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छवि के कथन में फिलिस्तीनी उपवासकों के हाल चाल

नबअ के संवाददाताओं का केंद्र- कब्जे वाले फिलिस्तीन में गाजा पट्टी की 13 साल से घेराबंदी है, और इस सीमा की रक्षा करने वाले मुसलमानों को भारी सुरक्षा उपायों और पृथ्वी और आकाश से अस्लहों की वर्षा के तहत रमज़ान के पवित्र महीने का स्वागत करना पड़ लरहा है और इफ्तार और सुबह सहरी के दस्तरख़्वान ज़ायोनी क्रूर हमले के कारण खंडहरों पर फैला रहे हैं।

(ABNA24.com) नबअ के संवाददाताओं का केंद्र- कब्जे वाले फिलिस्तीन में गाजा पट्टी की 13 साल से घेराबंदी है, और इस सीमा की रक्षा करने वाले मुसलमानों को भारी सुरक्षा उपायों और पृथ्वी और आकाश से अस्लहों की वर्षा के तहत रमज़ान के पवित्र महीने का स्वागत करना पड़ लरहा है और इफ्तार और सुबह सहरी के दस्तरख़्वान ज़ायोनी क्रूर हमले के कारण खंडहरों पर फैला रहे हैं।

हजारों फिलिस्तीनि रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान विशेष रूप से शुक्रवार को अल-अक़्सा मस्जिद में इबादत करने के लिए शहर क़ुद्स में जाते हैं, इस बीच, Quds शहर में सख्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं, और पुराने इलाके और मस्जिद अल- अक़्सा मस्जिद के प्रवेश द्वारों व आंगन पर बड़ी संख्या में ज़ायोनी सैन्य बलों को तैनात किया गया है। सुरक्षा बलों ने वेस्ट बैंक के नमाज़ियों के ललिऐ, जो शुक्रवार को धार्मिक नमाज़ के लिए अल- अक़्सा मस्जिद जाते हैं, आयु की  क़ैद लगा दी है और 40 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों को मस्जिद में प्रवेश करने से रोकते हैं।

रमज़ान के दौरान, फिलिस्तीन के मुसलमानों के अल-अक़्सा मस्जिद और क़ुब्बतुस-सख़्रह में, नमाज़े जमाअत करा आयोजन और इफ्तार दसस्तरख़्वान फैलाते है और ज़ायोनी शासन के कब्जे से फिलिस्तीन की आज़ादी के लिए प्रार्थना करते हैं। मग़रिब की अज़ान से पहले, यरूशलेम के मुस्लिम और तीर्थयात्री मस्जिद के आंगन में उपस्थित होकर और समूह स्थापित करके पवित्र कुरान का पाठ करना शुरू करते हैं, एक दूसरे के साथत इफ़्तार करने के लिए अज़ान की प्रतीक्षा की।

कब्जे वाले फिलिस्तीन में गाजा पट्टी की 13 साल से घेराबंदी है, और इस सीमा की रक्षा करने वाले मुसलमानों को भारी सुरक्षा उपायों और पृथ्वी और आकाश से अस्लहों की वर्षा के तहत रमज़ान के पवित्र महीने का स्वागत करना पड़ लरहा है और इफ्तार और सुबह सहरी के दस्तरख़्वान ज़ायोनी क्रूर हमले के कारण खंडहरों पर फैला रहे हैं, वेस्ट बैंक के अल-ख़लील में इब्राहिम (पीबीयूएच) ज़ियारतगाह के चैरिटी किचन, जिसे सहयोग एजेंसी के प्रयास और तुर्की के समन्वय से पिछले साल बहाल किया था और रमज़ान के पवित्र महीने में 5,000 फिलिस्तीनी उपवासकों का स्वागत करता है।





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