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किसी भी महामारी से घातक है कोरोना के नाम पर मुसलमानों के साथ होने वाला भेदभाव

किसी भी महामारी से घातक है कोरोना के नाम पर मुसलमानों के साथ होने वाला भेदभाव

चीन से शुरू होकर कोरोना वायरस की महामारी पूरी दुनिया में फैल रही है, लेकिन कहीं भी इसे किसी धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा गया।

दुर्भाग्यवश भारत में इस्लामोफ़ोबिया की लहरों पर सवार होकर हिंदुत्ववादियों ने इस वैश्विक महामारी को भी मुस्लिम समुदाय से जोड़ना शुरू कर दिया है और तबलीग़ी जमात संगठन की एक ग़लती के कारण पूरे समुदाय के ख़िलाफ़ जमकर दुष्प्रचार किया जा रहा है।

हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा कुछ बहुसंख्यकों के दिमाग़ में इतना ज़हर भर दिया गया है कि अब मुसलमानों के साथ भेदभाव की सभी हदें पार कर दी गई हैं, यहां तक कि कुछ अस्पतालों ने मुसलमान मरीज़ों का इलाज करने से साफ़ इनकार कर दिया है या उन्हें अलग वार्ड में भर्ती किया जा रहा है।

बीजेपी आईटी सेल सोशल मीडिया पर मुस्लिम विरोधी या मुसलमानों को भ्रमित करने वाले संदेश वायरल कर रहा है। अब यह बात किसी से ढकी छिपी नहीं है कि जब से नई दिल्ली में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार का गठन हुआ है, मुसलमानों को सुनियोजित ढंग से निशाना बनाया जा रहा है और उनके मूल अधिकारों को छीने जाने की बड़ी साज़िश चल रही है। लेकिन महामारी फैलाने के घटिया आरोप लगाकर आम मुसलमानों को जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है, वह बहुत ही अफ़सोसनाक है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद झा ने अल-जज़ीरा चैनल की वेबसाइट पर प्रकाशित हुए अपने एक लेख में महामारी के बहाने भारतीय मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों का उल्लेख किया है।  

प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद लिखते हैः भारत में कोविड-19 के प्रकोप ने मुस्लिम समुदाय पर हमले का एक नया अवसर प्रदान कर दिया है। मुसलमानों के ख़िलाफ़ शारीरिक, मौखिक और मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ दिया गया है, ताकि समाज में उन्हें पहले से अधिक अलग-थलग किया जा सके।

मुसलमानों पर वायरस फैलाने के आरोप लगाकर उन पर हमले किए जा रहे हैं। हिंदू बहुल क्षेत्रों में बैठकें आयोजित करके एलान किया जा रहा है कि सब्ज़ी और अन्य चीज़ें बेचने वाले मुसलमान फेरी वालों को इन इलाक़ों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। गांवों और मोहल्लों के नुक्कड़ पर लाठी डंडों और हथियारों से लैस गैंग बैठे हुए हैं, जो हर आने वाले की पहचान सुनिश्चित करके ही उसे प्रवेश की अनुमति दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर अचानक इस्लामोफ़ोबिया संबंधित हैशटैग और संदेशों की भरमार हो गई है, जिसमें मुसलमानों पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वे जानबूझकर वायरस फैला रहे हैं। जिसे कोरोना जिहाद का नाम दिया गया है। ऐसे वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, जिनमें यह दिखाया गया है कि मुसलमान सब्ज़ियों और फलों को चाटकर या उन पर थूककर उन्हें बेच रहे हैं।

हालांकि ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं जो सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो के सत्यापन या उनकी वास्तविकता के बारे में सोचते हैं। इससे पहले भी कई वीडियो ऐसे सामने आ चुके हैं कि जिनमें हिंदुत्ववादियों ने मुसलमानों का भेस धारण करके उन्हें बदमान करने के लिए इस तरह के वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए।

देश में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ आंदोलन के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए थे, ख़ास तौर से शाहीन बाग़ में कई लोग इस तरह की हरकतें करते हुए पकड़े भी गए थे।

भारत में विशेषज्ञों ने इस्लामोफ़ोबिया के प्रचार के लिए मोदी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इसपर लगाम नहीं लगाई गई तो यह देश के लिए घातक साबित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति एक बार निंयत्रण से बाहर हो गई तो फिर उस पर क़ाबू पाना किसी के बस में नहीं होगा, इसलिए सरकार जितने जल्द हो सक अक़्ल के नाख़ून ले और मुसलमानों के साथ हो रहे भेदभाव तथा दुष्प्रचार पर रोक लगाए।




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