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नसरुल्लाह के शहीद बेटे हादी नसरुल्लाह की कहानी, पहली बार मीडिया के सामने आईं ज़ैनब नसरुल्लाह, बेटे की शहादत की ख़बर कैसे हसन नसरुल्लाह ने सुनी और क्या थी प्रतिक्रिया?

नसरुल्लाह के शहीद बेटे हादी नसरुल्लाह की कहानी, पहली बार मीडिया के सामने आईं ज़ैनब नसरुल्लाह, बेटे की शहादत की ख़बर कैसे हसन नसरुल्लाह ने सुनी और क्या थी प्रतिक्रिया?

टीवी चैनल अलमयादीन ने एक छोटी सी वीडियो क्लिप दिखाई है जिसमें हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह की बेटी ज़ैनब नसरुल्लाह और बेटे जवाद नसरुल्लाह अपने बड़े भाई हादी नसरुल्लाह के बारे में कुछ बातें बताते हैं जो 1997 में 12 सितम्बर को दक्षिणी लेबनान के तुफ़्फ़ाह इलाक़े में इस्राईल के साथ युद्ध में शहीद हो गए थे।

ज़ैनब और जवाद ने बताया कि उनके बड़े भाई हादी की शहादत की ख़बर जब सैयद हसन नसरुल्लाह को मिली तो वह क्या लम्हे थे और नसरुल्लाह की क्या प्रतिक्रिया थी जिन्होंने अपने किशोर को लेबनान की धरती इस्राईल के क़ब्ज़े से आज़ाद कराने के लिए जारी लड़ाई में फ़्रंटलाइन पर भेज दिया था।

इससे पहले तक किसी को भी सैयद हसन नसरुल्लाह की बेटी ज़ैनब नसरुल्लाह के बारे में कोई ख़बर नहीं थी और वह कभी भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई थीं। हादी नसरुल्लाह तो बहुत मशहूर हो गए थे मगर लोग उनका नाम ही जानते थे, शहीद होने से पहले उनकी तसवीर मीडिया में नहीं आई थी। नसरुल्लाह के दूसरे बेटे जवाद भी हिज़्बुल्लाह के कमांडरों में शामिल हैं। वह भी मीडिया के सामने नहीं आते। यह पहला मौक़ा है कि जवाद और उनकी बहन ज़ैनब एक छोटे सी वीडियो क्लिप में सामने आए हैं।

ज़ैनब ने इस वीडियो में बताया कि मुझे भाई हादी की शहादत की ख़बर श्रीमती हज्जा ने दी और पहले उन्होंने सब्र और ईश्वर के फ़ैसले के सामने नतमस्तक रहने जैसी बातें कीं और उसके बाद हादी की शहादत की ख़बर दी। ज़ैनब कहती हैं कि भाई की शहादत की ख़बर सुनकर बरबस मेरी आंखों में आंसू आ गए साथ ही मैं सोचने लगी कि जब मां और बाप को शहादत की ख़बर मिलेगी तो क्या होगा?

जवाद ने बताया कि मेरे दोस्तों ने मुझसे कहा कि तुम घर जाओ तुम्हें बुलाया गया है। दरवाज़े पर पहुंचते ही ज़ैनब रोती हुई दिखाई दीं तो उन्हें अंदाज़ा हो गया कि कोई बात हो गई है। शहादत की बात मालूम हो गई तो मैं सोचने लगा कि वाक़ई मौत इंसान के कितनी क़रीब है साथ ही यह बात भी ज़ेहन में आई कि कितने भाग्यशाली हैं हादी कि उन्हें शहादत का दर्जा मिला। इतने में महान कमांडर एमाद मुग़निया घर में आए और उन्होंने मुझे गले लगा लिया। उन्होंने मुझसे कहा कि घर के भीतर जाओ और अपने पिता सैयद नसरुल्लाह के पास बैठो।

जवाद ने बताया कि शहीद एमाद मुग़निया मुझे समझाने लगे कि तुम हौसला रखो और अपने पिता को संभालो। जवाद कहते हैं कि मैं पिता के पास गया। वह अपने दफ़तर में थे और बहुत शांत थे। उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। मैं उनके गले लग गया, उनकी पेशानी चूमी और उनके पास बैठ गया। मैंने पिता से पूछा कि हादी की लाश मिली या इस्राईलियों के पास है? पिता ने जवाब दिया कि इस्राईलियों के पास है।

इस्राईलियों ने शहीद हादी नसरुल्लाह की लाश अपने पास ही रखी। सन 1998 में जब इस्राईल और हिज़्बुल्लाह के बीच एक डील हुई तो इस्राईल ने 40 लाशें सौंपी और 60 लेबनानी क़ैदियों को रिहा किया। इस्राईल ने 38 लाशें क़ब्र से निकाल कर दीं और दो लाशें सर्दख़ाने से निकालीं जिनमें एक हादी नसरुल्लाह की लाश और दूसरी अली कौसरानी की लाश थी। इसके बदले में हिज़्बुल्लाह ने इस्राईली कमांडोज़ ईतामार एलिया की लाश इस्राईल को लौटाई जो इस्राईल के बड़े भयानक आप्रेशन के दौरान अपने अन्य 11 साथी कमांडोज़ के साथ मारा गया था।

जवाद ने बताया कि जब हादी का शव मिला तो पिता ने हादी की उंगली से अंगूठी उतारी और मुझे दे दी।

जवाद और ज़ैनब ने बताया कि जिस दिन हादी शहीद हुए उस दिन शहीदों की याद में एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था जिसमें सैयद हसन नसरुल्लाह ने आकर भाषण दिया था।

जवाद ने बताया कि सबसे ज़्यादा भावुकता वाला क्षण वह था जब हादी की शहादत के बाद पिता हसन नसरुल्लाह हादी के कमरे में गए। कमरे में जाकर उन्होंने हादी के इस्तेमाल की चीज़ें एक कार्टून में जमा कीं और उस पर अपने हाथ से लिखा 'हादी'

यह छोटी सी दास्तान हर देखने वाले को कुछ देर के लिए ही सही एक अलग दुनिया और अलग माहौल में ले जाती है और यह बहुत ज़रूरी है क्योंकि आज तो वह दौर है कि एक एक करके अरब सरकारें इस्राईल के क़दमों में सिर रख रही हैं और इस्लामी जगत के दुशमन को गले लगा रही हैं।

कमाल ख़लफ़

फ़िलिस्तीनी लेखक व पत्रकार


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