अरब मीडिया पर छिड़ी क़ासिम सुलेमानी के पत्र पर नई बहस।

अरब मीडिया पर छिड़ी क़ासिम सुलेमानी के पत्र पर नई बहस।

ईरान के इस्लामी क्रान्ति संरक्षक बल आईआरजीसी की क़ुद्स फ़ोर्स कमांडर का एक ख़त चर्चा में है।

ईरान के इस्लामी क्रान्ति संरक्षक बल आईआरजीसी की क़ुद्स फ़ोर्स कमांडर का एक ख़त चर्चा में है।
जनरल क़ासिम सुलैमानी ने सीरिया के सीमावर्ती शहर अलबू कमाल को दाइश के क़ब्ज़े से आज़ाद कराने में केन्द्रीय भूमिका निभाई। जिस समय अलबू कमाल में लड़ाई चल रही थी और जनरल क़ासिम सुलैमानी फ़्रंट लाइन पर मौजूद थे उस समय उन्होंने ख़ाली पड़े एक घर को लड़ाई की नीतियां तैयार करने और सामरिक गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए अपने ठिकाने के रूप में प्रयोग किया।
जब शहर को दाइशी आतंकियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करा लिया गया तो जनरल क़ासिम सुलैमानी ने जिस घर का प्रयोग इस लड़ाई में किया था उसके मालिक के नाम एक पत्र छोड़ा। इस पत्र में जनरल क़ासिम सुलैमानी ने घर के मालिक से माफ़ी मांगी कि उन्होंने मजबूरी में इस घर का प्रयोग मालिक की अनुमति लिए बग़ैर किया। जनरल सुलैमानी ने कहा कि यदि घर को किसी तरह का नुक़सान पहुंचा है तो वह हरजाना देने के लिए तैयार हैं। इस पत्र पर जनरल सुलैमानी ने अपना निजी फ़ोन नंबर लिखा।
जनरल क़ासिम सुलैमानी ने इसमें लिखा कि वह घर का मालिक जो कहे वह करने के लिए तैयार हैं। इस पत्र में जनरल क़ासिम सुलैमानी ने यह भी लिखा कि एक शीया होने की हैसियत से उनके तथा सुन्नी होने की हैसियत से घर के मालिक के बीच कोई अंतर नहीं है क्योंकि दोनों ही पैग़म्बरे इस्लाम का अनुसरण करने वाले तथा पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों के श्रद्धालु हैं।
जनरल क़ासिम सुलैमानी की इस विनम्रता और इंसाफ़ पसंदी पर अरब मीडिया में नई बहस छिड़ गई है। अरब मीडिया ने इस पत्र को विशेष रूप से प्रकाशित किया है।


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