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तुमने एक सुलैमानी को मारा, दुनिया में सैकड़ों सुलैमानी हो चुके हैं पैदा, युवाओं के आइडिल और आदर्श जनरल सुलैमानी की क्या थी मनोकामना

तुमने एक सुलैमानी को मारा, दुनिया में सैकड़ों सुलैमानी हो चुके हैं पैदा, युवाओं के आइडिल और आदर्श जनरल सुलैमानी की क्या थी मनोकामना

3 जनवरी 2020 की सुबह पूरी दुनिया एक दर्दनाक ख़बर सुनकर हैरान रह गयी।

धीरे धीरे यह ख़बर ईरान के दूसरे शहरों में भी फैलती चली गयी और देखते ही देखते पूरे ईरान का वातावरण शोकाकुल हो गया और हर आंख नम नज़र आ रही थी और हर दिल दुख से फटा जा रहा था, जवान दहाड़मार कर रो रहे थे और हर तरफ़ से चीख़ व पुकार की आवाज़ आ रही है। यहां पर यह बताना ज़रूरी है कि इस दुख दर्द में केवल ईरानी ही अकेले नहीं थे और इस नश्वर संसार को छोड़ने वाला एसा व्यक्ति नहीं था जो केवल ईरानियों में ही लोकप्रिय था बल्कि वह क्षेत्र की जनता के दिलों पर राज करने वाली एक महान हस्ती थी।

फ़िलिस्तीन, लेबनान और सीरिया से लेकर अफ़ग़ानिस्तान, नाइजीरिया, यमन और बहरैन तक इस हस्ती के चर्चे थे, यहां तक कि कुछ यूरोपीय लोग भी इस महान ईरानी हस्ती पर बेहतर भविष्य की आस लगाए बैठे थे। यह इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह के हाथों का पाला हुआ एक स्वयं सेवी और एक नेक शिष्य था, वह उस कारवां से बिछड़ा हुआ एक एसा व्यक्ति था जो इमाम ख़ुमैनी के एक ही इशारे पर पूरी दुनिया को इधर से उधर कर देता था और दुनिया के सारे समीकरणों को बदल कर रख देता था। वर्षों बाद तक वह इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करते रहे। यह महान आकांक्षा न केवल एक राजनैतिक आकांक्षा और उमंग नहीं थी, न है और न ही रहेगी। यह उमंग और आकांक्षा, दुनिया से साम्राज्यवादियों के हथकंडों और उनके षड्यंत्रों को नकारारने के लिए दुनिय के कमज़ोर वर्गों और मुसलमानों को जोड़ने और उनमें एकता पैदा करने का रास्ता है।

 

महान इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने बारम्बार दुनिया के कमज़ोर लोगों को एक प्लेटफ़ार्म पर लाने और उनके बीच एकता पैदा करने का बहुत प्रयास किया और दुनिया के कमज़ोर वर्ग को एक ध्वज के नीचे लागने का अह्वान किया। वह दुनिया के कमज़ोर वर्गो और मुसलमानों की कामयाबी का राज़, पवित्र क़ुरआन का अनुसरण, आपसी एकता और विलायते फ़क़ीह का आज्ञापालन मानते थे। महान इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह के बाद इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई जैसे तत्वदर्शी और शक्तिशाली व ज्ञानी नेतृत्व और अपनी जान हथेली पर रखने वाले जनरल क़ासिम सुलैमानी जैसे सैनिक की वजह से उमंग और आकांक्षा का यह ध्वज पूरी दुनिया में यथावत लहरा रहा है। ऐसा सैनिक जिसने अपनी सारी ज़िंदगी इस महान लक्ष्य और उमंग व आकांक्षा को पूरा करने में लगा दी बल्कि उसकी शहादत भी इस महान लक्ष्य को पूरा करने के रास्ते में हुई क्योंकि वह इसी लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा था।

 

जनरल क़ासिम सुलैमानी और उनके साथियों की शहादत ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा दिया और जिस चीज़ की चाहत उनके दिल में हमेशा रहती थी, उनको वह चीज़ मिल गयी। अहवाज़, तेहरान, मशहद, क़ुम और किरमान जैसे ईरान के छोटे बड़े सभी शहरों के लोगों ने नम आंखों से अपने बहादुर और साहसी जनरल को विदा दी जो इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह की अंतिम शवयात्रा के बाद नज़र नहीं आता। इस दुख दर्द के साथ लोगों में हत्यारों के प्रति घृणा और नफ़रत भी झलक रही थी क्योंकि जनरल सुलैमानी के हत्यारे वही साम्राज्यवादी थे जिनके ख़िलाफ़ इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह उठ खड़े हुए थे।

 

इसी के साथ ईरानी जनता ने इस दर्दनाक अवसर पर बारम्बार बल दिया कि जनरल क़ासिम सुलैमानी की उमंगों और लक्ष्यों को व्यवहारिक करने के लिए जो वास्तव में क्रांति की ही उमंग और आकांक्षा है, अंतिम सांस तक डटे रहेंगे और दुश्मनों के षड्यंत्रों को विफल बनाएंगे। बहुत से ईरानी बच्चों ने अपने हीरो को पहचान लिया और उनको अपने जीवन का आइडियल क़रार दिया। वास्तव में भविष्य में इनमें से हर एक क़ासिम सुलैमानी बनेगा। जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत ने उनके प्रेमियों के हौसले नहीं तोड़े बल्कि उनको लक्ष्यों तक पहुंचने में उनके इरादों और संकल्पों को और भी मज़बूत कर दिया है।

