ईरानः

ज़ायोनी शासन से मुक़ाबले के लिए फ़िलिस्तीनियों में बन गई है महत्वपूर्ण सहमति।

ज़ायोनी शासन से मुक़ाबले के लिए फ़िलिस्तीनियों में बन गई है महत्वपूर्ण सहमति।

ईरान की संसद मजलिसे शूराए इस्लामी के संसद सभापति के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के सलाहकार हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा है कि ज़ायोनी शासन से मुक़ाबले के लिए फ़िलिस्तीनियों में महत्वपूर्ण सहमति हो गयी है।

ईरान की संसद मजलिसे शूराए इस्लामी के संसद सभापति के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के सलाहकार हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा है कि ज़ायोनी शासन से मुक़ाबले के लिए फ़िलिस्तीनियों में महत्वपूर्ण सहमति हो गयी है।
उन्होंने लेबनान के अलमनार टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि इस सहमति के परिणाम अगले कुछ महीनों में फ़िलिस्तीन के भीतर देखे जा सकेंगे।
श्री अमीर हुसैन अब्दुल्लाहियान ने पिछले महीने तेहरान में आयोजित छठी अंतर्राष्ट्रीय फ़िलिस्तीन कांफ्रेंस की उपलब्धियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि फ़िलिस्तीन की समस्त धरती की स्वतंत्रता का एकमात्र मार्ग प्रतिरोध और ज़ायोनी शासन से मुक़ाबले के प्रतरोध के मंच पर समस्त फ़िलिस्तीनी गुटों की उपस्थिति की आवश्यकता,इस कांफ़्रेंस का संदेश था।
उनका कहना था कि दो सरकारों के गठन के विचार से फ़िलिस्तीन समस्या का समाधान नहीं होगा और फ़िलिस्तीन में संकट के समाधान का मार्ग, जनमत संग्रह का आयोजन है।
ईरान की संसद मजलिसे शूराए इस्लामी के संसद सभापति के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के सलाहकार ने इसी प्रकार यह बयान करते हुए कि अरब देशों विशेषकर सऊदी अरब के बारे में ईरान का दृष्टिकोण सकारात्मक है, कहा कि तेहरान और रियाज़ के संबंध समस्याओं का सामना कर रहे हैं और इसकी जड़ ईरान और क्षेत्र के बारे में सऊदी अरब का नकारात्मक परिणाम है।
अमीर अब्दुल्लाहियान ने बल दिया कि सऊदी अरब के अधिकारियों को अपने व्यवहार या कूटनीति में परिवर्तन करना चाहिए ताकि क्षेत्र को आभास हो कि सऊदी अरब ईरान और क्षेत्र के देशों के बारे में एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बहरैन को सऊदी सैनिकों के अतिग्रहण का सामना है, बहरैनी शासकों में फ़ैसला लेने की शक्ति नहीं है और वह सऊदी अरब के वर्चस्व में हैं तथा ब्रिटेन जैसे देश भी बहरैन की दमनात्मक नीतियों का स्वागत करते हैं।


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