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चीन अब भारत को यह समझाने की भी कोशिश कर रहा है कि उसकी जवाबी कार्यवाही क्या हो और उसका स्तर कैसा रहे!

चीन अब भारत को यह समझाने की भी कोशिश कर रहा है कि उसकी जवाबी कार्यवाही क्या हो और उसका स्तर कैसा रहे!

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े अख़बार ग्लोबल टाइम्ज़ ने अपने एक लेख में भारत और अमरीका के बीच हुए हालिया महत्वपूर्ण समझौते के संदर्भ में टिप्पणी करते हुए भारत को ऊंच नीच समझाने और यह सिखाने की कोशिश की है कि चीन के साथ जारी सीमा विवाद को लेकर भारत की जवाबी रणनीति क्या होनी चाहिए।

अख़बार ने लिखा है कि भारत और अमरीका के बीच बेसिक एक्सचेंज एंड कोआप्रेशन एग्रीमेंट बीका पर हस्ताक्षर हुए जिसके तहत भारत को महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच हासिल हो जाएगी जिनका किसी भी सैनिक टकराव के समय बहुत निर्णायक रोल होगा।

दोनों देशों के विदेश व रक्षा मंत्रियों के बीच टू प्लस टू वार्ता में इस सहमझौते पर हस्ताक्षर हुए। चीनी अख़बार को यह भी चिंता रही कि दोनों देशों के मंत्रियों ने कोविड-19 के प्रोटोकोल का किस सीमा तक पालन किया। अख़बार ने लिखा कि दोनों देश महामारी का दंश झेल रहे हैं मगर फिर भी दोनों देशों की यह वार्ता आमने सामने हुई। वार्ता के माध्यम से ट्रम्प अपने वोट शेयर बढ़ाने की कोशिश में हैं।

ट्रम्प ने 2016 में वाइट हाउस में प्रवेश के बाद से ही अमेरिका फ़र्स्ट की रणनीति पर काम किया जबकि चीन ने सभी देशों के साथ व्यापार को बढ़ावा दिया। इससे पता चलता है कि चीन दुनिया की ज़िम्मेदार ताक़त है।

अख़बार ने भारत को यह समझाने की कोशिश की है कि किसी भी देश की विदेश नीति राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर केन्द्रित होती है। इस समय जब चीन और अमरीका के रिश्तों में टकराव की स्थिति है और दूसरी ओर भारत चीन सीमा विवाद भी लंबा खिंच रहा है तो नई दिल्ली सरकार इस सोच में पड़ी हुई है कि इन दो विश्व शक्तियों के बीच किस तरह की रणनीति आगे बढ़ाए।

अमरीका तो भारत से बहुत दूर है लेकिन चीन उसका पड़ोसी देश है और हमेशा रहेगा। सीमा विवाद में अपने कठोर रुख़ के बावजूद भारत के हित में यह कतई नहीं है कि वह ख़ुद को अमरीका के रथ से बांध ले। चीन अमरीका तनाव जारी रहने की स्थिति में अमरीका की कोशिश होगी कि भारत को हाथों हाथ ले मगर चूंकि भारत एक शक्ति के रूप में उभरना चाहता है इसलिए उसके हित में यह हरगिज़ नहीं होगा कि अमरीका की गोद में बैठ जाए। भारत के लिए यही उचित होगा कि अपनी स्वाधीन नीति जारी रखे।


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