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ईरान द्वारा, 20 प्रतिशत यूरेनियम सवर्धन पर इतना हंगामा क्यों? क्या है चिंता की अस्ल वजह? परमाणु बम के लिए कितना यूरेनियम ज़रूरी? बताया सीएनबीसी ने

ईरान द्वारा, 20 प्रतिशत यूरेनियम सवर्धन पर इतना हंगामा क्यों? क्या है चिंता की अस्ल वजह? परमाणु बम के लिए कितना यूरेनियम ज़रूरी?  बताया सीएनबीसी ने

सीएनबीसी टीवी चैनल ने ईरान की कार्यवाहियों का जायज़ा लिया है जो एक तरफा होने के बावजूद पढ़ने योग्य है।

नताशा तुराक सीएनबीसी में लिखती हैं  कि ईरान सन 2021 में कुछ परिवर्तन कर रहा है। नये साल के पहले दो हफ्तों में ईरान ने दक्षिणी कोरिया के तेलवाहक जहाज़ को रोक दिया और यह एलान किया कि वह यूरेनियम का 20 प्रतिशत संवर्धन शुरु कर रहा है।

ईरान ने दक्षिणी कोरिया का तेल वाहक जहाज़ एसी दशा में रोका है कि जब उसका 7 अरब डालर दक्षिणी कोरिया ने रोक रखा है। दक्षिणी कोरिया ने हय सन 2018 में ट्रम्प सरकार द्वारा लगाए गये प्रतिबंधों के बाद किया है। यह सब हालात बाइडन की सरकार के लिए सिर का दर्द ही हैं क्योंकि बाइडन की सरकार यह कभी नहीं चाहती कि ईरान के साथ किया गया परमाणु समझौता खत्म हो जाए।

लेकिन सवाल यह है कि यूरेनियम का 20 प्रतिशत संवर्धंन इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

ईरान ने सन 2010 से 2013 के बीच अर्थात परमाणु समझौते से पहले यूरेनियम का 20 प्रतिशत संवर्धन किया है। इसी वजह से ईरान पर अमरीका और युरोपीय संघ ने कड़े प्रतिबंध लगाए थे। परमाणु समझौते के अनुसार ईरान केवल 3.67 प्रतिशत संवर्धन कर सकता है।

सीएनबीसी में परमाणु मामलों के जानकार एना हैरिंग्टन का कहना है कि एसा लगता है कि ईरान की कोशिश है कि वह परमाणु समझौते में वापसी के लिए बाइडन सरकार पर अधिक से अधिक दबाव डाले।

हालिया दिनों में ईरानी संसद ने राष्ट्रपति रूहानी का विरोध करते हुए सरकार पर प्रतिबंध किया कि वह यूरेनियम का संवर्धन बढ़ाए बल्कि आईएईए के निरीक्षक को देश से निकाल दे।

विशेषज्ञों ने सीएनबीसी को बताया है कि परमाणु हथियार बनाने के लिए कम से कम 400 किलो सवंर्धित यूरेनियम की ज़रूरत होती है। ईरान अभी तक तक आईएईए के निरीक्षकों को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण की अनुमति देता है लेकिन संसद में पारित नये क़ानून के अनुसार अगर पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए गये तो सरकार को आईएईए के निरीक्षकों को देश से निकालना होगा।

यह सच्चाई की ईरानी संसद अधिक दबाव के साथ एसा कानून पारित करने की क्षमता रखती है जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कई आयामों से विस्तृत कर दे, चिंताजनक है।

हेरिंग्टन का कहना है कि जारी महीने में ईरान के आक्रामक रवैये के बावजूद ईरानी विदेशमंत्री ने कहा कि सब सारे क़दम वापस हो सकते हैं लेकिन उसके लिए शर्त यह है कि अमरीका और युरोप, परमाणु समझौते का पालन करें। अगर उन्होंने पालन किया तो ईरान भी पालन करेगा।

वैसे अब भी जून में जब ईरान में नया राष्ट्रपति आएगा तो सब कुछ बदल जाएगा।

बाइडन ने सन 2015 में ईरान के साथ किये गये परमाणु समझौते में वापसी में रूचि दिखायी है। बाइडन की विदेश नीति के विभाग में ज़िम्मेदारी संभालने वाले बहुत से लोग इस समझौते का प्रारूप तैयार करने वालों और वार्ताकारों में शामिल थे लेकिन संभावित रूप से तेहरान इतनी आसानी से अमरीका को समझौते में वापस नहीं आने देगा बल्कि ईरान अपने नुक़सान की भरपाई की मांग कर रहा है जो उसे ट्रम्प की ओर से लगाए गये प्रतिबंधों की वजह से उठाना पड़ा है।

चैटम हाउस की विशेषज्ञ, सनक वकील का कहना है कि यह एक दोधारी तलवार है, ईरान के लिए भी और बाइडन की सरकार के लिए भी। दक्षिणी कोरिया के तेलवाहक जहाज़ को रोक कर और यूरेनियम का बीस प्रतिशत संवर्धन करके ईरान, विश्व समुदाय विशेषकर बाइडन सरकार को यह याद दिलाना चाहता है कि तेहरान के सामने केवल कूटनयिक रास्ता ही नहीं है। यह भावना ईरान के भीतर भी पायी जाती है।


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