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क्या इस्राईल से गिन गिन कर अपना बदला ले रहा है ईरान? इस्राईली इलाक़ों में अजीब घटनाओं की क्या है हक़ीक़त? पांच बेहद महत्वपूर्ण डेवलप्मेंट्स पर एक सरसरी नज़र

क्या इस्राईल से गिन गिन कर अपना बदला ले रहा है ईरान? इस्राईली इलाक़ों में अजीब घटनाओं की क्या है हक़ीक़त? पांच बेहद महत्वपूर्ण डेवलप्मेंट्स पर एक सरसरी नज़र

जब इस्राईल की सुरक्षा व सामरिक कमांड की शीर्ष बैठक हो और उसमें सारे बड़े सैनिक अफ़सर, रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भाग लें और इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नेतनयाहू करें तो इसका साफ़ मतलब यह है कि इस्राईल के परमाणु केन्द्र डिमोना से केवल 30 किलोमीटर दूरी पर गिरने वाले सीरियाई मिसाइल ने इस्राईल को उस ख़तरे के सामने ला खड़ा किया है जो अपूर्व है।

इस्राईलियों ने जो जानकारियां लीक की हैं उनमें बताया गया है कि यह बैठक ग़ज़्ज़ा पट्टी से इस्राईली बस्तियों पर तीस मिसाइल फ़ायर किए जाने की वजह से हुई ताकि गज़्ज़ा में स्थित फ़िलिस्तीनी संगठनों को संदेश दिया जाए कि इस प्रकार के हमलों से इस्राईल कड़ाई से निपटेगा। यानी ग़ज़्ज़ा पट्टी पर चढ़ाई की जा सकती है। मगर नेतनयाहू इस विकल्प के बारे में बहुत मजबूरी में ही सोचेंगे क्योंकि इस समय अमरीका ने उन्हें किनारे लगा रखा है और इस्राईल में अंदरूनी हालात बहुत ख़राब हैं। इन हालात में नेतनयाहू कोई भी एसा क़दम उठाने से बचेंगे जिसके नतीजे में व्यापक युद्ध शुरू हो सकता हो।

कई घटनाएं हुई हैं जिनसे इस्राईली नेतत्व के हाथ पांव फूल गए हैं। एक इस्राईली लेखक ने यहां तक लिख दिया कि यहूदियों का इस्राईल छोड़ कर भाग जाना ही अब सबसे बेहतर समाधान है। अगर हम बेहद महत्वपूर्ण घटनाओं पर नज़र डालना चाहें तो वह इस प्रकार हैः

-1 सीरियाई मिसाइल का डिमोना तक पहुंचना है। कई रिपोर्टों में यह बताया गया कि मिसाइल दरअस्ल इस्राईल के एफ़-16 युद्धक विमान को निशाना बनाना चाहता था मगर निशाना चूक जाने की वजह से वह ईलात के इलाक़े की ओर चला गया। कुछ रिपोर्टें कहती हैं कि यह फ़ातेह 110 नाम का ईरानी मिसाइल या एम 600 नाम का ज़मीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल था जिसका बड़ा भंडार सीरिया के पास मौजूद है। सीरिया ने अपनी रिपोर्ट में एफ़-16 को निशाना बनाने वाली बात रूस के इशारे पर कही ताकि तनाव को कंट्रोल किया जा सके। सवाल यह है कि अगर यह साम-5 मिसाइल था तो इस्राईल ने इसका मल्बा क्यों छिपाया। इससे पहले कब यह मिसाइल 300 किलोमीटर की दूरी तक पहुंचते थे?

-2 इस मिसाइल के डिमोना पहुंचने से दो दिन पहले रमला शहर के क़रीब मिसाइलों के एक कारख़ाने में ज़ोरदार धमाका हुआ था। इस्राईली सेना ने इस पूरे इलाक़े को घेर लिया था और कोई भी ख़बर बाहर नहीं आने दी थी। सवाल यह है कि इस धमाके में किसका हाथ था?

-3 हैफ़ा बंदरगाह में अमोनिया के भंडार से गैस के रिसाव की बड़ी संक्षिप्त ख़बर आई और यह नहीं बताया गया कि इस रिसाव का कारण क्या था?

-4 यह देखने में आया कि ईरान के तेल टैंकर पर इस्राईल ने ड्रोन विमान से बमबारी की तो तीन में से केवल एक टैंकर को निशाना बनाया और उस समय निशाना बनाया जब वह अपना तेल सीरिया की बानियास बंदरगाह पर उतार चुका था। यानी यह हमला सांकेतिक था और हमले का आदेश देने वाले को अच्छी तरह मालूम था कि तेल भरे टैंकर पर हमला करने का ख़मियाज़ा इस्राईल को भुगतना पड़ेगा। इस स्थिति में समुद्री पर्यावरण के लिए जो त्रास्दी उत्पन्न होती उससे इस्राईल भी सुरक्षित न रह पाता।

-5 बैतुल मुक़द्दस में तीसरा इंतेफ़ाज़ा जनान्दोलन फूट पड़ा है हज़ारों की संख्या में फ़िलिस्तीनी बैतुल मुक़द्दस शहर की ओर रवाना हो गए जिसके बाद होने वाली झड़पों में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। नेतनयाहू ने आनन फ़ानन में फ़िलिस्तीनी प्रशासन और महमूद अब्बास से मदद मांगी ताकि हालात क़ाबू में आएं।

अधिकतर सूत्रों का कहना है कि सीरियाई मिसाइल अपने निशाने से चूका नहीं बल्कि अपने वारहेड के साथ बिल्कुल सही निशाने पर पहुंचा और वारहेड से बड़ा धमाका इस्राईली सैनिक और राजनैतिक नेतृत्व के भीतर हुआ। इस मिसाइल के ज़रिए ईरान, सीरिया, हिज़्बुल्लाह, इराक़ और यमन की ताक़तों पर आधारित प्रतिरोधक मोर्चे ने इस्राईल को यह संदेश दिया है कि हम तुम्हारे अति सुरक्षित ठिकानों तक भी पहुंच सकते हैं जबकि तुम्हारा मिसाइल शील्ड सिस्टम आयरन डोम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस सिस्टम को तो ग़ज़्ज़ा स्थिति फ़िलिस्तीनी संगठन भी बेबस कर चुके हैं।

ईरान की आर्म्ड फ़ोर्सेज़ के जनरल स्टाफ़ के प्रमुख जनरल बाक़री ने कहा कि बानियास बंदरगाह के क़रीब तेल टैंकर पर इस्राईल के हमले का जवाब ज़रूर दिया जाएगा। अब अगर ईरान ने इस्राईल की उत्तेजक हरकतों पर ज़ोरदार जवाब दे दिया तो इसका साफ़ मतलब यह होगा कि ईरान को परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी की कोई फ़िक्र नहीं है।

इस्राईली लेखक अरी शबीत ने हाआरेत्ज़ अख़बार में छपे अपने लेख में यहूदी बस्तियों में रहने वालों को सलाह दी है कि इस्राईल के डूब रहे जहाज़ से छलांग लगाकर अपनी जान बचाएं। इससे दो साल पहले हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस्राईलियों को नसीहत की थी कि वह तैरना सीख लें क्योंकि उनके पास भागने के लिए समुद्र के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं होगा। अगर इस्राईल ने युद्ध की आग भड़काने की हिमाक़त की तो क्या इस्राईली अब ग़ज़्ज़ा पट्टी, सीरिया, ईरान, इराक़, यमन और लेबनान तक फैले मिसाइलों के घने जंगल के बीच सकून से रह सकेंगे?

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार


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