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क्या सीरिया में अमरीकी ठिकानों पर हमलों में तेज़ी अफ़ग़ानिस्तान की तरह सीरिया से अमरीका को मार भगाने की योजना की आहट है? क्या फिर कुर्दों को धोखा देने की तैयारी में हैं बाइडन?

क्या सीरिया में अमरीकी ठिकानों पर हमलों में तेज़ी अफ़ग़ानिस्तान की तरह सीरिया से अमरीका को मार भगाने की योजना की आहट है? क्या फिर कुर्दों को धोखा देने की तैयारी में हैं बाइडन?

सीरिया के दैरुज़्ज़ूर इलाक़े में आयल फ़ील्ड के क़रीब अमरीकी ठिकानों पर 12 घंटे से भी कम समय में दो मिसाइल हमले हो गए। जबकि इसके साथ ही पश्चिमी इराक़ में एनुल असद छावनी पर भी हमला हो गया।

यह साफ़ ज़ाहिर है कि हालिया सप्ताहों में हमले तेज़ हो गए हैं और इन हमलों में इराक़ी संगठनों का हाथ है जो ईरान के क़रीब समझे जाते हैं। इन हमलों का मक़सद सीरिया और इराक़ दोनों ही देशों में अमरीकी छावनियों और ठिकानों को ख़त्म करना और अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालना है। यानी वही कहानी दोहराई जा रही है जो अफ़ग़ानिस्तान में नज़र आई।

सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद ने लगभग डेढ़ साल पहले रूस के टीवी चैनल को साक्षात्कार देते हुए कहा था कि अमरीका बड़ी ताक़त है इसलिए सीरियाई सेना के लिए उसके ख़िलाफ़ प्रत्यक्ष युद्ध शुरू करना कठिन है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अमरीकी सैनिकों को मार भगाने के लिए जनान्दोलन भी नहीं होगा और स्वयंसेवी संगठन भी कुछ नहीं करेंगे।

हो सकता है कि अमरीकी ठिकानों पर सीरिया के भीतर हमले दरअस्ल अमरीका को मार भगाने के लिए उस अभियान की शुरूआत हों जो इराक़ से अमरीकियों को भगाने के लिए शुरू हुआ था और जिसमें सीरियाई सरकार की बड़ी भूमिका बताई जाती है।

अमरीका की ट्रम्प सरकार ने सीरिया के तेल व गैस वाले इलाक़ों में अपने सैनिक ठिकाने बनाए थे और तेल व गैस उत्पादन के ठेके इस्राईली कंपनियों को दे दिए थे ताकि इससे होने वाली कमाई इस्राईली कंपनियां सीरियाई कुर्द संगठन आपस में बांट लें जो अमरीका से सहयोग कर रहे थे।

अब बाइडन सरकार सीरिया के कई मामलों में रूस से सहमति कर रही है और इस देश से अपने सैनिकों को बाहर निकालना चाहती है ताकि जानी और माली नुक़सान से बच सके।

इराक़ और सीरिया के प्रतिरोधक संगठन आख़िरकार अमरीका को भागने पर मजबूर कर देंगे। यह इशारे मिलने लगे हें कि अगर अमरीका ने अपने सैनिकों को निकाल न लिया तो साल 2009 और 2010 जैसे हालात पैदा हो जाएंगे जिनमें बड़ी संख्या में अमरीकी सैनिक मारे गए थे।

अमरीका निश्चित रूप से इराक़ और सीरिया से बाहर निकलेगा और कुर्द संगठनों को एक बार फिर उनके हाल पर छोड़ देगा। जिस तरह अमरीका ने अफ़ग़ान सरकार को तालेबान के रहमोकरम पर छोड़कर अपना बोरिया बिस्तर अफ़ग़ानिस्तान से बांध लिया है उसी तरह सीरियाई कुर्द भी अकेले रह जाएंगे और अमरीका इस इलाक़े से निकल जाएगा। हमारी समझ में यह बात नहीं आती कि कुर्द बार बार क्यों अमरीका से धोखा खाने के बाद भी सबक़ नहीं लेते।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार


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