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एक बार फिर इराक़ में अमरीकी दूतावास को बंद करने का दावा!

एक बार फिर इराक़ में अमरीकी दूतावास को बंद करने का दावा!

अमरीका ने एक बार फिर इराक़ में अपने दूतावास को बंद करने का दावा किया है। सवाल यह है कि अमरीका बार बार यह दावा क्यों कर रहा है?

रिपोर्टों के अनुसार अमरीका ने कहा है कि इराक़ में अपने दूतावास को बंद करना उसके दृष्टिगत विकल्पों में से एक है। दो जानकार सूत्रों का कहना है कि बग़दाद के ग्रीन ज़ोन में अमरीका के दूतावास पर होने वाले राॅकेट हमलों के बाद अमरीका इस विकल्प की समीक्षा कर रहा है। यह पहली बार नहीं है जब अमरीकी अधिकारी इस तरह का दावा कर रहे हों। बहरहाल समय समय इस विकल्प को पेश करने के कई कारण हो सकते हैं।

  1. अमरीका को इराक़ में कूटनैतिक उपस्थिति पर कोई आग्रह नहीं है बल्कि इराक़ की सरकार या जनता का एक भाग चाहता है कि अमरीका इराक़ में बना रहे क्योंकि उन्हें चिंता है कि अमरीकी दूतावास के बंद होने से इराक़ का राजनैतिक व सुरक्षा संतुलन ख़तरे में पड़ सकता है।
  2. कुछ पिट्ठू दल व धड़े, इराक़ में स्वाधीन धड़ों की एकछत्र सत्ता के प्रति चिंता के कारण अमरीका की कूटनैतिक गतिविधियों की समाप्ति का विरोध कर रहे हैं। यह वही चिंता है जो वाॅशिंग्टन, तेल अवीव व उनके क्षेत्रीय घटक पेश कर रहे हैं। लगता है कि वाइट हाउस यह दिखाना चाहता है कि इराक़ में उसकी कूटनैतिक उपस्थिति को इराक़ी जनता का समर्थन हासिल है।
  3. इराक़ की सरकार और कुछ धड़ों को इस बात की चिंता है कि इराक़ में अमरीका की कूटनैतिक गतिविधियां ख़त्म होने के बाद वाइट हाउस इस देश में विध्वंसक कार्यवाहियां कर सकता है ताकि यह दिखाए कि उसकी राजनैतिक उपस्थिति इराक़ी जनता व सरकार बल्कि क्षेत्र के लिए कितनी लाभदायक है। अंत में वह इन गतिविधियों के लिए दाइश को ज़िम्मेदार ठहराएगा और दावा करेगा कि उसके दूतावास के बंद होने के कारण इराक़ में अशांति पैदा हो गई है। इस लिए भी इराक़ की सरकार और जनता को, अपने हर प्रकार के भौतिक व नैतिक नुक़सान के बाद भी अमरीका की हस्तक्षेपपूर्ण उपस्थिति को हमेशा के लिए स्वीकार कर लेना चाहिए।

सच्चाई यह है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है क्योंकि इस तरह की विध्वंसक गतिविधियों के मुक़ाबले में इराक़ी जनता के हाथ बंधे हुए नहीं हैं। इस समय इराक़ में प्रतिरोधकर्ता गुट बन चुके हैं और काफ़ी सक्रिय हैं। यह गुट बड़ी आसानी से इस प्रकार की विध्वंसक गतिविधियों को रोक सकते हैं, जैसा कि अब तक इन्हीं गुटों ने आतंकी गुट दाइश की बढ़त से पैदा होने वाले संकट को रोकने में सबसे अहम भूमिका निभाई है। और यह बात सबके लिए स्पष्ट है कि दाइश को अमरीका, ज़ायोनी शासन और इन दोनों के क्षेत्रीय पिट्ठुओं ने सक्रिय किया था। इस आधार पर इराक़ की जनता और इराक़ी नेताओं को बग़दाद में अमरीका के दूतावास की ग़लत गतिविधियों को रोकने की अपनी मांग पर आग्रह करते रहना चाहिए क्योंकि यह दूतावास कूटनयिक केंद्र नहीं बल्कि एक बड़ा सैन्य अड्डा है।


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