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कोरोना से जंग का मुंबई माडलः कोविड को कंट्रोल कर रहा है शहर, रफ़तार धीमी लेकिन स्थायी, सुप्रीम कोर्ट भी हुआ क़ायल।

कोरोना से जंग का मुंबई माडलः कोविड को कंट्रोल कर रहा है शहर, रफ़तार धीमी लेकिन स्थायी, सुप्रीम कोर्ट भी हुआ क़ायल।

भारत की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई शहर में रविवार को 2395 नए कोरोना केस रिकार्ड किए गए। अप्रैल में यह दर रोज़ाना साढ़े सात हज़ार के आसपास होती थी। क्या हुआ कि हालात में इस तरह की बेहतरी देखने में आ रही है?

अप्रैल के आख़िरी दिनों तक अशीश औहाड़ को पूरा दिन बीमारों की ओर से काल रिसीव होती थीं और सब अस्पताल में ख़ाली बेड के बारे में पूछते थे या एम्बुलेंस और होम आइसोलेशन गाइडेन्स के बारे में पूछते थे।

औहाड़ मुंबई के 24 में से एक कोविड रेस्पान्स वार रूम में टेलीफ़ोन आप्रेटर के रूप में काम करते हैं।

जब अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर का पीक चल रहा था तो औहड़ को 8 घंटे की ड्युटी में 100 से अधिक काल रिसीव करनी होती थी।

 

फ़रवरी से मुंबई में दूसरी लहर शुरू हुई और चार अप्रैल को यह नौबत आ गई कि उस दिन सबसे अधिक 11206 नए केसेज़ सामने आए।

केसेज़ इतने बढ़ गए तो आक्सीजन और अस्पतालों में बेड की भारी कम हो गई। बहरहाल पिछले दस दिन से हालात में सुधार है और कोरोना के मामलों में गिरावट देखी जा रही है।

पिछले सप्ताह भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी मुंबई में मेडिकल आक्सीजन मैनेजमेंट की तारीफ़ की और नई दिल्ली से कहा कि वह मुंबई माडल को अपनाकर कोरोना से जंग करे।

कोर्ट ने कहा कि बाम्बे म्युनिसिपल कार्पोरेशन शानदार काम कर रही है। हम दिल्ली का अनादर नहीं करना चाहते लेकिन जो कुछ वह कर रहे हैं और जिस तरह वह मैनेज कर रहे हैं उससे हम सीख सकते हैं।

सवाल यही है कि मुंबई ने वास्तव में किया क्या?

मुंबई म्युनिसिपल चीफ़ इक़बाल सिंह चहल ने अलजज़ीरा को बताया कि हमने आपदा प्रबंधन टीमें बनाईं और अस्पतालों पर गहरी नज़र रखी। हमारी टीमों ने अस्पतालों से संपर्क रखा और इस बात पर नज़र रखी कि किस अस्पताल के पास अतिरिक्त आक्सीजन भंडार है फिर उसे आवश्यकता के अनुसार अस्पतालों को वितरित किया गया। जिन अस्पतालों के पास आक्सीजन का पर्याप्त भंडार नहीं था हमने उनसे कहा कि नए मरीज़ों को एडमिट न करें।

नगर पालिका ने कोविड-19 के लिए विशेष किए गए केन्द्रों में 24 लिक्विड मेडिकल आक्सीजन टैंक रखवा दिए। पहली लहर आई तो इसमें से आधे टैंक बच गए लेकिन इस इंफ़्रास्ट्रक्चर को ख़त्म नहीं किया गया इसलिए जब दूसरी लहर आई तो यह भंडार बहुत काम कर गया।

 

जब ज़रूरत के अनुसार गैस सिलिंडर मुंबई से बाहर जाने लगे तो चहल ने तत्काल यह व्यवस्था की कि सिलेंडर की तत्काल रिफ़िलिंग होती रहे।

अस्पतालों को निर्देश दिए गए कि टैंकों की भरपूर निगरानी करें, अगर कहीं कोई लीकेज है तो उसे तुरंत ठीक किया जाए।

महाराष्ट्रा की कोविड-19 टास्क फ़ोर्स ने सिफ़ारिश की कि भारी दबाव वाली नैज़ल आक्सीजन मशीनों का इस्तेमाल रोककर वेंटीलेशन को बेहतर किया जाए।

मुंबई में इस समय एक्टिव केसेज़ की संख्या 51 हज़ार 165 है जबकि दिल्ली में यह संख्या 87 हज़ार 907 है।

अब दिल्ली सरकार ने अपने अधिकारियों से कहा है कि वह मुंबई के अधिकारियों के अनुभवों से लाभ लेने के लिए उनसे बातचीत करें।

चहल का कहना था कि शहर के मुख्य आपदा कंट्रोल रूम को 24 वार रूम में बांट दिया गया। यह एसा था जब हमने 24 मिनी मुंबई सिटी बना दिए। विकेन्द्रीकरण का नतीजा यह हुआ कि काम करने में आसानी होने लगी।

 

शहर ने जो फ़ील्ड हास्पिटल पिछले साल बनाए थे उन्हें बाक़ी रखा गया है।

मुंबई के एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर सुरेश काकनी का कहना है कि हम ने अब अधिक आक्सीजन और आईसीयू बेड तैयार करने पर ध्यान केन्द्रित किया है क्योंकि दूसरी लहर ने इन दोनों चीज़ों के महत्व के बारे में अच्छी तरह से समझा दिया है।

अधिकारी कहते हैं कि इस समय मुंबई में पाज़िटिविटी रेट 8 प्रतिशत है। जब यह पांच प्रतिशत के नीचे आ जाएगा तब लाकडाउन में ढील दी जाएगी।  दिल्ली का पाज़िटिविटी रेट इस समय 30 प्रतिशत है।

भारत को अब तक जो अनुभव हुआ है उससे सीखना होगा ताकि आगे आने वाली नई लहरों से निपटने के लिए वह ज़्यादा बेहतर रूप में तैयार रहे।

स्रोतः अलजज़ीरा


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