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कब अदा करेगा वर्षों पुराना क़र्ज़, कब पूरे होंगे परमाणु समझौते के तहत किए गए वादेः लंदन से तेहरान का सवाल

कब अदा करेगा वर्षों पुराना क़र्ज़, कब पूरे होंगे परमाणु समझौते के तहत किए गए वादेः लंदन से तेहरान का सवाल

ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने अपनी ब्रितानी समकक्ष लिज़ ट्रस से टेलीफ़ोनी वार्ता में इस बात की आलोचना की कि परमाणु समझौते के बाद दोनों देशों के बीच होने वाले समझौतों पर अमल नहीं किया गया और साथ ही कहा कि वर्तमान स्थिति के लिए पूरी तरह अमरीका ज़िम्मेदार है।

दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की टेलीफ़ोनी वार्ता में प्रस्तावित वियेना वार्ता, क्षेत्रीय मुद्दों और कुछ अन्य विषयों पर चर्चा हुई। इस वार्ता में विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा कि परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ईरान और ब्रिटेन के बीच जितने समझौते हुए उनमें अधिकतर पर अमल नहीं हुआ और दोनों देशों के बीच व्यापार और वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए लंदन की ओर से अब भी ठोस क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है।

लिज़ ट्रस से अपनी बातचीत में डाक्टर अमीर अब्दुल्लाहियान ने ब्रिटेन पर ईरान के पुराने क़र्ज़े को याद दिलाया और कहा कि यह ईरानी जनता का पैसा है जो अदा होना चाहिए और लंदन को इसकी अदायगी के लिए तत्काल क़दम उठाना चाहिए।

परमाणु समझौते के बारे में बात करते हुए अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा कि वर्तमान स्थिति के लिए अमरीका ज़िम्मेदार है जबकि दूसरे पक्षों ने ख़ामोशी का रास्ता अपनाकर हालात को यहां तक पहुंचाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि वियेना में प्रस्तावित वार्ता तभी सफल होगी जब सारे प्रतिबंध हटेंगे और सभी पक्ष अपने अपने वादों का सम्मान करेंगे और साथ ही इस बात की गैरेंटी दी जाएगी कि वार्ता के नतीजों पर यक़ीनन अमल होगा।

विदेश मंत्री ने कहा कि परमाणु समझौते में शामिल अन्य देशों ने वादा किया था कि वे ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों को सामान्य बनाएंगे, इस विषय को वियेना वार्ता में पूरी तरह निपटाया जाना चाहिए।

ब्रितानी विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने इस टेलीफ़ोनी वार्ता में हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान की कोरोना संक्रमण से जल्द सेहतयाबी की कामना की और परमाणु समझौते पर वार्ता की अगली तारीख़ की घोषणा पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि तीनों यूरोपीय देश गंभीरता से चाहते हैं कि वार्ता में प्रगति हो।

टेलीफ़ोनी वार्ता में मानवता प्रेमी सहायता अफ़ग़ानिस्तान भेजे जाने, अफ़ग़ानिस्तान में व्यापक आधार वाली समावेशी सरकार के गठन, यमन की दयनीय स्थिति, लेबनान में राजनैतिक स्थिरता, बहरैन में मानवाधिकार के हनन जैसे विषयों पर भी वार्ता हुई।


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