?>

ट्रम्प चले गए और ईरान पर हमले की कामना बिन सलमान और नेतनयाहू के दिल में ही रह गई!

ट्रम्प चले गए और ईरान पर हमले की कामना बिन सलमान और नेतनयाहू के दिल में ही रह गई!

अगले कुछ घंटों में डोनल्ड ट्रम्प की सरकार की उम्र ख़त्म हो जाएगी जबकि ईरान पर हमले की कामना हमेशा के लिए उनके दिल में ही रह जाएगी।

कुछ ही घंटों में अमरीका की सबसे पागल, सबसे लापरवाह, सबसे ज़्यादा नस्लवादी और सबसे चरमपंथी सरकार ख़त्म हो जाएगी जबकि वह बेनयामिन नेतनयाहू और बिन सलमान के दुष्ट लक्ष्यों यानी ईरान के घुटने टिकाने को व्यवहारिक बनाने में तनिक भी सफलता हासिल नहीं कर सकी है। इन दो पागलों व हारे हुए लोगों ने ईरान की शक्ति को सीमित करने के लिए ट्रम्प से आशा लगाए हुए थे।

 

ट्रम्प सरकार से पहले तक अमरीका में अमरीकी से ज़्यादा ज़ायोनी सरकार सत्ता में नहीं आई थी। ट्रम्प ने ईरान पर प्रतिबंध कड़े करने में तो वैश्विक ज़ायोनिज़म से वफ़ादारी और उसके आदेशों का पालन करने में पूरी प्रतिबद्धता दिखाई लेकिन वे कभी भी ईरान के ख़िलाफ़ जंग शुरू करने की ज़ायोनियों की मांग पूरी नहीं कर सके। अगर नेतनयाहू में ईरान पर हमले की हिम्मत होती तो वे चरमपंथी ट्रम्प सरकार के काल में यह काम कर डालते। ट्रम्प, यह बात नेतनयाहू से बेहतर जानते थे कि अगर इस्राईल ने ईरान पर हमला किया तो फिर धरती पर उसका अस्तित्व ही बाक़ी नहीं बचेगा।

 

ईरान के मुक़ाबले में अगर दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताक़त की हालत यह है तो फिर सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और बहरैन समेत ईरान के अरब पड़ोसियों की हालत को अच्छी तरह समझा जा सकता है। अगले कुछ घंटों में बिन सलमान और ईरान के पड़ोसी अरब देशों के नेता समझ जाएंगे कि पागल ट्रम्प के लिए अपने ख़ज़ानों का मुंह खोलना कितनी बड़ी बेवक़ूफ़ी थी। ये अरब नेता ट्रम्प को भगवान की तरह पूजते थे जबकि ट्रम्प, ईरान के संबंध में उनकी मनोकामना को पूरा किए बिना ही जा रहे हैं।

 

अभी कुछ दिन पहले तक बिन सलमान और बिन ज़ायद को ट्रम्प के पागलपन से बहुत ज़्यादा आशा थी और उन्हें पूरा विश्वास था कि वे अपनी सरकार के अंतिम दिनों में ईरान पर हमला कर देंगे। सऊदी और इमाराती मीडिया, अमरीका के विमान वाहक बेड़ों के फ़ार्स की खाड़ी में प्रवेश और क्षेत्र में अमरीका के बी-52 युद्धक विमानों की उड़ान का जश्न मना रहे थे लेकिन ट्रम्प, ईरान पर हमले के नतीजों से अच्छी तरह अवगत हैं। बिन सलमान और बिन ज़ायद को ट्रम्प के अंजाम से पाठ सीखना चाहिए और जो बाइडन की सरकार के साथ संबंधों में अपनी पिछली ग़लतियों को नहीं दोहराना चाहिए और अपने ख़ज़ाने और ज़मीनी, समुद्री व हवाई सीमाओं को उनके लिए नहीं खोलना चाहिए।


अपना कमेंट भेजें

आपका ईमेल शो नहीं किया जायेगा. आवश्यक फ़ील्ड पर * का निशान लगा है

*

پیام رهبر انقلاب به مسلمانان جهان به مناسبت حج 1441 / 2020
conference-abu-talib
We are All Zakzaky
सेंचुरी डील स्वीकार नहीं