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किसान जिन कृर्षि सुधारों का विरोध कर रहे हैं, उनकी मांग ख़ुद उन्होंने की थी, मोदी

किसान जिन कृर्षि सुधारों का विरोध कर रहे हैं, उनकी मांग ख़ुद उन्होंने की थी, मोदी

मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृर्षि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का आंदोलन जारी है, लेकिन मोदी सरकार टस से मस नहीं हो रही है और वह किसानों की मांगों को स्वीकार करने के बजाए विपक्ष पर किसानों के लिए भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने का आरोप लगा रही है।

सोमवार को आंदोलनकारी किसानों ने दिल्ली की सीमाओं और देश भर में धरने के साथ भूख हड़ताल की।

किसानों की मांग है कि मोदी सरकार तीन नए कृषि क़ानूनों को रद्द करे, क्योंकि वह किसी भी तरह उनके हित में नहीं हैं, बल्कि उनकी बर्बादी का वारंट हैं।

इस बीच मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना था कि जो कृषि सुधार किये गए हैं वह वही सुधार हैं, जिनकी किसान संगठन और यहां तक की विपक्ष कई वर्षों से मांग कर रहे थे।

मोदी ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

हालांकि सरकार किसानों को यह समझाने में पूरी तरह से नाकाम रही है कि जो सुधार उसने किए हैं वह किस तरह से किसानों के हित में हैं।

किसानों और विशेषज्ञों का मानना है कि एमएसपी हटने और मंडियों पर टैक्स लगने से कार्पोरेट कंपनियां उनका जमकर शोषण करेंगी और उन्हें अपने ही खेतों में मज़दूरी करने पर मजबूर होना पड़ेगा।


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