बहुत से इस्लामी, यहां तक कि ग़ैर इस्लामी देश और दुनिया के कमज़ोर वर्ग के लोग, जनरल क़ासिम सुलैमानी की उमंगों पर आशा लगाए बैठे थे और सभी लोगों की भावनाएं एक जैसी ही थीं। उनकी भावनाएं और एहसास, साम्राज्यवादियों और उसके पिट्ठुओं से नफ़रत के अलावा कुछ और नहीं था और साथ ही न्याय, इंसाफ़ और मानवता को पुनर्जीवित करने की आस थी। फ़िलिस्तीन, लेबनान, सीरिया, इराक़, ग़ज़्ज़ा, यमन, बहरैन और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों की जनता भी जिन्होंने वर्षों तक जनरल क़ासिम सुलैमानी और उनके साथियों को अपने बीच पाया था और उनको अपना एकमात्र आसरा समझा, जब सारे आसरों ने साथ छोड़ दिया था, भी ईरानी जनता के साथ इस दुख की घड़ी में साथ है।  

 

 

निर्भर हो तो वह आसानी से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं, उस लक्ष्य में मानवता और न्याय का कोई स्थान ही नहीं है और वह सिर्फ़ और सिर्फ़ ज़्यादा से ज़्यादा अपने लक्ष्य को साधने का प्रयास करते हैं।

 

साम्राज्यवादियों ने अपने लक्ष्य साधने के लिए वर्षों प्रयास किया और इसी के अंतर्गत उन्होंने अलक़ायदा, दाइश, नुस्रा फ़्रंट जैसे आतंकवादी गुट बनाए और मध्यपूर्व के क्षेत्र को अशांति से भर दिया। इन गुटों को बनाने के बाद साम्राज्यवादी एक अन्य लक्ष्य साधने के प्रयास में थे और वह इस्लाम और मुसलमानों की छवि ख़राब करना थी क्योंकि साम्राज्यवादियों के रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट और उनका सबसे बड़ा दुश्मन इस्लाम ही है। आईआरजीसी के कमान्डर जनरल क़ासिम सुलैमानी ने एक के बाद एक साम्राज्यवादियों के सारे षड्यंत्रों को विफल बना दिया।

उन्होंने जंग के अग्रिम मोर्चे पर आतंकवादी गुटों का मुक़ाबला किया और उनको तहस नहस कर दिया। जब साम्राज्यवादियों ने सीरिया के विभाजन की योजना बनाई और इस देश में अशांति और अराजकता का माहौल गर्म कर दिया और आतंकवादी बड़ी ही क्रूरता से महिलाओं, बच्चों, जवानों और बूढ़ों को तलावरों से काट रहे थे और सरकार तथा सरकारी सेना में उनसे मुक़ाबले की ताक़त नहीं थी तब जनरल क़ासिम सुलैमानी ने अपने कुछ साथियों के साथ सारे समीकरण को ही बदल दिया और बहुत ही कम अवधि में जंग के मैदान का चेहरा ही बदल कर रख दिया। उनकी और उनके साथियों की कोशिशों की वजह से ही सीरिया की जनता को शांति और सुरक्षा का उपहार मिला।

 

विश्व साम्राज्यवाद सीरिया में फंस गया और उसके बाद उसने अपने आतंकवादी गुटों को इराक़ रवाना करना शुरु कर दिया और फिर उनके समर्थन के लिए इराक़ में सामूहिक विनाश के हथियारों का बहाना बनाकर इस देश पर चढ़ाई कर दी। यह साम्राज्यवादियों की शैली है जिसे वह आतंकवाद और तनाव से संघर्ष के नाम पर नई जंग शुरु करता है और आतंकवाद का समर्थन करता है। इराक़ पर अमरीका के नियंत्रण के ज़माने में अमरीका और उसके घटक दल के सैनिक इराक़ की सड़कों पर टैंक द्वारा परेड करते थे और जो और जैसा दिल में आता था वैसे अपराध अंजाम देते थे। इतिहास गवाह है कि अमरीका और उसके घटकों ने इराक़ में बहुत से अमानवीय अपराध अंजाम दिए हैं।

अमरीका और उसके घटकों तथा आतंकवादियों की साज़िशों से मुक़ाबले के लिए जनरल क़ासिम सुलैमानी अकेले ही निकल पड़े और उन्होंने जंग के मैदान से लेकर मीडिया के जंग के मैदान तक दुश्मनों को धूल चटा दी। इस तरह की हार दुश्मनों के लिए बहुत भारी थी और उनमें दोबारा मैदान में खड़े होने की ताक़त खत़्म हो गयी थी, यही कारण है कि ट्रम्प नामक एक मूर्ख और पागल शख़्स ने इस महानायक को रास्ते से हटाने का आदेश दे दिया।  उनको पता ही नहीं था कि वह एक सुलैमानी को मारेंगे लेकिन जनरल सुलैमानी ने पुरी दुनिया में सैकड़ों सुलैमानी बना दिए हैं। 


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