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तालिबान ने लड़कियों और महिलाओं को पढ़ने की इजाज़त दे दी, लेकिन एक शर्त के साथ

तालिबान ने लड़कियों और महिलाओं को पढ़ने की इजाज़त दे दी, लेकिन एक शर्त के साथ

अफ़ग़ानिस्तान में महिलाएं विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करना जारी रख सकती हैं, लेकिन एक शर्त के साथ, साभी छात्रों और छात्राओं के लिए अलग-अलग क्लासें होंगी और छात्राओं के लिए सिर ढंकना अनिवार्य होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल बाक़ी हक्क़ानी ने रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में नई शिक्षा नीतियों का एलान किया, जिससे एक दिन पहले ही तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर अपना झंडा लहराया था, जो पिछले सप्ताह गठित नई सरकार के औपचारिक रूप से काम की शुरुआत का संकेत है। हालांकि इस सरकार में किसी महिला को जगह नहीं दी गई है।

20 बाद एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के शासन की स्थापना से लोगों में यह आशंका है कि कहीं यह गुट अपने पूर्व कठोर शासन को लागू करना शुरू नहीं कर दे।

1996 में स्थापित होने वाले अपने शासन में तालिबान ने लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा था और सार्वजनिक जीवन से उन्हें पूर्ण रूप से ग़ायब कर दिया था।

हक़्क़ानी ने कहाः जो कुछ आज मौजूद है, हम उसी पर आगे निर्माण करेंगे।

महिलाओं के प्रति अपने दृष्टिकोण में बदलाव के बावजूद, तालिबान ने लड़कियों और महिलाओं के खेल पर पाबंदी लगा दी है और समान अधिकारों के लिए प्रदर्शन करने वाली महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की है।

हक़्क़ानी का कहना था कि छात्राओं को सिर्फ़ महिलाएं ही पढ़ा सकेंगी, इसके लिए हम पूरी व्यवस्था करेंगे।

अफ़ग़ानिस्तान के तोलो न्यूज़ को इंटरव्यू देते हुए तालिबान प्रवक्ता सैयद ज़करुल्लाह हाशमी ने कहा था कि महिलाओं को बच्चे पैदा करना और उनका पालन-पोषण करना चाहिए और सरकार में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की कोई ज़रूरत नहीं है। 


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