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कश्मीर का रोशनी क़ानून भी असंवैधानिक क़रार, क्या है यह क़ानून और सीबीआई किस चीज़ की करेगी जांच?

कश्मीर का रोशनी क़ानून भी असंवैधानिक क़रार, क्या है यह क़ानून और सीबीआई किस चीज़ की करेगी जांच?

बीते नौ अक्तूबर को जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने भारत प्रशासित कश्मीर राज्य के भूमि (धारकों को मालिकाना हक देना) क़ानून, 2001 या रोशनी क़ानून को ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक क़रार देते हुए इसके तहत भूमि आवंटन के मामलों की सीबीआई जांच का आदेश दिया है।

भारत की प्रसिद्ध हिन्दी न्यूज़ पोर्टल साइट द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक़, रोशनी क़ानून में 25 हज़ार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। सतर्कता ब्यूरो से जांच सीबीआई को सौंपे जाने का आदेश दिए जाने के बाद जांच एजेंसी ने इस विषय में नौ प्राथमिकी दर्ज की है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भारत की केंद्र सरकार शासित जम्मू कश्मीर प्रशासन ने इस क़ानून को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया और एक नवंबर को रोशनी क़ानून के तहत सभी ज़मीन हस्तांतरण को रद्द कर दिया। इससे पहले नवंबर 2018 में हाईकोर्ट ने रोशनी क़ानून के लाभार्थियों को उन्हें हस्तांतरित ज़मीन को बेचने या कोई अन्य ट्रांज़ेक्शन करने से रोक दिया था। इसके बाद तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने नवंबर 2018 में ही इसे निरस्त कर दिया था। हालांकि, 4 दिसंबर को राजस्व विभाग में विशेष सचिव नज़ीर अहमद ठाकुर ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर हाईकोर्ट से फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। याचिका में कहा गया कि इससे बड़ी संख्या में आम लोग अनायास ही पीड़ित हो जाएंगे जिनमें भूमिहीन कृषक और ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं जोकि स्वयं छोटे से टुकड़े पर घर बनाकर रह रहे हैं।

क्या है रोशनी क़ानून?

भारत प्रशासित कश्मीर राज्य भूमि (धारकों को मालिकाना हक देना) क़ानून, 2001 सरकारी ज़मीन पर क़ाबिज़ लोगों को मालिकाना हक़ देने के लिए लाया गया था और कहा गया था कि इससे होने वाली आय का इस्तेमाल विद्युत परियोजनाओं में निवेश के लिए किया जाएगा। रोशनी क़ानून तत्कालीन फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार लेकर आई थी। उन्होंने इसके लिए साल 1990 को आधार वर्ष माना था। इसका मतलब था कि 1990 से पहले जो लोग सरकारी ज़मीन पर क़ाबिज़ थे, वे ही इसका लाभ उठा सकेंगे। इसके साथ ही भूमि का मालिकाना हक़ उसके अनधिकृत क़ब्ज़ेदारों को इस शर्त पर दिया जाना था कि वे बाज़ार भाव पर सरकार को भूमि की क़ीमत का भुगतान करेंगे। हालांकि, इसके बाद पीडीपी-कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार में दो बार संशोधन किए गए और 1990 को आधार वर्ष बनाने के प्रावधान को हटा दिया गया। साल 2005 में जब मुफ़्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व वाली पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार ने नियमों में ढील देते हुए आधार वर्ष को 2004 कर दिया। इसके बाद जब पीडीपी के साथ गठबंधन में कांग्रेस के ग़ुलाम नबी आज़ाद मुख्यमंत्री बने तब उन्होंने रोशनी क़ानून में संशोधन करते हुए आधार वर्ष को 2007 कर दिया और ज़मीन के लिए भुगतान की जाने वाली क़ीमत को बाज़ार भाव का 25 फ़ीसदी निर्धारित कर दिया गया। इसके साथ ही सरकार ने किसानों को कृषि भूमि का मालिकाना हक़ मुफ़्त में देना शुरू कर दिया, जिसके तहत उन्हें डॉक्यूमेंटेशन फीस के रूप में केवल 100 रुपये प्रति कनाल की क़ीमत देनी थी।

इस बीच रोशनी घोटाले में नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेताओं के साथ पीडीपी और कांग्रेस के नेताओं और उनके रिश्तेदारों के नाम आने के साथ ही भाजपा और मुख्यधारा के क्षेत्रीय दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि जम्मू कश्मीर के सभी क्षेत्रों में फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के नेतृत्व में गुपकर घोषणा-पत्र गठबंधन (पीएजीडी) को मिल रहे समर्थन के कारण भाजपा चिढ़ गई है। उन्होंने दावा किया कि अब्दुल्लाह परिवार रोशनी कार्यक्रम का लाभार्थी नहीं है। नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रवक्ता ने कहा, ‘भाजपा के सभी दावे खारिज किए जा चुके हैं। भाजपा जान-बूझकर इस संबंध में झूठ फैला रही है। अनुच्छेद 370 और 35-ए को लेकर आवाज़ उठाने के कारण फारूक़ अब्दुल्लाह को निशाना बनाया जा रहा है। जहां जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए गुपकर घोषणा-पत्र गठबंधन बनाने के कारण मुख्यधारा के क्षेत्रीय दल पहले से ही भाजपा के राष्ट्रवादी एजेंडे के निशाने पर थे, वहीं रोशनी घोटाले के सामने आने से भाजपा अधिक आक्रामक हो गई है। डीडीसी चुनाव के बीच कई केंद्रीय मंत्री एनसी, पीडीपी और कांग्रेस पर लगातार हमले कर रहे हैं। वहीं, द वायर से बात करते हुए स्थानीय भाजपा नेता अजय भारती ज़िला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव के दौरान हो रही कार्रवाई पर कहते हैं, ‘यह पूरी कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही है। इसमें भाजपा या केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है। बता दें कि इस बीच डीडीसी चुनाव 28 नवंबर से 22 दिसंबर तक आठ चरणों में हो रहे हैं। 


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