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क्या इस्राईल को संयुक्त राष्ट्र संघ से निकालने का वक़्त आ गया है?

क्या इस्राईल को संयुक्त राष्ट्र संघ से निकालने का वक़्त आ गया है?

प्रमाणों से पता चलता है कि ज़ायोनी शासन और ख़ुद नेतनयाहू ने बैतुल मुक़द्दस में झड़पों व टकराव का नया चरण शुरू किया है और इस तरह इस्राईल लगातार संयक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन कर रहा है।

इस बात की अनदेखी करते हुए कि बैतुल मुक़द्दस की इस्लामी पहचान को ख़त्म करना और उसकी डेमोग्रेफ़ी को बिगाड़ना ज़ायोनी शासन की बड़ी पुरानी नीति है और पिछले कई दशक से जारी रही है, ख़ुद बेनयामिन नेतनयाहू, बैतुल मुक़द्दस के हालात बिगाड़ कर और तनाव पैदा करके कम से कम दो लक्ष्य हासिल करना चाहते हैंः पहला यह कि चरमपंथी ज़ायोनियों को खुली छूट दी जाए जिनका संबंध नेफ़ताली बेनेत के दल से है ताकि नए मंत्रीमंडल में शामिल होने के लिए उन्हें तैयार किया जा सके। दूसरे यह कि भ्रष्टाचार के कई मामलों में जारी कई मुक़द्दमों से अपने आपको बचा सकें। नेतनयाहू अदालत से सज़ा होने के मुहाने पर हैं और चूंकि वे  निर्धारित एक महीने की अवधि में सरकार गठित नहीं कर पाए हैं इस लिए हंगामा खड़ा करके अपने प्रतिस्पर्धी दल लेपिद पार्टी को सरकार बनाने से रोकना चाहते हैं क्योंकि अगर लेपिद पार्टी की सरकार बन गई तो उनका जेल जाना निश्चित है।

 

सरकार गठन के लिए निर्धारित एक महीने की क़ानूनी अवधि समाप्त होते ही नेतनयाहू ने बैतुल मुक़द्दस में फ़िलिस्तीनियों का कड़ाई से दमन शुरू कर दिया और फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ हिंसा में वृद्धि कर दी। इन सब बातों के मद्देनज़र इस वक़्त अवैध अधिकृत बैतुलमुक़द्दस में जो हालात हैं उसके लिए सीधे सीधे ज़ायोनी शासन और ख़ुद बेनयामिन नेतनयाहू ज़िम्मेदार हैं और उन्हें इसकी सज़ा भुगतनी चाहिए। हालांकि नेतनयाहू यह सोच रहे हैं कि झड़पों को हवा देने से उनके प्रतिस्पर्धी व विरोधी दल, आंतरिक प्रतिस्पर्धा को छोड़ कर उनका साथ देने लगेंगे लेकिन इसके ठीक विपरीत इस बात की भी संभावना है कि फ़िलिस्तीनियों की जवाबी कार्यवाहियां, जो अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन और ज़ायोनी काॅलोनियों पर मीज़ाइलों की बारिश के रूप में जारी हैं, पूरे इस्राईल में नेतनयाहू का विरोध शुरू होने का कारण बन जाएं, विशेष कर इस लिए भी कि अनेक सर्वेक्षणों के अनुसार ज़्यादातर ज़ायोनी इस नतीजे पर पहुंच चुके हैं कि नेतनयाहू अपने निजी हितों के लिए इस शासन को बलि चढ़ाने के लिए भी तैयार हैं।

 

इस समय जो हालात दिखाई दे रहे हैं उनके अनुसार इस्राईल के घटक पश्चिमी देशों में, चाहे वे यूरोपीय देश हों या अमरीका की नई सरकार हो, यह विचार पाया जाता है कि नेतनयाहू अकारण हंगामा खड़ा करके उनके लिए भी समस्याएं पैदा करना चाहते हैं और यह काम वे कई बार कर चुके हैं और उनकी नीतियों का मज़ाक़ उड़ा चुके हैं। इस आधार पर अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियां किसी भी समय से अधिक ज़ायोनी शासन और नेतनयाहू को लगाम लगाने के लिए अनुकूल हैं और संयुक्त राष्ट्र संघ से ज़ायोनी शासन को निकालने के आग्रह के साथ ही अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में इस्राईल के अपराधों की जांच के लिए तथ्यपरक टीम को भेजना और हेग के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय में ज़ायोनी शासन और साथ ही नेतनयाहू के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा चलाना, इस्राईल को लगाम लगाने वाले कुछ अहम क़दम हो सकते हैं। 


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