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क्या रूस मध्यपूर्व में हर किसी का दोस्त बन सकता है?

क्या रूस मध्यपूर्व में हर किसी का दोस्त बन सकता है?

रूस क्षेत्र में ईरान का निकट सहयोगी है, उसने सीरिया में राष्ट्रपति बशार असद की सरकार का भरपूर समर्थन किया है और यमन की जनता पर सऊदी सैन्य गठबंधन के हमलों की आलोचना की है।

इस बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन सोमवार को सऊदी अरब की यात्रा पर पहुंचे हैं, जो 2007 के बाद से उनकी पहली यात्रा है। कुछ ही दिन पहले रियाज़ ने न केवल पुतिन के रूसी एयर डिफ़ेंस सिस्टम ख़रीदने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, बल्कि अपनी सरज़मीन पर अमरीका के 3,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैतानी पर भी सहमति जता दी थी।

पुतिन की यात्रा से ठीक पहले पेंटागट का यह एलान कि वह सऊदी अरब में 3,000 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात करने जा रहा है और पैट्रियट मिसाइलों की कई अन्य बैट्रियां भी लगा रहा है, इस बात का स्पष्ट चिन्ह है कि रियाज़ अभी भी पूरी तरह से वाशिंगटन के प्रभाव में है, कम से कम जब बात सुरक्षा और रक्षा की आती हो। लेकिन मास्को इसे अपने ख़िलाफ़ नहीं मानता है, इसलिए कि उसके सऊदी अरब से कभी बहुत अच्छे संबंध नहीं रहे हैं।


हालांकि पुतिन को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ दोस्ताना अंदाज़ में बातचीत करते हुए देखा गया है। इस दोस्ताना अदांज़ का असर दोनों देशों के बीच व्यापार पर भी पड़ा है, लेकिन तुलनात्मक रूप में यह अभी भी बहुत कम है। 2018 में इसमें तेज़ी से 15 प्रतिशत और 2019 में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

साथ ही साथ हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि मास्को, अमरीका के दुश्मन नम्बर वन ईरान का सहोयगी है। अमरीका का दावा है कि वह सऊदी अरब को ईरान के ख़तरे से बचाने के लिए ही वहां अपने सैनिक और हथियार तैनात कर रहा है। सऊदी अरब को यमन युद्ध में ईरान समर्थित अंसारुल्लाह आंदोलन के हाथों भारी नुक़सान और अपमानजनक हार का भी सामना है। लेकिन सऊदी अरब मध्यपूर्व में रूस के बढ़ते प्रभाव से अनजान भी नहीं रहना चाहता है।

इस संदर्भ में अरब विश्लेषक अम्मार वक्क़ाफ़ का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान मध्यपूर्व में एक सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि अमरीका के कई पारम्परिक सहयोगी रूस के निकट चले गए हैं।  

वक्क़ाफ़ का मानना है कि कई देश रूस के हथियारों को महत्व दे रहे हैं, लेकिन सऊदी अरब, रूस से एस-400 ख़रीदेगा, इसके बारे में कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी।

वहीं पत्रकार अली रिज़्क़ का कहना है कि वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्याकांड के बाद अमरीका और कांग्रेस से सऊदी अरब के रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं, इसलिए मैं नहीं समझता कि सऊदी रूसी हथियार ख़रीदकर इन्हें और ख़राब करेंगे।

मास्को में प्रोफ़ेसर ग्रिगोरी लूकियानोव का कहना है कि सऊदियों को यह अच्छी तरह से पता है कि अमरीकी एयर डिफ़ेंस सिस्टम की क्षमता बहुत सीमित है। इसकी अपनी कई कमज़ोरियां हैं, जिनमें से एक है कि यह सीधे सऊदियों के निंयत्रण में नहीं है, इसका पूरा निंयत्रण अमरीकियों के हाथों में हैं। इसके अलावा रूस का एयर डिफ़ेंस सिस्टम सस्ता और अच्छा है, लेकिन मैं नहीं समझता हूं कि सऊदी अभी आज़ादी से फ़ैसला करने की स्थिति में हैं।


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