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ईरान और हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ हमेश आग उगलने वाले नेतनयाहू के होंट अचानक क्यों सिल गए हैं? यमनी मिसाइलों का अगला निशाना क्या ते

ईरान और हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ हमेश आग उगलने वाले नेतनयाहू के होंट अचानक क्यों सिल गए हैं? यमनी मिसाइलों का अगला निशाना क्या ते

अरब जगत के मशहूर टीकाकार अब्दुल बारी अतवान ने रायुल यौम अख़बार के संपादकीय में लिखा है कि आजकल इस्राईली प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू की ख़ामोशी मध्यपूर्व के हालात के बारे में बहुत कुछ कह रही है।

इस ख़ामोशी से ज़ायोनी शासन के डर और भय का पता चलता है। यह डर ईरान या हिज़्बुल्लाह, हमास और जिहादे इस्लामी जैसे उसके घटक संगठनों की जवाबी सैन्य कार्यवाही है।

यहां इस बात का ज़िक्र ज़रूरी है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान, नेतनयाहू न ईरान के ख़िलाफ़ हमले के लिए सबसे अधिक शोर शोराबा मचाया है, यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के सम्मेलन में मंच से ईरान के परमाणु बम का नक़्शा तक पेश कर दिया था और विश्व समुदाय को ईरान के परमाणु संयंत्रों को नष्ट करने के लिए लामबंद करने का भरपूर प्रयास किया था।

नेतनयाहू को यह अच्छी तरह से मालूम है कि ईरान कभी भी घुटने वाला नहीं है, बल्कि वह अपने दुश्मनों से टकराने और उन्हें मुंह तोड़ जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहता है। इस देश पर दबाव डालकर कभी भी वार्ता के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

ऐसे समय में जब यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के क्रूज़ मिसाइल सऊदी अरब के अबहा और जीज़ान हवाई अड्डों को निशाना बना रहे हैं, नेतनयाहू को अच्छी तरह से पता है कि यह मिसाइल क्या संदेश दे रहे हैं। उन्हें पता है कि अगले युद्ध में तेल-अवीव एयरपोर्ट निशाना होगा। इस हमले से इस्राईलियों को मनोवैज्ञानिक झटका लगेगा और पिछले 70 साल के दौरान इस्राईल की सुरक्षा का अभेद होने का मिथ टूट जाएगा।

नेतनयाहू के पास युद्ध मंत्री का भी क़लमदान है, लेकिन आजकल वह अपना मुंह खोलने से भी डर रहे हैं और अगर मुंह खोलते भी हैं तो शब्दों के चयन में काफ़ी दिक्क़त से काम लेते हैं, इसलिए कि उन्हें अच्छी तरह से मालूम है किसी तरह की जवाबी प्रतिक्रिया का उन्हें सामना करना पड़ेगा।

दक्षिण लेनबनान की पहाड़ियों पर डेढ़ लाख मिसाइलों का रूख़ नेतनयाहू की तरफ़ ही है, और उन्हें यह भी अच्छी तरह से पता है कि मिसाइल रक्षा प्रणाली जिसे विकसित करने के लिए अमरीका ने 10 अरब डॉलर से अधिक ख़र्च किए हैं, इन मिसाइलों को अपने निशाने पर लगने से रोकने की क्षमता नहीं रखती।  

इन मिसाइलों में 500 किलो के वारहेड लगे हुए हैं और इनमें से हर एक की मारक क्षमता इतनी है कि कोई एक भी तेल-अवीव को पूरी तरह से घुप अंधेरे में डुबो सकता है।

2006 के हिज़्बुल्लाह-इस्राईल युद्ध में तेल-अवीव को ऐतिहासिक पराजय का सामना करना पड़ा और रणक्षेत्र में इस्राईल का गौरव माने जाने वाले मेरकावा टैंकों का जनाज़ा निकल गया। उस युद्ध के बाद से नेतनयाहू ने दक्षिणी लेबनान की ओर एक गोली भी नहीं चलाई है, इसलिए कि उन्हें पता है कि अगर ऐसी ग़लती की तो उसका कितना भयानक परिणाम निकलेगा। 


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