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कृर्षि बिल का विरोध संसद से सड़कों तक, मोदी सरकार डौमेज कंट्रोल में जुटी तो विपक्ष का बहिष्कार

कृर्षि बिल का विरोध संसद से सड़कों तक, मोदी सरकार डौमेज कंट्रोल में जुटी तो विपक्ष का बहिष्कार

भारत में कृर्षि बिल को लेकर संसद से सड़कों तक जहां मोदी सरकार का विरोध जारी है, वहीं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि राज्यसभा के निलंबित सदस्यों के माफ़ी मांगने के बाद ही उनका निलंबन रद्द करने पर विचार किया जाएगा।

हालांकि मंगलवार को भी राज्यसभा में कांग्रेस के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों ने आठ सदस्यों का निलंबन रद्द करने की मांग करते हुए, उच्च सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

उच्च सदन में सबसे पहले कांग्रेस सदस्यों ने कार्यवाही का बहिष्कार किया। इसके बाद आप, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के सदस्यों ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया। बाद में एनसीपी, सपा और राजद के सदस्य भी सदन से बाहर चले गए।

वहीं, देश में कृर्षि बिल के व्यापक विरोध को देखते हुए मोदी सरकार डैमेज कंट्रोल में जुट गई है और एक महीने पहले ही एमएसपी की घोषणा के साथ ही सरकार ने देश के तमाम बड़े अंग्रेज़ी और हिंदी अख़बारों में बड़े बड़े विज्ञापन दिए हैं।

खु़द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया समेत अलग-अलग कार्यक्रमों में इस विषय पर संसद और दूसरी जगहों पर अपनी राय रख रहे हैं और विपक्ष पर किसानों को बहकाने का आरोप लगा रहे हैं।

वहीं, निलंबित राज्यसभा सांसदों ने धरना ख़त्म कर दिया है, लेकिन विपक्षी दलों ने राज्यसभा का बायकाट जारी रखने का एलान किया है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि आठ सदस्यों के निलंबन को रद्द किए जाने तक विपक्ष सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेगा।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम संसद सत्र का बहिष्कार करेंगे जब तक सरकार हमारी तीन मांगों को स्वीकार नहीं करती है। पहली मांग है कि एक और विधेयक लाने के लिए जिसके तहत कोई भी MSP से नीचे फसल खरीद नहीं कर सकता है। दूसरी मांग है कि स्वामीनाथन आयोग द्वारा अनुशंसित फार्मूला के तहत तय किया जाना चाहिए और FCI जैसी सरकारी एजेंसियों को MSP से नीचे की फसल नहीं खरीदनी चाहिए।


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