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नेतनयाहू ने क्यों रद्द कर दी मास्को यात्रा? क्या ज़ायोनी प्रधानमंत्री को ख़ाली हाथ लौटने का था डर? एस-300 से उड़ी हुई है ज़ायोनि

नेतनयाहू ने क्यों रद्द कर दी मास्को यात्रा? क्या ज़ायोनी प्रधानमंत्री को ख़ाली हाथ लौटने का था डर? एस-300 से उड़ी हुई है ज़ायोनि

इस्राईली मीडिया में व्यापक पैमाने पर आने वाली यह ख़बरें कि प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने मास्को की यात्रा स्थगित कर दी है तो इसका मतलब साफ़ है कि बिनयामिन नेतनयाहू को भनक लग गई थी कि मास्को से उन्हें ख़ाली हाथ लौटना पड़ेगा।

वैसे मीडिया में यात्रा स्थगित होने के बारे में जो ख़बरें हैं वह सही प्रतीत हो रही हैं। नेतनयाहू बड़ी कोशिश में लगे हुए हैं कि रूस उन्हें यह अनुमति और आश्वासन दे दे कि इस्राईली विमान सीरिया के भीतर घुस सकते हैं और उन पर सीरिया एस-300 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम से हमला नहीं करेगा। मगर रूस ने इस्राईल को यह आश्वासन देने से इंकार कर दिया।

ऐसा कहने के पीछे कई कारण हैं। पहला कारण यह है कि नेतनयाहू पिछले तीन महीने से रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन से मिलने के लिए व्याकुल थे मगर पुतीन बार बार मुलक़ात से इंकार करते रहे। आख़िरी बार उन्होंने अर्जेन्टीना में जी-20 के शिखर सम्मेलन में उनसे मुलाक़ात करने से इंकार किया था। दूसरा कारण यह है कि नेतनयाहू की ओर से यात्रा स्थगित होने के लिए जो कारण बताए हैं वह बेबुनियाद प्रतीत होते हैं। कारण यह बताया गया है कि नेतनयाहू दक्षिणपंथी धड़ों को एकजुट करने में लगे हैं ताकि चुनाव में उनकी विजय की संभावना बढ़ जाए, मगर सवाल यह है कि यदि नेतनयाहू 24 घंटे के लिए बाहर चले जाएंगे तो क्या इतनी देर की अनुपस्थिति से उनका यह मिशन बहुत ज़्यादा प्रभावित हो जाएगा?

एक बात यह भी है कि गुरुवार को ही चुनावी गठजोड़ का मामला समाप्त हो जाएगा क्योंकि इसी दिन संसदीय चुनाव के उम्मीदवारों की सूचि पेश करने की आख़िरी तारीख़ है। नेतनयाहू गुरुवार से पहले अपना काम निपटा सकते थे।

तो अब आते हैं यात्रा स्थगित होने के असली कारणों की तरफ़। कारण यह है कि रूसी नेतृत्व ने नेतनयाहू की मांग ठुकरा  दी है और इस्राईल को सीरिया के भीतर हवाई हमलों की छूट देने से साफ़ इंकार कर दिया है। रूस ने सीरियाई सेना को हरी झंडी दे दी है कि जैसे ही इस्राईली विमान या मिसाइल हमला करें तत्काल एस-300 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम को प्रयोग करे चाहे यह हमला अवैध अधिक फ़िलिस्तीन की सीमा या लेबनान की वायु सीमा के भीतर से ही क्यों न किया गया हो। एस-300 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम के मिसाइलों में यह क्षमता है कि वह ढाई सौ किलोमीटर की दूरी तक जाकर अपने लक्ष्य को ध्वस्त कर सकते हैं।

रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन ईरान और तुर्की के साथ हालिया सूची शिखर बैठक में महत्वपूर्ण समझौते करने में सफल हुए इनमें एक समझौता तुर्की और सीरिया के बीच सीमाओं की सुरक्षा से संबंधित पुराने समझौते को फिर से लागू करने के बारे में था। इसी तरह इदलिब के इलाक़े का मामला निपटाने और सीरिया के नए संविधान तथा राजनैतिक प्रक्रिया के बारे में भी समझौते हुए हैं। इस बात पर भी सहमति बनी है कि सीरिया में फुरात नदी के पूर्वी इलाक़ों में अमरीका के समर्थन से की जा रही अलग देश की स्थापना की कोशिश को हरगिज़ कामयाब नहीं होने दिया जाएगा बल्कि पूरी सीरियाई धरती पर सीरियाई सरकार की संप्रभुता को बहाल करवाने में सहयोग किया जाएगा। इतने महत्वपूर्ण समझौते के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन इस्राईल की यह मांग कैसे स्वीकार कर सकते हैं कि उसके युद्धक विमान सीरिया के भीतर हमले करें। क्योंकि इस प्रकार के हमलों से सारी समझौतों और सफलताओं पर पानी फिर जाएगा।

दूसरी एक महत्वपूर्ण बिंदु भी है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इस बिंदु का उल्लेख हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने किया अलमयादीन टीवी चैनल को दिए गए अपने इंटरव्यू में किया था, फिर वही बात ईरान के कई अधिकारियों के बयानों में भी सुनने को मिली कि ईरान और सीरिया ने मिलकर निर्णय कर लिया है कि सीरिया के भीतर अगर इस्राईल ने किसी भी ठिकाने पर हमला किया तो फ़ौरन जवाबी हमला किया जाएगा।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक ख़बर लीक की है कि सीरियाई वायु रक्षा इकाई को दी जा रही एस-300 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम प्रयोग करने की ट्रेनिंग मार्च में पूरी हो जाएगी। नेतनयाहू इसीलिए मार्च से पहले मास्को की यात्रा करने की कोशिश में थे।

यह यात्रा रद्द या स्थगित हो जाने के बाद अब नेतनयाहू बहुत सावधानी बरतेंगे। सीरिया लेबनान या ग़ज़्ज़ा के इलाक़े में कोई भी उत्तेजक कार्यवाही करने से बचेंगे ताकि इस्राईली चुनावों में उन्हें कोई भारी नुक़सान न उठाना पड़ जाए। वैसे यह भी हो सकता है कि चुनाव में अपनी पराजय के डर या अपने ख़िलाफ़ जारी भ्रष्टाचार की जांच के डर से नेतनयाहू कोई नया हंगामा खड़ा करने की कोशिश करें मगर उन्हें इसकी भी भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी।

साभार रायुल यौम


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