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जब अपने ही खुश नहीं तो फिर एसे में दुश्मनों से दोस्ती का क्या फ़ाएदा?

जब अपने ही खुश नहीं तो फिर एसे में दुश्मनों से दोस्ती का क्या फ़ाएदा?

21 जनवरी को अबूधाबी में इस्राईल का दूतावास खुल गया। इससे एक दिन पहले संयुक्त अरब इमारात की मंत्री परिषद ने तेलअवीव में इस देश के दूतावास के खोले जाने का समर्थन किया था।

पिछले साल सितंबर से दिसंबर 2020 के दौरान यूएई, बहरैन, सूडान और मोरक्को ने इस्राईल के साथ अपने कूटनैतिक संबन्ध सामान्य किये थे।

इस्राईल से संबन्ध सामान्य करने वाले इन चार देशों में सबसे ऊपर यूएई रहा।  संयुक्त अरब इमारात ने 15 सितंबर 2020 को संबन्ध सामान्य करने के समझौते पर हस्ताक्षर किये थे।  इस घटना के बाद से यूएई और इस्रराईल के बीच विमानों का आनाजाना भी शुरू हो गया।  इसी दौरान दोनो पक्षों के कई व्यापारिक शिष्टमण्डलों ने एक-दूसरे के यहां का सफर किया।  इस्राईल, अबूधाबी में अपना दूतावास खोलने के साथ ही दुबई में काउन्सलेट खोलने के प्रयास में है।  इससे यह पता चलता है कि यूएई ने इस्राईल के साथ संबन्ध सामान्य करने को वरीयता दे रखी है और वह चरणबद्ध ढंग से अपने लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है।

जानकारों का कहना है कि जिन चार देशों ने इस्राईल के साथ अपने कूटनैतिक संबन्ध सामान्य किये हैं उनमें संयुक्त अरब इमारात का इस ओर अधिक झुकाव दिखाई दे रहा है।  टीकाकारों का कहना है कि इस्राईल से संबन्ध सामान्य करके यूएई जहां एक ओर सऊदी अरब से पीछा छुड़ाना चाहता है वहीं पर वह पश्चिम एशिया के संबन्ध में इस्राईल के समर्थन का इच्छुक है।

राजनैतिक विशलेषक कहते हैं कि पिछले दो वर्षों के दौरान इस्राईल, गंभीर आंतरिक संकटों का समाना कर रहा है।  31 सप्ताहों से अधिक समय से इस्राईली, नेतनयाहू के विरुद्ध प्रदर्शन करके उसको हटाने की मांग कर रहे हैं।  वहां की राजनैतिक अस्थिरता के कारण पिछले दो वर्षों के भीतर वहां पर तीन बार चुनाव हो चुके हैं और मार्च में चौथी बार संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं।  एसे में डूबते जहाज़ पर सवार होने का क्या फाएदा है?

एक अन्य बात यह है कि अमरीका में नई सरकार बनने और जो बाइडेन के सत्ता संभालने के समय अबूधाबी में इस्राईल के दूतावास का उद्घाटन यह बताता है कि यूएई की ओर से बाइडेन को यह संदेश दिया जा रहा है कि ट्रम्प के चले जाने से अबूधाबी बिल्कुल भी चिंतित नहीं है।

विशेष बात यह है कि संयुक्त अरब इमारात में अन्य अरब देशों की भांति वहां का जनमत, इस्राईल के साथ संबन्ध सामान्य करने का पक्षधर नहीं है किंतु सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण उसे व्यक्त करने में उसे समस्याएं आ रही हैं।  इसी संदर्भ में तुर्की में जीवन गुज़ार रहे यूएई के एक राजनैतिक विशलेषक "हम्द अश्शामिसी" कहते हैं कि संयुक्त अरब इमारात में इस्राईल के साथ संबन्ध सामान्य करने के फैसले का यदि कोई विरोध करता है तो उसको 10 वर्षों के कारावास और दस लाख दिरहम के जुर्माने की सज़ा हो सकती है।  इस्राईल के साथ संबन्ध सामान्य करने में हित में यूएई में बहुत ही कम लोग हैं किंतु सरकार उनको बढ़ा चढाकर दिखा रही है।


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