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दुनिया का एक ऐसा अपराधी जो सच में हवा में ग़ायब हो गया, 50 वर्षों के बाद भी बना है रहस्य, बिल्कुल फ़िल्मी है यह घटना!

दुनिया का एक ऐसा अपराधी जो सच में हवा में ग़ायब हो गया, 50 वर्षों के बाद भी बना है रहस्य, बिल्कुल फ़िल्मी है यह घटना!

विमानन के इतिहास में अपहरण का केवल एक ऐसा मामला है जो लगभग 50 साल बाद भी रहस्य बना हुआ है। 24 नवंबर वर्ष 1971 की दोपहर को पोर्टलैंड से सिएटल के लिए एक उड़ान अमेरिका से रवाना हुई थी जिसमें एक व्यक्ति ने बम धमाका करने की धमकी देकर बड़ी फिरौती पाई थी। पैसा मिलने के बाद अपहरणकर्ता ने सभी यात्रियों को रिहा कर दिया था और विमान को मैक्सिको जाने के लिए आदेश दिया था। रास्ते में, वह पैसे के साथ पैराशूट पहनकर कूद गया और ऐसा भागा कि आजतक उसका पता नहीं चल सका है।

24 नवंबर वर्ष 1971 में में पोर्टलैंड से सिएटल के लिए उड़े विमान को हाईजैक करने वाले अपहरणकर्ता का नाम कोई नहीं जानता है, लेकिन उसका छद्म नाम डीबी कूपर है, जिसे एफ़बीआई 45 वर्षों से पहचानने की कोशिश करते करते थक गई है और अब उसने हार मान ली है। हवाई जहाज़ के टिकट पर उसका नाम डॉन कूपर लिखा था, लेकिन ख़बरों में ग़लतफ़हमी के कारण उसे डीबी कूपर के नाम से जाना जाने लगा। 49 वर्षों के बाद भी उस उपहरणकर्ता की पहचान, स्थान या उसके उद्देश्य के बारे में कोई नहीं जानता है। कोई नहीं जानता कि वह व्यक्ति विमान से कूद से कहां ग़ायब हो गया। डीबी कूपर नॉर्थवेस्ट ओरिएंट एयरलाइंस की उड़ान 305 पर सवार हुआ था और ख़ामोशी से विमान की पीछे की सीट पर बैठ गया था। उसने एक सिगरेट जलाई और शराब पीने के लिए मांगा। इस बीच, 23 वर्षीय एयरहोस्टेस जिसका नाम टीना था, उसको एक नोट दी  जिसमें लिखा था, "मेरे ब्रीफ़केस में बम है। मैं चाहता हूं कि तुम मेरे बग़ल में बैठो।" एयरहोस्टेस ने उसके आदेश का पालन करते हुए अमल किया। डीबी कूपर ने उसी एयरहोस्टेस से अपनी दूसरी मांगों की भी बात कही। उसने दो लाख डॉलर और 4 पैराशूट की मांग की। उसने कहा कि उसकी यह मांग सिएटल एयरपोर्ट पर विमान के लैंड होते ही पूरी हो जाना चाहिए।

अपहरणकर्ता डीबी कूपर का बोर्डिंग पास, एयरहोस्टेस टीना जिससे आरोपी ने बात की थी।

इस बीच पुलिस और विमानन कर्मचारी पैसे और पैराशूट एकत्रित का इंतेज़ाम करने में जुट गए। वहीं दूसरी ओर पायलेट सिएटल एयरपोर्ट के ऊपर लगातार विमान को चक्कर लगा रहा था। तब तक विमान में बैठे यात्रियों को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि उनका वे जिस विमान में बैठे हैं वह हाइजैक हो चुका है। इस बीच पायलेट ने एलान किया कि कुछ तकनीकी कारणों की वजह से विमान का ईधन जलाया जा रहा है। साढ़े तीन घंटे तक हवा में रहने के बाद विमान सिएटल एयरपोर्ट पर लैंड करता है। इस दौरान अपहरणकर्ता को पैसा और पैराशूट दिया जाता है। डीबी कूपर ने सभी 36 यात्रियों और 6 चालक दल के सदस्यों में से दो को छोड़ दिया। इसके बाद विमान में दोबारा ईधन भरा गया और विमान ने दोबारा मैक्सिको की ओर उड़ान भरी। तब तक रात काफ़ी हो चुकी थी और मौसम भी काफ़ी ख़राब था, लेकिन उसके बावजूद डीबी कूपर ने पैराशूट पहना और ओरेगन के एक बहुत ही मुश्किल स्थान पर छलांग लगा दी।

