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क्या संयुक्त इमारात में राजनैतिक हत्यांए शुरू हो गई हैं?

क्या संयुक्त इमारात में राजनैतिक हत्यांए शुरू हो गई हैं?

संयुक्त अरब इमारात में शार्जा के शासक के बेटे की लंदन में मौत के बाद यह बहस छिड़ गई है कि कहीं उन्हें इमारात के युवराज मुहम्मद बिन ज़ायद के इशारे पर क़त्ल तो नहीं कर दिया गया।

लेबनान के अलअख़बार नामक समाचार पत्र ने इस घटना की कई पहलुओं से समीक्षा की है। अख़बार ने दुबई के शासक मुहम्मद बिन राशिद की बेटी हया बिन्तुल हुसैन के यूरोप भाग जाने और वहां जाकर ब्रिटेन में ठहरने के मुद्दे का उल्लेख किया है और यह बिंदु उठाया है कि इस घटना के कुछ ही दिनों बाद 39 वर्षीय राजकुमार ख़ालिद बिन सुलतान की संदिग्ध मौत का मुद्दा उठाया है जो शार्जा के शासक सुल्तान बिन मुहम्मद अलक़ासेमी के बेटे थे। इस मौत पर सवाल उठने लगे हैं। सवाल इसलिए उठने लगे हैं कि ब्रिटिश पुलिस इस मौत के कारणों के बारे में कोई ठोस नतीजा नहीं निकाल सकी है। एक बात से संदेह और बढ़ गया कि राजकुमार का पोस्ट मार्टम किए बिना उसे तत्काल दफ़्न कर दिया गया। जब मृत राजकुमार को दफ़्न किया गया तो उसके पिता और शार्जा के शासक तो मौजूद थे लेकिन मुहम्मद बिन राशिद दुबई के शासक तथा इमारात के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन ज़ाएद इमारात में मौजूद होने के बावजूद अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए।

वैसे इमारात का इतिहास देखा जाए तो वहां बग़ावतों और क़रीबी लोगों व रिश्तेदारों की हत्याओं की बड़ी लंबी दास्तान है। अलअख़बार ने अपनी समीक्षा में कहा है कि शार्जा के शासक के बेटे को मुहम्मद बिन ज़ाएद के आदेश पर बहुत जटिल योजना बनाकर मार डाला गया है। इस हत्या की तैयारी कई महीने पहले से शुरू हो गई थी। अलक़ासेमी की हत्या की निर्णय तब किया गया जब मुहम्मद बिन ज़ाएद को सरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में बताया गया कि अलक़ासेमी सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में हैं जो मुहम्मद बिन सलमान के मातहत काम करती हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि सऊदी इंटेलीजेन्स एजेंसियों से अलक़ासेमी के किस प्रकार के संबंध थे।

यदि यह रिपोर्ट सही है तो मुहम्मद बिन ज़ाएद ने यह हत्या करवाकर दो संदेश दिए हैं एक तो सऊदी अरब और विशेष रूप से मुहम्मद बिन सलमान को यह संदेश दिया है कि इमारात को सऊदी अधिकारियों की गतिविधियों की पूरी जानकारी है।

अलक़ासेमी की मौत एसे हालात में हुई है जब कई क्षत्रीय मुद्दों पर मुहम्मद बिन सलमान और मुहम्मद बिन ज़ाएद के बीच मतभेद पैदा हो गया है। इमारात ने को देशों को संदेश भेजा है और यमन से अपने सैनिक बाहर  निकालने की अपनी योजना के बारे में बताया है। ईरान के संबंध में जो तनाव पैदा किया जा रहा उसके बारे में इमारात का यह मानना है कि तनाव का रास्ता छोड़कर ईरान से सहमति बनाने की कोशिश करना चाहिए जबकि सऊदी अरब हालात को तनावपूर्ण बनाए रखना चाहता है।

दूसरी बात यह है कि इमारात के क्राउन प्रिंस और शार्जा के शासक के बीच मतभेद कोई नई बात नहीं है। मतभेद तब और बढ़ गया जब इमारात के क्राउन प्रिंस ने विदेश नीति में मनमानी शुरू कर दी।

अगर यह ख़बर सही है तो इमारात में महलों वाली ख़तरनाक साज़िश फिर से शुरू हो गई है।


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