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क़तर से सुलह की सऊदी ख़ैमे की कोशिशें क्या नाकाम हो चुकी हैं? क्या शैख़ क़रनी का इंटरव्यू सऊदी अरब की नीतियों का दर्पण है?

क़तर से सुलह की सऊदी ख़ैमे की कोशिशें क्या नाकाम हो चुकी हैं? क्या शैख़ क़रनी का इंटरव्यू सऊदी अरब की नीतियों का दर्पण है?

अगर अरब जगत पर नज़र डाली जाए तो फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में मौजूद अरब देशों के संबंधों में बड़ी जटिलता दिखाई देती है।

एक तरफ़ सऊदी अरब, इमारात, बहरैन और मिस्र हैं तो दूसरी ओर क़तर है। वैसे क़तर को तुर्की और ईरान का मज़बूत सहारा हासिल है जिसकी वजह से क़तर को काफ़ी मज़बूती मिली है।

हालिया समय में इस प्रकार की आशाएं व्यक्त की जाने लगी थीं कि क़तर से चार अरब देशों का विवाद शायद सुलझने के क़रीब है और फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों की आपसी दुशमनी दोस्ती में बदल जाएगी। आशाएं इस लिए जताई गईं कि बहरैन के प्रधानमंत्री ख़लीफ़ बिन सलमान आले ख़लीफ़ा ने क़तर के शासक शैख़ तमीम बिन हमद को फ़ोन कर दिया मगर फिर बहरैन में यह कहा जाने लगा कि यह फ़ोन काल बहरैन का औपचारिक स्टैंड नहीं है, औपचारिक स्टैंड वही है जो क़तर का बहिष्कार करने वाले देशों ने अपनाया है।

मगर सवाल यह है कि जब बहरैन, सऊदी अरब और इमारात में आम नागरिकों को क़तर के प्रति सहानुभूति दिखाने के आरोप में जेलों में डाला जा रहा है तो यह कैसे संभव है कि बहरैन के प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से फ़ैसला करके क़तर के अमीर को फ़ोन कर दें?

बहरहाल जो भी हो बहरैन एक फिर क़तर पर तीखे प्रहार करने लगा है। बहरैन के विदेश मंत्री ख़ालिद बिन अहमद आले ख़लीफ़ा ने ट्वीट किया कि क़तर जाली दस्तावेज़ों के आधार पर मुद्दों को जगह जगह उठा रहा है, क़तर गंभीर संकट से बाहर निकलने के लिए निराशा के साथ हाथ पांव मार रहा है।

बहरैनी विदेश मंत्री के ट्वीट से साफ़ हो गया कि बहरैन ने क़तर की दुशमनी का स्टैंड की बाक़ी रखा है।

दूसरी तरफ़ सऊदी अरब ने भी एक बार तो क़तरी भाइयों से बड़ा प्रेम जताया उनके लिए उमरह का वीज़ा जारी करने की व्यवस्था की। यह क़दम भी उसी समय उठाया गया जब बहरैन के प्रधानमंत्री ने क़तर के अमीर को फ़ोन किया था। इसका मतलब यह है कि दोनों ही देशों ने योजना के तहत यह क़दम उठाया था लेकिन इसके बदले उन्होंने क़तर से जो चाहा वह क़तर ने पूरा नहीं किया जिसके चलते क़तर की दुशमनी फिर अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई।

इस बीच सऊदी अरब के मुफ़्ती आएज़ अलक़रनी का एक बयान आ गया। उन्होंने रोताना टीवी पर बोलते हुए कहा कि वह हिंसा की नीति अपनाने पर शर्मिंदा हैं। बहुत से लोगों का कहना है कि क़रनी ने सलमान अलऔदा और मुहम्मद तुरैफ़ी को जेल की सलाख़ों के पीछे जाते देखा है अतः अपने अंजाम से डरकार उन्होंने यह बयान दिया है। इस बयान में उन्होंने क़तर की कड़े शब्दों में आलोचना की। इसका मतलब साफ़ है कि क़तर से सऊदी अरब, इमारात, बहरैन और मिस्र का टकराव जारी रहेगा तनाव कम होने के लक्षण फ़िलहाल दूर दूर तक दिखाई नहीं देते।   

ख़ालिद जयूसी

फ़िलिस्तीनी पत्रकार व लेखक


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