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कोई भी अमरीकी राष्ट्रपति इस्राईल के परमाणु हथियारों के बारे में बात क्यों नहीं करता? क्या है ख़ुफ़िया वचन?

कोई भी अमरीकी राष्ट्रपति इस्राईल के परमाणु हथियारों के बारे में बात क्यों नहीं करता? क्या है ख़ुफ़िया वचन?

20 जनवरी को अमरीकी राष्ट्रपति पद संभालने के बाद 17 फ़रवरी तक जो बाइडन ने इस्राईली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू को पहली टेलीफ़ोन काल के लिए इंतज़ार करवाया। वाशिंगटन के कुछ जानकार सूत्रों ने निष्कर्ष निकाला कि इस सर्द मिजाज़ी का मतलब यह है कि बाइडन ने अभी तक उस "पत्र" पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिसमें इस्राईल, नियमित रूप से अमरीकी राष्ट्रपतियों से मांग करता है कि वह जब भी क्षेत्र में परमाणु अप्रसार के मुद्दे पर बात करें तो उसके परमाणु हथियारों का उल्लेख नहीं करें और ज़ायोनी शासन पर परमाणु हथिया

दशकों से अमरीका का हर राष्ट्रपति इस क्षेत्र में परमाणु अप्रसार पर ज़ोर देता रहा है, लेकिन इसके बावजूद वह कभी भी इस्राईल के परमाणु हथियारों के बारे में कोई बात नहीं करता है। वाशिंगटन को अब यह दोहरा मापदंड समाप्त करना चाहिए।

जैसा कि 2018 में न्यू यॉर्कर में प्रकाशित हुए एक लेख में एडम एंटॉस ने उल्लेख किया था कि बिल क्लिंटन के बाद से हर अमरीकी राष्ट्रपति को व्हाइट हाउस में प्रवेश करने के बाद, इस्राईल के एक गुप्त पत्र पर हस्ताक्षर करने होते हैं, यह एक प्रकार से अमरीका द्वारा इस्राईल को वचन देना होता है कि वह अपने शासनकाल में परमाणु हथियारों को लेकर तेल-अवीव पर दबाव नहीं बनाएगा। हालांकि इस्राईल के परमाणु हथियारों को लेकर अमरीका की नीति के क्षेत्र में विनाशकारी परिणाम सामने आ रहे हैं।

अमरीका अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इस्राईल की मदद करता रहा है और वह उसके परमाणु हथियारों पर चर्चा नहीं होने देता है।

इस तरह के पत्रों के नतीजे में अमरीकी सरकार, इस्राईल के परमाणु हथियारों के बारे में कुछ भी नहीं जानने का नाटक करती है और अपनी ही आंखों में धूल झोंकती रही है। जबकि धरती पर मौजूद हर शख़्स इस मुद्दे की सच्चाई और जानकर अंजान बनने के अमरीकी सरकार के ड्रामे को जानता है।

अगर कोई सरकारी कर्मचारी या परमाणु वैज्ञानिक इस्राईल के परमाणु हथियारों के बारे में ज़बान खोलता है तो उसे ऐसी सज़ा दी जाती है कि फिर कोई ऐसा करने के बारे में सोच भी नहीं सकता।

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से उनकी पहली प्रेस कांफ़्रेंस में पत्रकार हेलेन थोमस ने पूछ लिया था कि क्या उन्हें मध्यपूर्व में किसी परमाणु शक्ति के बारे में जानकारी है। ओबामा के पास पहले से ही जवाब तैयार थाः जैसा कि आप जानते हैं मैं परमाणु हथियारों के बारे में अटकलें नहीं लगाना चाहता, क्योंकि एक बुद्धिमान व्यक्ति के लिए जब तक कोई बात सुनिश्चित नहीं होती है, वह इस बारे में बात नहीं करता है। इस तरह के बयान बाक़ी सरकारी अधिकारियों के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। ओबामा प्रशासन ने तय शुदा लाइन का अनुसरण करते हुए बड़ी ही ढिटाई से अपने ही ज्ञान के बारे में झूठ बोल दिया कि उन्हें उसके बारे में यक़ीन नहीं है।

कोई भी व्यक्ति परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की आवश्यकता के बारे में अमरीकी घोषणाओं की विश्वसनीयता पर इस बयान के प्रभाव का अंदाज़ा लगा सकता है। यही वजह है कि आज मध्यपूर्व के कई देश एनपीटी पर अपनी प्रतिबद्धताओं के बारे में संदेह जता रहे हैं और सऊदी अरब और यूएई खुलकर परमाणु हथियारों की बात करने लगे हैं।

अमरीका ने न केवल परमाणु हथियारों के बारे में, बल्कि हर मामले में इस्राईल का अंधा अनुसरण करके अपनी विश्वसनीयता खो दी है। अमरीकी राष्ट्रपति गुप्त पत्र पर हस्ताक्षर करते हैं, और उनकी सरकार गूंगी बन जाती है। लेकिन विडंबना यह है कि इस्राईल ने परमाणु हथियारों का शब्द इस्तेमाल किए बिना, अपने परमाणु हथियारों के बारे में डींगें मारने और क्षेत्रीय देशों को धमकाने के तरीक़े खोज लिए हैं।


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