ईरान अपने शहीदों को कैसे याद रखता है, देखिए तस्वीरों में

इस्लामी गणतंत्र ईरान की सरकार और जनता अपने शहीदों को विशेष सम्मान देते हैं और उन्हें हमेशा याद रखते हैं।

ईरान में जगह जगह शहीदों की तस्वीरें देखने को मिल जायेंगी। ईरान में हज़ारों सड़कों, राजमार्गों, इमारतों, पार्कों, स्कूलों के नाम शहीदों के नाम पर मिल जायेंगे। इन शहीदों में ईरान पर सद्दाम द्वारा थोपे गए 8 वर्षीय युद्ध और सीरिया में हज़रत ज़ैनब (स) के रौज़े की रक्षा करते हुए आतंकवादी गुटों के हाथों शहीद होने वाले जांबाज़ शामिल हैं।

ईरान की अधिकांश आबादी शिया मुस्लिम है, जो 1400 वर्ष कर्बला में शहीद होने वाले इमाम हुसैन (अ) और उनके 72 साथियों से विशेष श्रद्धा रखती है।

ईरानी क़ौम ने ज़ुल्म के सामने कभी घुटने नहीं टेकने और प्रतिरोध करते हुए शहीद होने का जज़्बा इमाम हुसैन (अ) से ही सीखा है।

इसी जज़्बे के तहत ज़रूरत पड़ने पर युवकों से लेकर बूढ़े तक मोर्चा संभाल लेते हैं और अपनी सबसे मूल्यवान चीज़ जान की क़ुर्बानी पेश कर देते हैं।

इतिहास साक्षी है कि कोई भी क़ौम जो अपने धर्म, अपने राष्ट्र और अपने सम्मान की रक्षा के लिए जान की क़ुर्बानी देने से नहीं डरती, उसे दुनिया की कोई ताक़त न ही पराजित कर सकती है और न ही मिटा सकती है।

इस्लाम, मुसलमानों को शहादत अर्थात मौत को गले लगाकर हमेशा के लिए अमर हो जाने का पाठ पढ़ाता है, जिसके कारण इस्लाम के अनुयाई हमेशा एक ज़िंदा क़ौम के रूप में पहचाने जाते हैं।


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