सऊदी अरब के ओर से क़तर की घेराबंदी मानवाधिकार का खुला उल्लंघन।

सऊदी अरब के ओर से क़तर की घेराबंदी मानवाधिकार का खुला उल्लंघन।

मौजूदा संकट का उद्देश्य कतर की स्थिरता को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि विदेश नीति में बदलाव के लिए दोहा को मजबूर करना है जबकि फार्स खाड़ी सहयोग परिषद को चाहिए था कि संकट को कंट्रोल करती

अबनाः क़तर के मानवाधिकार आयोग के प्रमुख ने कहा है कि सऊदी अरब की अगुवाई में कुछ अरब देशों की ओर से कतर की घेराबंदी, परिवारों के सदस्यों को एक दूसरे से अलग करने और स्वतंत्रता व मानवाधिकार का खुला उलंघ्घन है।
इरना की रिपोर्ट के अनुसार क़तर के मानवाधिकार आयोग के प्रमुख अली बिन समीख अलमरी ने कहा है कि क़तर की घेराबंदी के लिए उठाय गए, विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सभी मानकों और नियमों को पैरों तले रौंदने के समान है।
उन्होंने फार्स की खाड़ी के तीन अरब देशों से मांग की है कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार और कतर की घेराबंदी खत्म करें।
क़तर के मानवाधिकार आयोग के प्रमुख अली बिन समीख अलमरी ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भी एक बयान में कहा कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरैन की ओर से क़तर की घेराबंदी का एक उद्देश्य, बाहरी मानवीय सहायता के हस्तांतरण की प्रक्रिया में रूकावट के लिए बाधा पैदा करना है।
इस संबंध में ट्यूनीशिया की निदा पार्टी के सदस्य नज़ार अयाद ने कहा है कि अरब देशों के हाथों कतर संकट, फारस की खाड़ी सहयोग परिषद और अरब लीग की विफलता को स्पष्ट करता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट का उद्देश्य कतर की स्थिरता को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि विदेश नीति में बदलाव के लिए दोहा को मजबूर करना है जबकि फार्स खाड़ी सहयोग परिषद को चाहिए था कि संकट को कंट्रोल करती और कोई समाधान का कोई रास्ता निकालती।
गौरतलब है कि ट्यूनीशिया की जनता ने सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरैन की ओर से कतर की घेराबंदी के खिलाफ अपने देश में कतर के दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन कर अपना समर्थन जताया है।
 


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