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जनरल क़ासिम सुलैमानी के ख़ुफ़िया सफ़र की कहानी ईरानी पायलट की ज़बानी, अमरीकियों ने अचानक हमें बग़दाद एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए कह दिया...माहान एयर ने ख़बर का खंडन किया

जनरल क़ासिम सुलैमानी के ख़ुफ़िया सफ़र की कहानी ईरानी पायलट की ज़बानी, अमरीकियों ने अचानक हमें बग़दाद एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए कह दिया...माहान एयर ने ख़बर का खंडन किया

ईरानी यात्री विमान के पायलट ने क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी के बारे में बड़ी दिलचस्प कहानी सुनाई। माहान एयर के पायलट कैपटन अमीर असदुल्लाही का कहना है कि यह घटना 2013 में सीरिया की राजधानी दमिश्क़ जाते समय हुई।

पायलट ने बताया कि मैं 200 यात्रियों के साथ तेहरान से दमिश्क़ रवाना हुआ। यात्रियों में जनरल क़ासिम सुलैमानी भी थे। आम तौर पर इराक़ की वायु सीमा से गुज़र कर जाने वाली इस फ़्लाइट के पायलट ने बताया कि इराक़ी वायु सीमा में प्रवेश से 80 मील पहले मैंने वायु सीमा में प्रवेश की अनुमति मांगी। बग़दाद एयरपोर्ट का कंट्रोल टावर अमरीकियों के हाथ में था।

कैपटन असदुल्लाही का कहना है कि कंट्रोल टावर से पहले तो 35 हज़ार फ़ुट की ऊंचाई पर प्रवेश की अनुमति मिल गई लेकिन जब विमान बग़दाद एयरपोर्ट के क़रीब पहुंचा और दमिश्क़ की ओर बढ़ने लगा तो कंट्रोल टावर ने हमें विमान बग़दाद एयरपोर्ट पर उतारने के लिए कहा।

कैपटन असदुल्लाही ने बताया कि दमिश्क़ की यात्रा में इससे पहले भी होता रहा है मगर यह पहली बार हो रहा था कि पहले सीमा में प्रवेश करने और गुज़र जाने की अनुमति दी गई और उसके बाद लैंडिंग के लिए कहा जाने लगा। अमरीकी फ़ोर्सेज़ ने इराक़ी सरकार पर दबाव डाला था कि वह तेहरान से दमिश्क़ जाने वाले विमानों की तलाशी ले क्योंकि उसके भीतर हथियारों की खेप हो सकती है।

पायलट ने कहा कि मैंने कंट्रोल टावर से कहा कि ईंधन की अधिक मात्रा की वजह से लैंडिंग की संभावना नहीं है तो कंट्रोल टावर से कहा गया कि आप हवा मे इतनी देर घूमते रहिए कि ईंधन की मात्रा कम जाए उसके बाद लैंडिंग कीजिए। कंट्रोल टावर ने कहा कि आप तेहरान भी वापस नहीं जा सकते। बग़दाद एयरपोर्ट पर लैंडिंग कीजिए वरना आपको निशाना बनाया जा सकता है।

कैप्टन असदुल्लाही ने बताया कि लगभग 15 मिनट तक बात चली। जनरल क़ासिम सुलैमानी मेरे क़रीब बैठे हुए थे और पूरी बात सुन रहे थे। पायलट के पास दो ही रास्ते थे। या तो लैंडिंग करते या फिर तेहरान लौटते लेकिन इस स्थिति में हमले की आशंका थी। जनरल क़ासिम सुलैमानी ने पायलट से कहा कि लैंडिंग करो। इस बीच जनरल क़ासिम सुलैमानी ने फ़्लाइट इंजीनियर सैयद रहीमी का ड्रेस पहन लिया, चश्मा और टोपी भी पहन ली और को-पायलट हुसैन वज़ीरी के पास काकपिट के अंदर ही बैठे रहे। जनरल सुलैमानी ने हमसे कहा कि काकपिट का दरवाज़ा लाक कर लीजिए और उस समय तक न खोलिए जब तक मैं न कहूं।

असदुल्लाही ने आगे बताया कि अमरीकी जांच एजेंसी एफ़बीई की दो गाड़ियां और इराक़ी इंटेलीजेन्स की एक गाड़ी आ गई और यह गाड़ियां विमान को रनवे के आख़िरी हिस्से तक ले गईं। पूरे विमान की तलाशी ली गई। अमरीकी और इराक़ी फ़ोर्सेज़ के 17 लोग विमान पर चढ़ गए। इनमें से चार ने सारे यात्रियों की तसवीरें लेनी शुरू कर दीं और हर तसवीर को बहुत ग़ौर से देख रहे थे। शायद उन्हें जनरल क़ासिम सुलैमानी की तलाश थी।

इन लोगों ने काकपिट की तलाशी नहीं ली लेकिन सामान की खेप दिखाने के लिए कहा। तो  कैप्टन असदुल्लाही को काकपिट छोड़कर जाना पड़ा क्योंकि सामान की खोप उन्हीं को खोलनी थी। वैसे यह काम फ़्लाइट इंजीनियर का था लेकिन फ़्लाइट इंजीनियर का ड्रेस जनरल क़ासिम सुलैमानी ने पहन रखा था। अमरीकी सैनिक ने मुझसे एक बाक्स खोलने के लिए कहा तो मैंने उसके सामने वह डालर बढ़ा दिए जो मेरे पास मौजूद थे। इसके बाद उसने तलाशी रोक दी और हम वहां से दमिश्क़ के लिए रवाना हो गए।

जब हम दमिश्क पहुंच गए तो जनरल सुलैमानी ने कहा कि यदि मैं राष्ट्रपति होता तो तुम्हें पुरस्कार देता।

माहान एयर ने कहा कि पायलट के हवाले से जो रिपोर्ट मीडिया ने छापी है वह दुरुस्त नहीं है।


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