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नफ़रती राजनीति के चलते भारत सरकार की किरकिरी, क़तर ने कहा माफ़ी मांगे दिल्ली सरकार, कुवैत में भी भारतीय राजदूत तलब

नफ़रती राजनीति के चलते भारत सरकार की किरकिरी, क़तर ने कहा माफ़ी मांगे दिल्ली सरकार, कुवैत में भी भारतीय राजदूत तलब

भारत में पैग़ंबरे इस्लाम पर भारतीय जनता पार्टी की नेता नूपुर शर्मा के विवादित बयान को लेकर भारत सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है और उसे सफ़ाई देनी पड़ रही है।

दोहा और कुवैत सिटी में भारतीय राजदूतों को तलब करके पैग़म्बरे इस्लाम के बारे में अपमानजनक टिप्पणी पर भारी आपत्ति जताई गई।

वहीं अरब देशों में भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की मांग ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगी। इस स्थिति को देखकर बौखलाई भारत सरकार ने सफ़ाई दी है कि दोषियों के बयान भाजपा के विचारों से मेल नहीं खाते और उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है।

भारतीय दूतावास के प्रवक्ता ने इस सिलसिले में मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में बताया कि दोनों देशों के राजदूतों के बीच बैठक हुई जिसमें धार्मिक शख़्सियत पर भारत के व्यक्तियों के ज़रिए आपत्तिजनक ट्वीट के संबंध में चिंता व्यक्त की गई।

भारतीय राजदूत ने ये बताया कि ये ट्वीट किसी भी तरह से भारत सरकार के विचारों को नहीं दर्शाते, ये शरारती तत्वों के विचार हैं।

भारतीय दूतावास ने अपने बयान में कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और अनेकता में एकता की मजबूत परंपराओं के अनुरूप भारत सरकार सभी धर्मों को अपना सर्वोच्च सम्मान देती है, अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के ख़िलाफ़ पहले ही कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है।

कुवैत में भी भारतीय राजदूत को तलब करके कड़ी आपत्ति जताई गई।

भाजपा सरकार की ओर से जो सफ़ाई दी गई है उसे देश के भीतर बहुत से हल्क़े स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बयान जारी किया कि बीजेपी के बयान में ये कहा गया है कि वो ऐसी किसी विचारधारा के ख़िलाफ़ नहीं है जो किसी धर्म या संप्रदाय का अपमान करती है, यह ख़ुले तौर पर नक़ली बहाना है जो कि स्पष्ट रूप से दिखता है और डैमेज कंट्रोल की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है, इसे ही कहते हैं- नौ सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली।


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