश करें कि सऊदी अरब ने भी शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या में इस्राईल से सहयोग किया है और सऊदी अधिकारी इस मुलाक़ात का खंडन करके और नेतनयाहू को झूठा बता कर अपने आपको इस आरोप से बरी करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरा जवाब यह है कि अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प की हार के बाद, आर्थिक भ्रष्टाचारों और राजनैतिक संकट के कारण नेतनयाहू की स्थिति डांवाडोल हो गई है और यह संभावना भी है कि उनका अंजाम भी ट्रम्प जैसा ही होगा इस लिए सऊदी अरब उनसे दूर होने की कोशिश कर रहा है ताकि इन हालात के राजनैतिक परिणामों से सुरक्षित रह सके।

 

इस बात में कोई शक नहीं है कि ट्रम्प, नेतनयाहू और बिन सलमान के त्रिकोण के दो आयामों के गिर जाने के बाद इस बात की प्रबल संभावना है कि बिन सलमान का भी यही अंजाम होगा। इस्राईली समाचारपत्र हारेत्ज़ ने क्या नेतनयाहू का भी ट्रम्प जैसा ही अंजाम होगा? शीर्षक के अंतर्गत एक लेख प्रकाशित किया है और उसमें ट्रम्प और नेतनयाहू की संयुक्त मानसिक विशेषताओं का उल्लेख किया है। पत्र का कहना है कि नेतनयाहू का आत्ममुग्ध और जुनूनी व्यवहार इस बात का कारण बना है कि दक्षिणपंथी भी उनसे दूर हो गए हैं और दोबारा चुनाव होने की स्थिति में संसद उनका समर्थन नहीं करेगी।

 

हारेत्ज़ का कहना है कि मंत्रीमंडल को भंग किए जाने और वर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन के टूटने की संभावना के बीच इस्राईल के कई दलों ने अपनी दिशा बदलनी शुरू कर दी है और इसका परिणाम अगले चुनाव में अच्छी तरह से सामने आ जाएगा और इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि प्रधानमंत्री पद दोबारा हासिल करने की नेतनयाहू की कोशिशें नाकाम हो जाएंगी। नेतनयाहू से सऊदी अरब की दूरी के संभावित कारणों का तीसरा जवाब, ईरान के ख़िलाफ़ कार्यवाही के लिए सऊदी-ज़ायोनी गठजोड़ बनाने की नेतनयाहू की कोशिश की नियोम में विफलता भी हो सकता है। मिडल ईस्ट आई की वेबसाइट ने पिछले हफ़्ते सऊदी अरब के कुछ जानकार सूत्रों के हवाले से लिखा था कि मुहम्मद बिन सलमान, ईरान पर हमले के संबंध में ज़ायोनी प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू की मांग स्वीकार करने में रुचि नहीं रखते हैं।


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