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ईरान के साथ टकराव से सऊदी व इमारात क्यों घबराए हुए हैं?

ईरान के साथ टकराव से सऊदी व इमारात क्यों घबराए हुए हैं?

अमरीका से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ ने लिखा है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ने ईरान के साथ सैन्य टकराव के परिणामों से घबरा कर अमरीकी विदेश मंत्री को फ़ोन करके कहा है कि वे ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहते।

न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ ने फ़ार्स की खाड़ी में हालिया तनाव के बारे में अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ने ईरान के साथ सैन्य टकराव के परिणामों से बुरी तरह घबराए हुए हैं। पत्र ने लिखा है कि इन दोनों देशों ने ईरान के ख़िलाफ़ अधिकतम दबाव का तो समर्थन किया है लेकिन दोनों ही देशों के उच्चाधिकारियों ने अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को फ़ोन करके कहा है कि वे ईरान के साथ युद्ध के इच्छुक नहीं हैं।

 

न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ ने ट्रम्प सरकार के एक उच्चाधिकारी के हवाले से लिखा है कि युद्ध होने की स्थिति में संभावित रूप से सबसे ज़्यादा नुक़सान सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात का ही होगा। इन दोनों देशों को डर है कि अगर ट्रम्प चुनाव में हार गए तो वे उस युद्ध में फंसे रह जाएंगे जिससे अमरीका निकलना चाहता है। बुधवार को संयुक्त अरब इमारात के विदेश मंत्री अब्दुल्लाह बिन ज़ायद ने अमरीकी सरकार के रुख़ से अलग नीति अपनाते हुए कहा था कि इस देश के पास इस प्रकार का कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह सिद्ध होता हो कि फ़ुजैरा की बंदरगाह पर तेल टैंकरों पर हुए हमले में किस देश का हाथ था। जबकि इससे पहले वाॅशिंग्टन क्षेत्र में होने वाली सभी घटनाओं का आरोप ईरान पर लगा चुका है जिनमें फ़ुजैरा की बंदरगाह पर तेल टैंकरों पर हमला, ओमान सागर में कई तेल टैंकरों पर हमला और इराक़ व अफ़ग़ानिस्तान में हुए कई मार्टर हमले शामिल हैं। बिन ज़ायद के इस बयान के बाद कई टीकाकारों ने अपनी समीक्षा में कहा है कि अबू धाबी ईरान से सैन्य टकराव के परिणामों से डर कर तेहरान के संबंध में अपनी क्षेत्रीय नीतियों पर पुनर्विचार कर रहा है।


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