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क्यों इस्राईल यह नहीं चाहता कि यमन में अलहूसी ग्रुप की जीत हो...

क्यों इस्राईल यह नहीं चाहता कि यमन में अलहूसी ग्रुप की जीत हो...

इस्राईली सेना के एक रिटायर्ड जनरल और बैतुल मुक़द्दस थिंकटैंक के उप प्रमुख ने अपने लेख में लिखा है कि जंग में यमनियों की जीत, इस्रईल के लिए एक रणनैतिक ख़तरा हो सकता है और इस्राईल को चाहिए कि वह सऊदी अरब की मदद करे।

फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार इस्राईली सेना के इस रिटायर्ड जनरल ने लिखा कि अमरीका और इस्राईल का हित इसी में है कि सनआ सरकार के सैनिक देश के हर क्षेत्र पर नियंत्रण न कर सकें।

उन्होंने लेख में लिखा कि यमन में मानवता प्रेमी मुद्दे इस बात का कारण बन जाएं कि इस्राईल और अमरीका के लिए यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों की सफलता, रणनैतिक ख़तरा बन जाए और यह दोनों सरकारें ख़ामोश तमाशायी बनी रहें।

उनका कहना है कि तेल अवीव को सीधे या किसी और तरीक़े से अमरीका की सेन्ट्रल कमान के साथ मिलकर सऊदी गठबंधन की मदद करनी चाहिए और उन्हें सलाह देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब पर यमनियों के ड्रोन और मीज़ाइल हमले, तकनीकी, रणनैतिक और आडियालाजी के हिसा सब चिंता का विषय हैं।

यीरान लीरमान का कहना है कि सऊदी अरब और इमारात को चाहिए कि इस बारे में सोचना चाहिए कि इस जंग से कैसे निपटेंगे और इस संबंध में इस्राईल, इन देशों के साथ सूचनाओं के आदान प्रदान में सहायता कर सकता है और सटीक हमले करने वाले हथियार दे सकता है। उनका कहना था कि यमन युद्ध में जीतने के लिए एक मज़बूत संकल्प की आवश्यकता है और अगर दोनों पक्ष एक कूटनयिक हल की तरफ़ जाते हैं तो उसका परिणाम, ईरान की जीत के रूप में सामने नहीं आना चाहिए।

उन्होंने यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन को लाल सागर के लिए एक गंभीर ख़तरा क़रार दिया और लिखा कि हूसियों की इस्राईल से दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है और न ही इसको छिपाते हैं। 


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