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क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक युद्ध के पीछे क्या है लक्ष्य

क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक युद्ध के पीछे क्या है लक्ष्य

लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा है कि क्षेत्र के हालात कुछ इस प्रकार बनते जा रहे हैं कि जिन्हें अमरीका और कुछ दूसरे देश तथा उनसे संबंधित संचार माध्यम हवा दे रहे हैं और इस स्थिति में यह संभावना जताई जा रही है कि ज़ायोनी शासन युद्ध शुरु कर सकता है।

उन्होंने कहा कि फ़ार्स की खाड़ी के कुछ अरब देश और अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन ने पिछले दिनों यह अफ़वाह फैलाई कि लेबनान के विरुद्ध युद्ध हो सकता है जबकि इस अफ़वाह का लक्ष्य लेबनान पर दबाव डालना था।

उन्होंने कहा कि लेबनान पर दबाव डालने का मुख्य लक्ष्य यह था कि लेबनान अपने दृष्टिकोण से पीछे हट जाए और विशेषकर समुद्री सीमाओं और शबआ फ़ार्म के बारे में अपने अधिकारों से पीछे हट जाए।

उन्होंने कहा कि लेबनान पर दबाव डालने का एक लक्ष्य यह भी था कि प्रतिरोध आंदोलन अपने मीज़ाइली कार्यक्रम और रक्षा कार्यक्रमों से हाथ खींच ले। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि प्रतिरोध आंदोलन इस क्षेत्र और इस धरती को स्वतंत्र कराने पर प्रतिबद्ध है जिसके बारे में लेबनानी सरकार का यह कहना है कि यह लेबनान का क्षेत्र है। 

हालिया एक महीने के दौरान क्षेत्र में नये युद्ध के बारे में बहुत अधिक प्रोपेगैंडे किए जा रहे हैं। कुछ लोगों का यह मानना है कि ईरान, हिज़्बुल्लाह और फ़िलिस्तीन के विरुद्ध अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की नीतियों के कारण क्षेत्र एक नये युद्ध की ओर बढ़ रहा है। यही कारण है कि हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने इस विषय को स्पष्ट कर दिया हैै।

उन्होंने बल देकर कहा कि अब यह बात साबित हो चुकी है कि सीरिया के युद्ध में हिज़्बुल्लाह के शामिल होने का फ़ैसला सही था। उन्होंने कहा कि सीरिया में अमरीका और सऊदी अरब ने साज़िश की थी और इसी साज़िश के परिणाम में दाइश ने सीरिया के 45 प्रतिशत भागों पर नियंत्रण कर लिया था। 
नये मनोवैज्ञानिक युद्ध को शुरु करने के पीछे दो लक्ष्य है जिसकी ओर हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने इशारा किया है। उन्होंने कहा कि इस का एक लक्ष्य ईरान और लेबनान सहित लक्षित देशों की जनता के बीच भय, निराशा और भय का माहौल पैदा करना है और इसका दूसरा लक्ष्य अमरीका द्वारा तेल के स्रोतों विशेषकर इराक़ के तेल स्रोतों को हासिल करना है। 


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