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इस्लामी जगत दुनिया का दिल है और ईरान इस दिल का दिल है, वह किसी से नहीं डरता, क्षेत्र में अमेरिका का कोई स्थान नहीं हैः जनरल सलामी

इस्लामी जगत दुनिया का दिल है और ईरान इस दिल का दिल है, वह  किसी से नहीं डरता, क्षेत्र में अमेरिका का कोई स्थान नहीं हैः जनरल सलामी

इस्लामी क्रांति के संरक्षक बल सिपाहे पासदारान (आईआरजीसी) के प्रमुख ने कहा है कि आज शक्तिशाली ईरान अमेरिका का प्रतिस्पर्धी बन गया है और यह प्रतिस्पर्धा और जंग समस्त क्षेत्रों में जारी है।

ब्रिगेडियर जनरल हुसैन सलामी ने स्वंय सेवी बल बसीज के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि बसीज एक धार्मिक व इस्लामी सोच है और यह सेना अपने प्रयासों से समाज की मुक्ति व कल्याण को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी कोने में इस प्रकार की सेना नहीं है और क्रांतिकारी भूमि में वह फल- फूल सकती है और यह एक वास्तविकता है कि इस्लामी क्रांति के 43 वर्षों में हम समस्त अच्छी और बुरी घटनाओं के साक्षी रहे हैं और बसीज की भूमिका व योगदान को हमने निकट से देखा है।

उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थिति के कारण द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ईरान को "विजय पुल" की उपाधि दी गयी थी क्योंकि उस समय घटक और गठबंधन सेनायें ईरान से होकर गुज़रती थीं और ईरान विश्व में सभ्यता वाला एक प्राचीन देश है। ब्रिगेडियर जनरल हुसैन सलामी ने कहा कि क्रांति हुई ताकि धार्मिक विचार व शिक्षा आदर्श सरकार में परिवर्तित हो सकें।

उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति के आरंभ से लेकर अब तक दुश्मन के साथ हमारी जंग का आधार यह रहा है कि दुश्मन आदर्श इस्लामी सरकार के गठन को रोक रहा था और यह जंग इसीलिए है क्योंकि जब एक विचार आदर्श बन जाता है तो वह मजबूत हो जाता है और लोगों के मध्य फैलता है और बहुत बड़े व विस्तृत भाग को अपने नियंत्रण में ले लेता है और आरंभ से लेकर आज तक ऐसा ही रहा है।

उन्होंने कहा कि गत 43 वर्षों के दौरान कभी भी ऐसा नहीं रहा है कि दुश्मन से हमारी लड़ाई न रही हो, हां यह लड़ाई कभी वास्तविक थी और कभी ज़ेहन में। उन्होंने कहा कि आज अमेरिकी देख रहे हैं कि क्रांति के आरंभ के ईरान और आज के ईरान में ज़मीन आसमान का अंतर आ गया है और यही हाल अमेरिका का भी है। उस वक्त विश्व की 40 प्रतिशत अर्थव्यवस्था अमेरिका के हाथ में थी और अपनी सैनिक ताकत के बल पर उसने 45 वर्षों तक पूर्व सोवियत संघ को राजनीतिक अखाड़े से दूर कर रखा था, वह अपने परमाणु बम को नागासाकी और हीरोशीमा पर गिरा चुका था और समस्त पश्चिमी यूरोप उसके नियंत्रण में था और विश्व की समस्त स्ट्रैटेजिक स्थिति उसके अधिकार में थी किन्तु 43 साल पहले की अपेक्षा आज अमेरिका बहुत कमज़ोर हो चुका है और हम धीरे- धीरे उसके प्रतिस्पर्धी में बदल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी जानते थे कि इस्लामी जगत दुनिया का दिल है और ईरान इस दिल का दिल है और वह उसके केन्द्र में स्थित है और अगर ताक़त का इंजन इस क्षेत्र में चालू हो जा जायेगा तो उसकी ताकत अपने पतन का मार्ग तय करने लगेगी।


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