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गांव वालो! कोरोना से तुम्हे ख़ुद ही निपटना होगा, यह हाल है गुजरात मॉडल का जहाँ के 7400 की आबादी वाले एक गांव में एक भी डॉक्टर नहीं, कड़ाई से एहतियात न की तो समझ लो क्या होगा...

गांव वालो! कोरोना से तुम्हे ख़ुद ही निपटना होगा, यह हाल है गुजरात मॉडल का जहाँ के 7400 की आबादी वाले एक गांव में एक भी डॉक्टर नहीं, कड़ाई से एहतियात न की तो समझ लो क्या होगा...

भारत में दूर दराज़ के गांवों में कोरोना ने दस्तक दे दी है। ऐसे बहुत से गांव हैं जहाँ एक भी डॉक्टर नहीं है और वहां कोविड-19 के केस फैल रहे हैं।

ऐसी ही गावों में गुजरात का एक चोगथ गांव है, जहां कोविड-19 के मरीज़ों की मदद का सिर्फ़ एक ही ज़रिया वहाँ का फ़ार्मेसिस्ट जीतू है।

भारत में कोरोना की दूसरी लहर में जब बड़े बड़े शहर, अस्पतालों में ऑक्सीजन और दवाओं की कमी की वजह से तबाह हो गए, ऐसी हालत में गावों में क्या होगा जब वहाँ कोरोना पैर पसार लेगा।

ग्रामीण इलाक़ों और दूर दराज़ के गावों में दवाओं और डॉक्टरों की और ज़्यादा कमी हैं, जिसकी वजह से ग्रामवासियों को, इलाज की सुविधा के बिना ज़िन्दगी की जंग ख़ुद लड़नी है।

इसी तरह का एक गांव पश्चिमी राज्य गुजरात में है जिसका नाम चोगथ है। इस गांव के लोगों का व्यवसाय खेती और इसकी आबादी 2011 के सेंसस के मुताबिक़ क़रीब 7400 है। इस हफ़्ते के शुरू में जीतू ने सीएनएन को बताया कि इस गांव में 500-600 कोविड-19 के मामले हैं, जबकि इसी गांव के दूसरे लोगों ने इस गांव में बढ़ती मौतों का ज़िक्र किया।

इतनी बड़ी आबादी वाले इस गांव में एक भी डॉक्टर या चिकित्सक नहीं है और इस गांव से सबसे क़रीब शहर एक घंटे की दूरी पर है। कुछ पड़ोसी क़स्बों में क्लिनिक्स हैं लेकिन इन छोटी सुविधाओं में भी बिस्तर और ज़रूरी सामान नहीं है।

कोविड-19 के बढ़ते हुए मामले और मौतों के बीच जीतू एकमात्र शख़्स है जो फ़ार्मेसिस्ट के रूप में अपने अनुभव को डॉक्टर के काम में इस्तेमाल करते हुए ऑक्सीजन और ज़रूरी दवाओं की आपूर्ति कर रहा है।

जीतू ने सीएनएन को बतायाः यहां कोई हेल्थ सेंटर, कोई डॉक्टर, कोई नर्स नहीं। इस गांव में कोई फ़ैसिलिटी नहीं। ऐसे हालात में मैंने ख़ुद को इस तरह इससे निपटने में फ़िट पाया। 


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