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क़ुद्स का फ़्लैग मार्च इस्राईल में बेनेत की सरकार की पहली कड़ी परीक्षा, नेतनयाहू ने किस चालाकी से बिछा दिया यह जाल? क्या फिर शुरू हो जाएगी जंग?

क़ुद्स का फ़्लैग मार्च इस्राईल में बेनेत की सरकार की पहली कड़ी परीक्षा, नेतनयाहू ने किस चालाकी से बिछा दिया यह जाल? क्या फिर शुरू हो जाएगी जंग?

चरमपंथी यहूदी मंगलवार को जो फ़्लैग मार्च क़ुद्स में निकाल रहे हैं वह इस्राईल की नवगठित नफ़ताली बेनेत सरकार के लिए पहली कड़ी परीक्षा साबित हो सकता है जिसे इस्राईली संसद से अभी दो दिन पहले विश्वास मत हासिल हुआ है। कारण यह है कि इस फ़्लैग मार्च के नतीजे में क़ुद्स में अरबों और मुसलमानों से यहूदियों की भीषण झड़पें शुरू हो सकती हैं।

अगर बेनेत सरकार इस मार्च को टालती है तो इससे उसकी कमज़ोरी साबित होगी और अगर मार्च निकालती है तो झड़पों के साथ फ़िलिस्तीनी संगठनों से फिर युद्ध शुरू होने जाने की आशंका है।

फ़िलिस्तीनी फ़ोर्सेज़ ने चाहे वह 1948 के कब्ज़े वाले इलाक़े में हों, वेस्ट बैंक में हों, कुद्स में हों या ग़ज़्ज़ा पट्टी में हों या फिर लेबनान में हों साफ़ शब्दों में कह दिया है कि इस्राईली प्रशासन इस मार्च को रोके क्योंकि इस मार्च के नतीजे में हालात बिगड़े तो वह ख़ामोश नहीं रहेंगी।

परास्त हो चुके नेतनयाहू ने जान बूझ कर इस मार्च को उस समय के लिए टाल दिया जब वह सत्ता से बाहर हो जाएं और नई सरकार का गठन हो जाए जो इस कड़ी परीक्षा से गुज़रे। नेतनयाहू ने नई सरकार के लिए सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा कर दिया। नेतनयाहू अच्छी तरह जानते हैं कि कुद्स फ़िलिस्तीनियों की रेडलाइन है और क़ुद्स के फ़िलिस्तीनी अरब व इस्लामी पवित्र स्थलों का अनादर करने वाले इस मार्च का डटकर मुक़ाबला करेंगे।

ग़ज़्ज़ा की हालिया जंग के बाद जिसमें फ़िलिस्तीनी संगठनों को एतिहासिक विजय मिली है, समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। अब वह हालात नहीं रहे कि क़ुद्स में बसने वाले फ़िलिस्तीनियों पर इस्राईल निश्चिंत होकर ताक़त का इस्तेमाल करता था। अब इस तरह के हालात पैदा होने पर ग़ज़्ज़ा पट्टी से फ़िलिस्तीनियों के मिसाइल इस्राईली बस्तियों पर बरसने लगते हैं।

हमें नहीं मालूम कि बेनेत सरकार कैसे इस मार्च से निपटेगी क्या वह अनुमति देगी कि मध्य क़ुद्स के बाबुल अमूद इलाक़े से मार्च निकले और मस्जिदुल अक़सा के भीतर स्थित बुराक़ दीवार पर जाकर समाप्त हो? अगर अनुमति देगी और मार्च के साथ सैन्य बल का इस्तेमाल करेगी तो इसका मतलब यह है कि झड़पें होंगी। या फिर वह झड़पों और जंग की आशंका से बचने के लिए मार्च को कैंसल या स्थगित करेगी? इस स्थिति में उसे इस्राईल के भीतर चरमपंथी यहूदियों और नेतनयाहू की लिकुड पार्टी की भारी आलोचना का सामना करना पड़ेगा।

हर स्थिति में फ़िलिस्तीनियों को विजय ही मिलने वाली है जिस तरह वह इससे पहले बाबुल अमूद स्क्वायर, शैख़ जर्राह मुहल्ले और अक़सा में विजयी हुए। फ़िलिस्तीनियों की उंगलियां ट्रेगर पर हैं। कुछ ही घंटों में कुछ भी हो जाने की संभावना है।


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