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ईरानी शेरों की दहाड़ से अमेरिका दुम दबाकर भागा! क्या फ़ार्स की खाड़ी में तनाव के बीच अमेरिकी युद्ध वापस लौट रहे हैं? अरब देशों और इस्राईल में मचा हड़कंप!

ईरानी शेरों की दहाड़ से अमेरिका दुम दबाकर भागा! क्या फ़ार्स की खाड़ी में तनाव के बीच अमेरिकी युद्ध वापस लौट रहे हैं? अरब देशों और इस्राईल में मचा हड़कंप!

अमेरिका के 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद बौखलाए ट्रम्प जहां ईरान के ख़िलाफ़ लगतातार कड़े तेवर दिखा रहे थे और उनके बयानों से पश्चिमी एशिया में एक नए युद्ध की आशंकाएं बढ़ने लगी थीं, वहीं दुनिया के कई मीडिया हलकों ने अब यह ख़बर दी है कि अमेरिका ने मध्यपूर्व में तैनात अपने इकलौते युद्ध पोत को वापस बुलाने का फ़ैसला किया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने युद्धपोत वापस बुलाने का एलान 31 दिसंबर 2020 गुरुवार को किया है। अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री क्रिस्टोफर मिलर ने इसकी घोषणा की है। याद रहे कि पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान अमेरिका ने फ़ार्स की खाड़ी में आधुनिक हथियार भेजने के साथ-साथ भड़काऊ कार्यवाहियां भी कीं हैं। इसमें हालिया दिनों में फ़ार्स की खाड़ी में उसके द्वारा लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों का उड़ान भरना भी शामिल है। अमेरिका द्वारा इस तरह अपनी ताक़त का प्रदर्शन करने का उद्देश्य ईरान के ख़िलाफ़ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ना है, लेकिन इस बीच ईरानी नेताओं और सैन्य अधिकारियों ने जिस साहस और अपने दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया है उससे अमेरिका स्वयं अपने ही बिछाए जाल में फंस गया और अब वह उलटे पैर अपने युद्ध पोत के साथ वापस भाग रहा है।

पश्चिमी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने विमानवाहक युद्धपोत यूएसएस निमित्ज़ को अमेरिका के वेस्ट कोस्ट भेजने का फ़ैसला किया है। अमेरिका के इस निर्णय से पश्चिमी एशिया में मौजूद उसके अरब एवं ज़ायोनी एजेंटों को बड़ा झटका लगा है। वहीं पेंटागन ने यूएसएस निमित्ज़ को वापस बुलाने का एलान करते समन ईरान का कोई ज़िक्र नहीं किया।

इस बीच पश्चिमी मीडिया के कुछ जानकारों का कहना है कि, अमेरिका की मुख्य चिंता ईरान की आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के पूर्व कमांडर शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत की बरसी को लेकर है। याद रहे कि, इराक़ की सरकार के निमंत्रण में बग़दाद दौरे पर पहुंचे शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी को अमेरिका के आतंकी सैनिकों ने ट्रम्प के आदेश पर तीन जनवरी 2020 की रात बग़दाद के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से बाहर निकलते समय उनपर पर कायराना तरीक़े से ड्रोन हमला करके उन्हें और इराक़ी स्वयंसेवी बल हश्दुश्शाबी के कमांडर अबू मेहदी अल-मोहन्दिस और उनके अन्य 8 साथियों के साथ शहीद कर दिया था।

ईरान ने इस आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देते हुए इराक़ में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य छावनी ऐनुल असद पर मिसाइलों की बारिश कर दी थी, जिसमें अमेरिका को भारी नुक़सान हुआ था। द्वितीय विश्व के बाद यह पहला अवसर था जब किसी ने अमेरिका की सैन्य छावनी पर हमला किया था। ईरान ने अमेरिका की सैन्य छावनी पर हमला करके यह बता दिया था कि, तेहरान ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है।

इस बीच ईरान के महान योद्धा शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी की पहली बर्सी को देखते हुए एक बार फिर अमेरिका और उसके एजेंटों को ईरानी मिसाइलें याद आने लगीं।

कई अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी भी जारी की कि ईरान शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी की पहली बर्सी पर एक बार फिर हमला कर सकता है। इस डर को कम करने के लिए अमेरिका ने एक नई चाल चली और उसने ईरान के ख़िलाफ़ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ दिया। आए दिन अमेरिकी राष्ट्रपति सहित अन्य अधिकारी ईरान पर दबाव बनाने के उद्देश्य से युद्ध की बात करने लगे, वहीं उनके इस मनोवैज्ञानिक युद्ध में पश्चिमी मीडिया ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

हालिया कुछ दिनों में एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया कि जिससे यह लगने लगा कि अमेरिका, ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है। वहीं ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के इस मनोवैज्ञानिक युद्ध का मुंहतोड़ जवाब देते हुए उनकी सारी धमकियों की हवा निकाल दी। ईरानी शेरों की दहाड़ इतनी ज़्यादा थी कि अमेरिका ने क्षेत्र से दुम दबाकर भागने में ही अपनी भलाई समझी और 31 दिसंबर को पेंटागन ने विमानवाहक युद्धपोत यूएसएस निमित्ज़ को वापस बुलाने की घोषणा कर दी।


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