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इस वजह से है यूएई और सऊदी अरब में खींचतान, खतरे में सऊदी अरब की पोज़ीशन, अलकुद्सुलअरबी की दिलचस्प रिपोर्ट

इस वजह से है यूएई और सऊदी अरब में खींचतान, खतरे में सऊदी अरब की पोज़ीशन, अलकुद्सुलअरबी की दिलचस्प रिपोर्ट

सऊदी अरब और यूएई के बीच दोस्ती के पीछे दुश्मनी भी पनप रही है। अलकुदसुल अरबी ने इसका जायजा लिया है।

बिन ज़ायद के प्रतिनिधित्व में यूएई का नेतृत्व हमेशा ही सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बिन सलमान की नीतियों का समर्थक रहा है अर्थात उस समय से भी जब बिन सलमान, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री थे। सऊदी अरब और यूएई के बीच यह संबंध, दोनों के बीच एक मज़बूत गठबंधन का कारण बना जो क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भूमिका निभा रहा है। यह गठबंधन, यमन  खिलाफ सऊदी अरब के युद्ध से शुरु हुआ, क़तर के बहिष्कार और अस्सीसी की सरकार के समर्थन तक पहुंच गया है यहां तक कि अब सऊदी अरब और यूएई इस्राईल के साथ संबंध बनाने तक गंतव्य तक पहुंच चुके हैं।

 सऊदी अरब और यूएई के बीच यह विशेष संबंध कई बार तनाव का भी शिकार हुए हैं लेकिन उसका संबंध क्षेत्रीय घटनाओं के बारे में बिन ज़ायद और बिन सलमान के दृष्टिकोण से नहीं था बल्कि उनके मतभेदों का कारण आतंरिक मामलों की वजह से था जैसा कि दुबई के शासक मुहम्मद बिन राशिद ने नंवबर 2019 में एक बयान में कहा कि राजनीति  का दायित्व लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाना और उनकी समस्याओं का समाधान है न कि संकट पैदा करना। इसी तरह विकिलीक्स के दस्तावेज़ों से पता चलता है कि अबूधाबी के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन ज़ायद, सऊदी शासकों का मज़ाक उड़ाते हैं।

सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेद के पुराने कारण हैं लेकिन हालिया तनाव का कारण यह है कि यूएई अतीत से चले आ रहे शक्ति के संतुलन को बदलना चाहता है। अतीत के इस संतुलन में रियाज़ का पल्ला भारी रहता था। साफ दिखाई दे रहा है कि यूएई के वर्तमान नेतृत्व को यह लगता है कि उनका देश इस चरण पर पहुंच चुका है जहां उसे पीछे पीछे चलने के बजाए, आगे रह कर नेतृत्व की कमान संभालना चाहिए। इसी लिए यूएई, अपनी सैन्य व रक्षा शक्ति बढ़ा रहा है जिसके लिए उसने इस्राईल से भी बेहद घनिष्ट संबंध बना लिये हैं ताकि वह परशियन गल्फ में इस्राईल का प्रतिनिधि बन कर खास भूमिका निभाए।

यूएई, सऊदी अरब के साथ प्रतिस्पर्धा और मतभेद के कई पहलु सामने ला रहा है जिसे यूएई ने वास्तव में यमन से अपने सैनिकों की वापसी के एलान, ईरान के साथ समुद्री सीमा पर समझौते और क्षेत्र में तेहरान के सब से बड़े व्यापारिक भागीदार बने रह कर अधिक स्पष्ट किया है।

अब यही लग रहा है कि यूएई को दौड़ में दूसरा स्थान नहीं चाहिए यही वजह है कि वह विभिन्न क्षेत्रों में सऊदी अरब से आगे निकलने की भरसक कोशिश कर रहा है। जैसा कि हमने देखा कि तेल के उत्पादन के बारे में दोनों देशों में काफी मतभेद है और यूएई रियाज़ की इच्छा का खुल कर विरोध करते हुए तेल उत्पादन कम करने पर तैयार नहीं है।

इलाक़े में नेतृत्व की कमान संभालने की इस प्रतिस्पर्धा में ज़ाहिर सी बात है बिन सलमान को सऊदी अरब में सत्ता में पहुंचाने में मुख्य भूमिका निभाने वाला यूएई पुरानी पंरपरा को बदल रहा है और शक्ति के संतुलन में बदलाव ला रहा है। अब यूएई, सऊदी अरब के बराबर खड़ा होना चाह रहा है और शायद यही वजह है कि सऊदी अरब, अन्करा के सिलिसले में परस्पर विरोधी सिगनल भेज रहा है। रियाज़ की चिंता ही इस बात का कारण है कि कभी वह अन्करा के साथ तनाव में नज़र आता है और कभी दोस्ती का इच्छुक। यह चीज़, परशियन गल्फ में शांति के लिए कुशनर की यात्रा के दौरान होने वाली बात चीत को भी प्रभावित करेगी। 


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