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जब एक राजदूत ने यूएई के क्राउन प्रिंस की फ़ज़ीहत कर दी ...

जब एक राजदूत ने यूएई के क्राउन प्रिंस की फ़ज़ीहत कर दी ...

ज़ायोनी प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू ने अपने चुनावी कैम्पेन में कहा है कि इस्राईली सरकार चाहती है कि पश्चिमी तट के उन इलाक़ों को, अपनी धरती में शामिल कर ले जिनमें उसकी काॅलोनियां बनी हुई हैं। उनके इस बयान के तुरंत बाद इस्राईल में अमरीका के राजदूत डेविड फ़्रेडमैन ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि इस्राईल को इस बात का हक़ है कि वह पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों को अपनी धरती में शामिल कर ले।

यह दोनों बयान न तो संयोग से और न ही संकोच से एक के बाद एक दिए गए हैं क्योंकि स्पष्ट है कि अमरीका ने, जब से ट्रम्प ने सत्ता संभाली है, बरसों से जारी कथित मध्यस्थता की नक़ाब हटा दी है और अब वह ख़ुद ही विवाद का एक पक्ष बन चुका है बल्कि वह इससे भी आगे बढ़ते हुए "पोप से बड़ा कैथोलिक" बन चुका है। जब से पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों को इस्राईल से जोड़ने की बात सामने आई है, तभी से सामने आने वाले बयानों और नीतियों पर एक नज़र डालना उचित होगा।

 

जब बैतुल मुक़द्दस पर क़ब्ज़ा करने वाली ज़ायोनी सरकार ने घोषणा की कि वह पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों को इस्राईल से जोड़ने की योजना को रोक रही है तो सभी इस बात को अच्छी तरह से जान गए थे कि यह हथकंडा, इस योजना को न्यूनतम नुक़सान के साथ लागू करने के अमरीका व इस्राईल के खेल का एक हिस्सा है। उन्होंने इस योजना को अस्थायी रूप से रोक दिया थ ताकि इसी सिलसिले के एक अन्य मामले को कम ख़र्च और कम नुक़सान के साथ पूरा कर लें। इसी लिए उन्होंने सीधे इस्राईल से संबंध स्थापना के मामले का रुख़ किया और इमारात व बहरैन को इस साज़िश में शामिल कर लिया। यहां तक कि इन दोनों देशों ने पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों को इस्राईल से जोड़ने की योजना को बहाना बना कर, ज़ायोनी शासन से संबंध स्थापित करने के अपने क़दम का औचित्य पेश करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि इस्राईल की इस योजना को रोकने के लिए ज़ायोनी शासन से संबंध स्थापित करने का समझौता किया है। अलबत्ता उनके इस झूठ पर उनके अलावा किसी ने भी यक़ीन नहीं किया। सच्चाई यह है कि इस ग़द्दारी वाले समझौते में, जिस पर वाइट हाउस में दस्तख़त किए गए, पश्चिमी तट के इलाक़ों को इस्राईल से जोड़ने की योजना का कोई नाम ही नहीं है और फ़िलिस्तीन की तरफ़ भी कोई इशारा नहीं किया गया है। केवल एक वाक्य में फ़िलिस्तीन का नाम आया है और काश यह वाक्य भी न होता। इस समझौते में लिखा गया हैः "फ़िलिस्तीन समस्या का एकमात्र समाधान, वार्ता है।"

 

इस आधार पर शुरू से ही यह बात स्पष्ट थी कि इमारात झूठ बोल रहा है और ज़ायोनी सेना के रेडियो से इंटरव्यू में डेविड फ़्रेडमैन के बयान ने अबूधाबी के झूठ को जगज़ाहिर कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पश्चिमी तट के कुछ क्षेत्रों को इस्राईल से जोड़ने की योजना निरस्त नहीं हुई बल्कि अस्थयायी रूप से और एक साल के लिए विलंबित कर दी गई है। नेतनयाहू तो पहले ही इस झूठ की क़लई खोल चुके हैं। उन्होंने अमरीका से लौटते हुए उसी हाथ से, जिससे उन्होंने इमारात व बहरैन से संबंध स्थापना के समझौते पर दस्तख़त किए थे, पश्चिमी तट के इलाक़ों में ज़ायोनियों के लिए पांच हज़ार घर बनाने की योजना पर हस्ताक्षर किए। इस बीच संयुक्त राष्ट्र संघ ने रिपोर्ट दी कि ज़ायोनी शासन ने पश्चिमी तट में फ़िलिस्तीनियों के 506 घरों को ध्वस्त कर दिया है। यह तथ्य, इस बात को पूरी तरह से प्रमाणित कर देते हैं कि इस्राईल से संबंध स्थापना का समझौता सिर्फ़ और सिर्फ़ इस्राईल के हित में है और अरब शासक किसी भी क़ीमत पर अपना सिंहासन बचाना चाहते हैं। इस समझौते से फ़िलिस्तीनियों का कोई भी भला नहीं होने वाला है बल्कि इससे, इस्राईल, फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों को रौंदने के लिए पहले से अधिक दुस्साहसी होगा।

 

फ़िलिस्तीनी अच्छी तरह जानते हैं कि सिर्फ़ संघर्ष और प्रतिरोध के माध्यम से ही वे इस्राईली की इस शर्मनाक योजना को नाकाम बना सकते हैं और इससे भी बढ़ कर यह कि वे एकता व एकजुटता के साथ अपने रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं। इसके मुक़ाबले में ज़ायोनी शासन और अमरीका, पश्चिमी तट के इलाक़ों को इस्राईल से जोड़ने की योजना को अधिक आसानी के साथ लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती अरब देशों को अपने साथ मिला कर वे यह लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। आज कुछ अरब देशों ने इस्राईल से कूटनैतिक संबंध स्थापित कर लिए हैं, कल राजनैतिक संबंध भी स्थापित हो जाएंगे और फिर शायद अमरीका व ज़ायोनी शासन उन्हें अपने दूतावास बैतुल मुक़द्दस में खोलने पर भी मजबूर कर देंगे। इसके बाद पश्चिमी तट को इस्राईल से जोड़ने की योजना को लागू करना बहुत आसान हो जाएगा। अलबत्ता यह अमरीका व ज़ायोनी शासन की सोच है लेकिन वे इस बात की ओर से निश्चेत हैं कि फ़िलिस्तीनियों ने अपनी एकता व प्रतिरोध से बड़े बड़े षड्यंत्रों को नाकाम बना दिया है जिनमें से अधिकतर अरब शासकों की देख-रेख में रचे गए थे और अब भी वे यही काम करेंगे।


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