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धर्म के नाम पर आग लगाती राजनीति, रोटी सेकते टीवी चैनल, दर-दर भटकती जनता, फिर भी है सब कुछ अच्छा

धर्म के नाम पर आग लगाती राजनीति, रोटी सेकते टीवी चैनल, दर-दर भटकती जनता, फिर भी है सब कुछ अच्छा

भारत एक ऐसा महान देश है जिस देश में दुनिया के सभी धर्मों के लोग एक साथ जीवन व्यतीत करते हैं। एकता और एकजुटता इस देश को महान बनाती है। बल्कि यूं कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा कि अगर मोहब्बत के रंग-बिरंगे फूलों को देखना है तो दुनिया के नक़्शे पर मौजूद भारत के गुलदस्ते को देखा जा सकता है। लेकिन इधर कुछ वर्षों से इस गुलदस्ते की देख-रेख करने वाले मालियों ने इसपर से ध्यान हटा लिया है जिसकी वजह से यह सूखने लगा है।

वैसे यह बात सच है कि जिस भी धर्म में कट्टरवाद ने सर उठाया है उसने न केवल उस धर्म को नुक़सान पहुंचाया है बल्कि पूरे समाज को दीमक की तरह खा गया है। आजकल भारत का भी यही हाल हो रहा है। आम लोगों के सामने जहां पहले से ही रोज़गार और बढ़ती हुई महंगाई ने समस्याएं खड़ी कर रखी थीं वहीं कोरोना महामारी ने तो आम लोगों को बे मौत मार दिया है। लोग दो वक़्त की रोटी के लिए अपनी जान जोखिम में डालने पर मजबूर हो गए हैं, लेकिन इस बीच समाज में कुछ कट्टरपंथियों द्वारा घोले जा रहे ज़हर ने पहले से ही मौत के मुंहाने पर पहुंच चुके लोगों के लिए एक और मौत का कुंआ खोद दिया है। वैसे ऐसी स्थिति उस समय ज़्यादा पैदा हो जाती है जब देश या किसी प्रदेश में चुनाव होते हैं। अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में सारे धर्म ख़तरे में थे, सभी धर्मों के देवी देवता ख़तरे में पड़ गए थे, धर्म स्थलों की सुरक्षा पर ख़तरा मंड़राने लगा था, हां एक बात है कि लोगों का पेट धर्म की रोटी, नफ़रत के चावल और चुनाव की बिरयानी से भर रहे थे। इसीलिए तो लोग सारी समस्याओं को भूलकर धर्म और धर्मस्थलों को बचाने में लग गए थे और जैसे ही चुनाव ख़त्म हुआ वैसे ही सब सुरक्षित हो गए पर जनता भूखी रह गई।

अब उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, फिर से धर्म, धर्म स्थल और देवी देवता ख़तरे में पड़ने वाले हैं, लेकिन लोगों का पेट भरने वाला है, लोगों को धर्म और नफ़रत की रोटी मिलने वाली है और यह रोटियां कोई और नहीं परोसेगा क्योंकि इसको बेहतरीन अंदाज़ में नेता और न्यूज़ चैनल स्पेशल थाली में परोसेगें और जब तक चुनाव चलेगा जनता को एक मिनट के लिए भूखा नहीं रहने देंगे। वैसे यह रोटियां बननी शुरू हो गईं हैं अभी आपने सुना होगा गाज़ियाबाद में एक बुज़ुर्ग की दाढ़ी काटी गई है, यह उन्हीं रोटियों को सेकने के लिए काटी गई है। वहीं कम पड़ रही आंच को और ज़्यादा तेज़ करने के लिए उत्तर प्रदेश एटीएस ने धर्मांतरण के कथित अभियान चलाने के आरोप में दो मौलानाओं को दिल्ली के जामिया नगर इलाक़े से भी गिरफ़्तार किया है, ताकि रोटियों को और अच्छी तरह से सेका जा सके, अरे भाई चुनाव का मामला है कच्ची रोटी से जनता के पेट में दर्द होने लगेगा और इससे वोटर वोट नहीं दे पाएंगे और जब वोट नहीं मिलेगा तो सारा खेल ही ख़राब हो जाएगा। देखते हैं आगे-आगे होता है क्या धर्म के नाम पर नफ़रत की जलाई गई आग में रोटी कितनी सिकती है और लोग उसे कितना पंसद करते हैं। फ़ैसला तो जनता को ही करना है।

        (रविश ज़ैदी)

लेखक के विचारों से पार्स टुडे हिन्दी का सहमत होना ज़रूरी नहीं है


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