एफ़बीआई के अधिकारी घटनास्थल की जांच करते हुए।

तब से आज तक यह घटना अनसुलझी सी रह गई है। विमान अपहरण की यह पूरी घटना किसी फिल्मी कहानी की ही तरह है। इसीलिए हाल ही में इसी घटना को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनी है। इस बीच वर्ष 1971 से वर्ष 2016 तक एफ़बीआई ने डीबी कूपर को पता लगाने की भरपूर प्रयास किया। उसके बारे में केवल यह पता चला कि वह एक गोरा व्यक्ति था कि जिसकी लंबाई 6 फिट एक इंच और वज़न 77 से 80 किलोग्राम था और उसकी आयु 40 से 50 वर्ष के बीच थी, उसकी आंखें भूरी थीं और बाल काले थे। इसके आलावा कूपर के बारे में कुछ और पता नहीं चल सका। एफ़बीआई ने उसका पता लगाने के लिए हज़ारों लोगों से पूछताछ की और इस घटना के होने के 5 वर्षों तक 800 लोगों से ज़्यादा लोगों को संदिग्धों की सूची में रखा, लेकिन किसी पर भी आरोप सिद्ध नहीं हो सका। विमान में डीबी कूपर ने बहुत कम सबूत छोड़े थे, जिनमें सिग्रेट के कुछ टुकड़े, सीट पर एक बाल और टाई, मगर किसी भी चीज़ पर उसकी उंगलियों के निशान नहीं मिले।

आरोपी डीबी कूपर का एफ़बीआई द्वारा जारी किया गया स्केच।

एफ़बीआई ने अपनी आरंभिक रिपोर्ट में अपहरणकर्ता को पैराट्रूपर का माहिर मान रही था, लेकिन आगे की जांच से पता चला कि वह उसका विशेषज्ञ नहीं था। एफ़बीआई के विशेष एजेंट लैरी केर ने वर्ष 2007 में कहा था कि, "कोई पैराशूट जम्पर अंधेरी रात और बारिश में नहीं कूद सकता। वही भी जब 200 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से हवा के झोंके उसके चेहरे पर पड़ रहे हों  और जबकि उसने एक भारी कोट भी पहन रखा था।" जांचकर्ताओं का यह भी मानना ​​है कि डीबी कूपर ने इस घटना को अकेले ही अंजाम दिया था, क्योंकि अगर वह एक समूह का हिस्सा होता, तो वह मैक्सिको के बजाय एक विशिष्ट हवाई मार्ग की मांग करता और कभी भी कठिन परिस्थितियों में नहीं कूदता। वहीं वर्ष 1980 में, एक बच्चे ने कुछ ऐसा खोजा, जिसने इस पहेली में दोबारा जान डाल दी थी और जांचकर्ताओं की इस मामले में रुचि फिर से बढ़ गई थी। आठ वर्षीय ब्रायन इंग्राम वाशिंगटन में कोलंबिया नदी के किनारे खेलने के लिए ज़मीन खोद रहा था कि तभी उसे 20 डॉलर के नोटों का एक बंडल मिला, जिसमें कुल 5,800  डॉलर थे। जब बच्चे के माता-पिता ने पुलिस से संपर्क किया, तो उन्हें पता चला कि नोटों के सीरियल नंबर डीबी कूपर को दिए गए पैसों के ही हैं। डॉलर मिलने के छह साल बाद, ब्रायन इंग्राम को  2,760 डॉलर वापस किए गए। ब्रायन ने वर्ष 2008 में 20 डॉलर का नोट 37 लाख डॉलर में निलाम किया।

डीबी कूपर का वह 20 डॉलर का नोट जो  37 लाख डॉलर में निलाम हुआ।

इस घटना के बाद, यूएस सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बोइंग 727  में कॉपर विंज़ लगाने का आदेश दिया था। कॉपर विंज़ वास्तव में विमान के पिछले भाग में मौजूद सीढ़ियों के बाहर लगने वाली सिटकिनी थी, ताकि कोई भी विमान के उड़ते समय उसे खोलकर बाहर छलांग न लगा सके। जैसाकि डीबी कूपर ने किया और हमेशा के लिए हवा में ग़ायब हो गया। वैसे तो एफ़बीआई ने अपनी जांच को वर्ष 2016 में बंद कर दिया था। मगर साथ ही में एक अपील जारी की थी कि अगर किसी के पास डीबी कूपर से संबंधित कोई सूचना हो तो उसको दे सकता है। वहीं वर्ष 1972 में एक व्यक्ति फ़र्ज़ी नाम से न्यूयॉर्क से लॉस एंजेलिस जाने के लिए विमान में सवार हुआ और उड़ान के दौरान उसने भी एक नोट दिया जिसके ज़रिए 5 लाख डॉलर और 4 पैराशूट की मांग की गई थी और ऐसा न करने पर विमान को बम से उड़ा देने की धमकी दी गई थी। इस घटना में भी बिल्कुल वैसा ही हुआ। विमान एयरपोर्ट पर लैंड करता है और उसमें ईधन भरा जाता है, अपहरणकर्ता पैसा और पैराशूट लेता है और विमान के पिछले दरवाज़े से छलांग लगा देता है।

1972 में विमान का अपरहरण करने वाला आरोपी  रिचर्ड मैककॉय जूनियर।

यह घटना डीबी कूपर की घटना के पांच महीनों बाद हुई थी। कुछ लोगों का मानना था कि इस घटना को भी अंजाम देने वाला डीबी कूपर ही है। लेकिन वर्ष 1972 के अप्रैल महीने में विमान का अपरहरण करने वाले आरोपी को गिरफ़्तार कर लिया गया। जिसकी पहचान रिचर्ड मैककॉय जूनियर के नाम से हुई। उसे 45 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई, लेकिन अगस्त 1974 में वह जेल से फ़रार हो गया और उसके बाद पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में वह मारा गया।


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