?>

नहीं चला कुवैत सऊदी अरब की राह पर , नये क्राउन प्रिंस का चयन, जारी रहेंगी ईरान व इराक के प्रति नीतियां , एक जायज़ा

नहीं चला कुवैत सऊदी अरब की राह पर , नये क्राउन प्रिंस का चयन, जारी रहेंगी ईरान व इराक के प्रति नीतियां , एक जायज़ा

कुवैत में नये क्राउन प्रिंस का चयन हो गया है। इस चयन में कई महत्वपू्र्ण बिन्दु हैं जिनका लंदन और लेबनान से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों, अलकुदसुल अरबी और अलअखबार ने जायज़ा लिया है।

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र अलकुदसुल अरबी ने लिखा है कि कुवैत में सत्ता परिवर्तन बहुत आसानी से हो गया। सबसे पहले, नोवाफ अल-अहमद अलजाबिर अस्सबाह  देश के  नये शासक बने, और फिर उन्होंने  अपने सौतेले भाई, मशअल अलअहमद अल-जाबिर अस्साबह  को क्राउन प्रिंस बनाया जो वास्तव में कुवैत के शाही परिवार में विरासत व वंश के बजाए अनुभव और उपयोगिता को महत्व दिये जाने की परंपरा के जारी रहने का प्रमाण है। 

ऐसा अवसर सऊदी अरब में  भी आया था, लेकिन वहां प्रिंस नाइफ को क्राउन प्रिंस के पद से अचानक हटा दिया गया और किंग सलमान ने क्राउन प्रिंस का पद अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को सौंप दिया।

ध्यान योग्य बात यह है कि कुवैत के दिंवंगत शासक के तीन बेटे हैं , लेकिन उन्होंने अपने लंबे अनुभव के कारण अपने भाई को अपना क्राउन प्रिंस बनाया।

अरब देशों में अपने बेटों को सत्ता सौंपने की परंपरा देश और राष्ट्र को बहुत नुकसान पहुंचा रही है, और कई अरब देशों में सत्ता  अपने बेटे को देने के प्रयासों के गंभीर परिणाम सामने आए हैं। मिस्र और लीबिया इसका एक  उदाहरण है। 

 

लेबनान के समाचर पत्र अलअखबार ने लिखा है कि कुवैत में जब तक क्राउन प्रिंस का चयन नहीं हुआ था तब तक उसकी आगे की राह का अनुमान लगाने कठिन था क्योंकि कुवैत में क्राउन प्रिंस की भूमिका बेहद अहम होती है लेकिन उस पर चर्चा से पहले यह जान लेना ज़रूरी है कि कुवैत के संसद सभापति और उसके अन्य सदस्यों का चयन अगले दिसंबर में होगा इसके साथ ही यह भी जानना अहम है कि कुवैत पर वाइट हाउस के नये शासक का भी काफी असर पड़ता है और उसके बारे में तो सब चीज़ें अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगी। 

यह सारे हालात, इलाके की परिस्थितियां और इसी तरह कुवैत के शाही घराने के भीतरी विवाद, मशअल को कुवैत का क्राउन प्रिंस बनाने के कुवैत नरेश के फैसले में प्रभावी रहे हैं। मशअल को क्राउन प्रिंस बनाने का फैसला उन लोगों के लिए स्वीकारीय है जो यह चाहते थे कि कुवैत दिंवगत नरेश के बनाए रास्ते पर ही आगे बढ़े।  अगर किसी युवा राजकुमार को क्राउन प्रिंस बनाया जाता तो कुवैत के दरबार में नये विचार और परिवर्तन की आशा थी मगर बेहद कम यात्रा करने वाले कुवैत के नये नरेश ने नये परिवर्तनों से दूर रहना ही बेहतर समझा क्योंकि उनकी नज़र में इलाक़े के जो हालात हैं उनकें नया परिवर्तन, अप्रत्याशित हालात पैदा कर सकता है। 

 

विरोधियों को यह आशा है कि नये नरेश नोवाफ राजनीतिक सुधार कार्यक्रम चलाएंगे मगर विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत के नये नरेश ने मशअल को अपना क्राउन प्रिंस बना कर यह संदेश दिया है कि सबाह परिवार, कुवैत में किसी बड़े परिवर्तन का इरादा नहीं रखता। 

इस तरह से कुवैत की वर्तमान स्थिरता बाकी रहेगी क्योंकि इलाक़े के जो हालात हैं उन्हें देखते हुए भी नये कुवैत नरेश अपने देश की पुरानी नीतियों को ही जारी रखने को तरजीह देंगे। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि संसद, स्वतंत्रता और समाचारों से चिढ़ने वाले सऊदी अरब और यूएई कुवैत में राजनीतिक सुधार से बिल्कुल खुश नहीं होंगे इकसे अलावा, राजनीतिक सुधार से इस्लामवादी, वामपंथी और उदारवादी भी खुश नहीं होंगे। 

क्राउन प्रिंस के पद पर मशअल को लाने का साफ मतलब यह है कि इराक़ के हमले के बाद कुवैत ने विवादों में तटस्थ्य रहने का जो रास्ता चुना था वह जारी रहेगा और ईरान व इराक़, इलाक़े में सऊदी अरब और यूएई की ओर से पैदा किये जाने वाले तनाव और विवादों से कुवैत को दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे क्योंकि कुवैत सभी पक्षों से सकारात्मक सहयोग और संबंध में विश्वास रखता है। अब तक कुवैत की यह नीति सफल रही है और जिस तरह से परिवर्तन हुए हैं उनको देखते हुए यही लगता है कि कुवैत अपने रास्ते पर डटा रहेगा।


अपना कमेंट भेजें

आपका ईमेल शो नहीं किया जायेगा. आवश्यक फ़ील्ड पर * का निशान लगा है

*