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तुम हमें हथियार दो, हम तुम्हें लाशें देंगे, दिल्ली में मुसलमानों को काटने वाले हिंदू हत्यारों के अपराधों की कहानी ख़ुद उनकी ज़बा

तुम हमें हथियार दो, हम तुम्हें लाशें देंगे, दिल्ली में मुसलमानों को काटने वाले हिंदू हत्यारों के अपराधों की कहानी ख़ुद उनकी ज़बा

स्क्रॉल डॉट इन ने दिल्ली में हुए साम्प्रदायिक दंगों में मुसलमानों की हत्या करने वाले कुछ हिंदू हत्यारों के साथ बातचीत पर आधारित एक रोंगटे खड़े कर देने वाली स्टोरी प्रकाशित की है।

निशांत कुमार ने मुस्कराते हुए जोशीली आवाज़ में बताया कि कैसे उसने 25 फ़रवरी को 3 मुस्लिम पुरुषों की बेरहमी से हत्या की थी।

कुमार का कहना था कि सुबह 8 बजे के आसपास मैंने लोहे की रॉड के एक छोर पर चाक़ू बांधा और हाथ में लेकर घर से निकल पड़ा। 10 बजे के क़रीब पहला शिकार मिला। हिंदू भीड़ ने एक मुसलमान व्यक्ति का पीछा करना शुरू किया, उसमें मैं सबसे आगे था।

"उसे पकड़ने वाला मैं पहला व्यक्ति था, मैंने उसके सिर पर रॉड से वार किया, वह नीचे गिर पड़ा और उसके बाद लोगों ने उसे मारना शुरू कर दिया... दे धना धन।"

कुमार ने बताया कि हिंदू भीड़ से जान बचाकर भागने वाले दो अन्य मुसलमानों की कमर में चाक़ू घोंपकर और सिर पर रॉड मारकर उसने कैसे उनकी हत्या की। उसने कहाः मैंने कुल 3 लोगों की जान ली।

23 से 27 फ़रवरी तक उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में दर्जनों लोगों की हत्या कर दी गई। मरने वालों में अधिकांश 20 से 30 साल की उम्र तक के मुस्लिम युवा थे।

इसके अलावा, मुसलमानों के घरों, दुकानों और मस्जिदों को आग के हवाले करके जमकर लूटमार की गई।

3 मार्च को इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, दिल्ली दंगों के संबंध में पुलिस ने 369 एफ़आईआर दर्जी कईं और 33 लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन उनमें से किसी पर भी हत्या के आरोप में मुक़दमा दर्ज नहीं किया गया।

पत्रकार ने जब एक 32 वर्षीय टैक्सी ड्राइवर से बात की तो उसने बहुत ही खुलकर अपने अपराधों का बखान किया। पत्रकार से उसने कहाः तुम हिंदू हो इसीलिए यह सब बता रहा हूं, वरना यह कहने की बातें नहीं हैं।

उसने आगे कहाः इलाक़े की बिजली काटने के बाद हिंदू भीड़ ने लाशों पर लाशें बिछानी शुरू कर दीं। हमने उनकी गिनती कम कर दी। क्योंकि यह सब हमने अपने हाथों से किया है, इसलिए हमारे दिल को तस्सल्ली है।"

कैब ड्राइवर का दावा था कि हमनें उन्हें मारकर लाशों को नाले में डाल दिया। अब धीरे धीरे नाले की पोल खुलेगी, देखना कितने कंकाल निकलेंगे वहां से।

निर्दोष मुसलमानों की बेरहमी से हत्या पर खुलकर बात करने और उस पर गर्व करने वाले हिंदू हत्यारों के बारे में समाजशास्त्री संजय श्रीवास्तव का कहना है कि यह उस नए भारत की झलक हैं, जहां आपको इन अपराधों को छिपाने और उन पर पर्दा डालने की ज़रूरत नहीं है। आप इसे सार्वजनिक रूप से कह सकते हैं, जिसके लिए आपको सम्मानित भी किया जाएगा और आपकी प्रशंसा भी की जाएगी।

उन्होंने कहा, "आप यह सब यह जताने के लिए कहते हैं कि भारत अब एक हिंदू राष्ट्र है।"

उदाहरण स्वरूप, निशांत कुमार को इस रिपोर्ट में उनका नाम छपने और पहचान ज़ाहिर होने से कोई दिक्क़त या परेशानी नहीं है।

श्रीवास्तव का मानना है कि इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि लोग अब क्या सोचते हैं, माहौल किया है और भविष्य में क्या होने जा रहा है?"

ड्राइवर ने दावा किया कि क्षेत्र में तैनात पुलिस अधिकारियों ने सक्रिय रूप से उनकी भीड़ का समर्थन किया। अधिकारियों का कहना थाः तुम हमें हथियार दो, हम तुम्हें लाशें देंगे।

यह पूछे जाने पर कि सुरक्षा बल हथियार क्यों मांगेंगे, तो उसने समझाते हुए कहाः उनकी गोलियों का हिसाब होता है, इसलिए वे अपनी बंदूक़ों से फ़ायर नहीं कर सकते। हमारे लिए बंदूक़ें हासिल करना कोई बड़ी बात नहीं है।

ड्राइवर ने यह भी कहा कि उसका संबंध किसी राष्ट्रवादी हिंदू संगठन से नहीं है। उसने कहा कि यह सबकुछ ख़ुद उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर किया है। हिंदू महिलाओं की हत्याओं और उनके साथ होने वाले बलात्कार का बदला लेने के लिए।

उसने कहाः लोग कह रहे हैं कि यह सब आरएसएस और बजरंग दल के ग़ुंडों ने किया है, नहीं, यह सब हिंदुओं ने किया है।

आख़िर में उसने कहाः आपको क्या लगता है कि वे (मुसमलान) शांति की भीख क्यों मांग रहे हैं? इसलिए कि सालों को हमने दबाकर काटा है।


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