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ईरान के परमाणु समझौते से दहशत में इस्राईल...तेल अबीब की यह तमन्ना क्यों है कि एटम बम बना ले ईरान? मोसाद के प्रमुख और बाइडन की मुलाक़ात में क्या हुआ?

ईरान के परमाणु समझौते से दहशत में इस्राईल...तेल अबीब की यह तमन्ना क्यों है कि एटम बम बना ले ईरान? मोसाद के प्रमुख और बाइडन की मुलाक़ात में क्या हुआ?

अमरीका की राजधानी में इस्राईल अपना आख़िरी ज़ोर लगा रहा है कि वाशिंग्टन ईरान के परमाणु समझौते में दोबारा शामिल न होने पाए। इसी क्रम में इस्राईली इंटेलीजेन्स चीफ़ यूसी कोहेन ने शुक्रवार को अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाक़ात की। वाइट हाउस ने इस मुलाक़ात को ख़ुफ़िया रखा यानी इस बारे में कोई बयान अब तक नहीं आया।

शुक्रवार को जो बाइडन की मुलाक़ातों का जो कार्यक्रम जारी किया गया था उसमें यूसी कोहेन से मुलाक़ात की ओर कोई इशारा नहीं था। बाइडन ने शुक्रवार की सुबह इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू से टेलीफ़ोन पर बात की और वहां होने वाली दुर्घटना में दर्जनों इस्राईलियों की मौत पर दुख जताया मगर परमाणु मामले में उनसे कोई बात नहीं की।

ईरान और विश्व शक्तियों के बीच जारी वार्ता का इस्राईल ने विरोध किया है। इस वार्ता के नतीजे में अमरीका परमाणु डील में वापस लौटना चाहता है जिससे मई 2018 में ट्रम्प सरकार बाहर निकल गई थी।

अमरीकी रिपोर्टें बताती हैं कि अमरीका और इस्राईल ने परमाणु मुद्दे को अन्य विषयों से पूरी तरह अलग कर लिया है। यानी इस विषय में दोनों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।

वाशिंग्टन में क्वेन्सी फ़ाउंडेशन में अमरीका की फ़ार्स खाड़ी से संबंधित नीतियों की विशेषज्ञ आनील शलीन ने एक इंटरव्यू में कहा कि इस्राईली प्रतिनिधिमंडल वाशिंग्टन के दौरे में गुहार लगाएगा कि अमरीका इस समझौते में हरगिज़ न लौटे।

मोसाद के प्रमुख यूसी कोहेन के नेतृत्व में वाशिंग्टन जाने वाली टीम का कहना है कि अगर अमरीका इस समझौते में लौट जाता है तो फिर इस्राईल के हित में किसी लंबे और मज़बूत समझौते की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

इस्राईल के साथ ही कुछ अरब देश भी इस समझौते में अमरीका की वापसी से नाराज़ हैं, उन्हें शिकायत है कि अमरीका ने इस्राईल और अरब देशों की सुरक्षा को ध्यान में रखे बिना केवल अपने स्वार्थों को देखते हुए ईरान से समझौता कर लिया है।

मैरीलैंड युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और वाशिंग्टन के ब्रोकिंग्ज़ फ़ाउंडेशन के विशेषज्ञ शिबली तलहमी का कहना है कि इस्राईल अंधाधुंध कोशिश कर रहा है कि किसी तरह ईरान के परमाणु समझौते के मार्ग में कोई रुकावट डाल सके।

तलहमी ने कोहिन की बाइडन से मुलाक़ात के बारे में टिप्पणी की कि यह मुलाक़ात एसे समय में हो रही है जब इस्राईल की ओर से ईरान के परमाणु समझौते में रुकावट डालने की भारी कोशिश हो रही है। इससे पहले इस्राईल के इंटेलीजेन्स मंत्री ने कहा था कि अगर अमरीका और अन्य शक्तियों ने ईरान से समझौता कर लिया तो फिर इसके बाद जंग का रास्ता खुल जाएगा।

इस्राईल देख रहा है कि अमरीका अब ईरान के परमाणु समझौते में लौटने के लिए तैयार है यह उसके लिए डरावने सपने से कम नहीं है। इस्राईल चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार बना ले और पूरी दुनिया उसे अलग थलग कर दे मगर परमाणु समझौते का मतलब यह है कि ईरान विश्व शक्तियों के साथ मिलकर बड़ी आर्थिक ताक़त बन जाएगा जबकि परमाणु हथियार बनाने से दूर रहेगा। विशेषज्ञ आनील शलीन का कहना है कि इस्राईल एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहा है कि अमरीका और इस्राईल के बीच कूटनैतिक वार्ता न शुरू हो जाए। इसकी वजह यह है कि इस समय सऊदी अरब, इमारात और इस्राईल इलाक़े में अमरीका के बेहद क़रीबी स्ट्रैटेजिक पार्टनर हैं और अगर अमरीका ईरान के क़रीब चला जाता है तो फिर उनकी कोई हैसियत नहीं रह जाएगी। ईरान इस स्थिति में अपनी बड़ी आबादी और भौगोलिक स्थिति की वजह से शक्तिशाली खिलाड़ी बन जाएगा। वैसे ईरान इस समय भी इलाक़े में बड़ा प्लेयर है।

टीककार डी राश का कहना है कि इस्राईल लाख कोशिश कर ले मगर परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी का रास्ता रोक नहीं पाएगा।

स्रोतः अलजज़ीरा


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