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इस्लामी क्रांति की 43वीं वर्षगांठ पर ईरान में राष्ट्रव्यापी रैलियों का आयोजन, राष्ट्रपति का राष्ट्र को संबोधन

इस्लामी क्रांति की 43वीं वर्षगांठ पर ईरान में राष्ट्रव्यापी रैलियों का आयोजन, राष्ट्रपति का राष्ट्र को संबोधन

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता की 43वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुक्रवार को समारोहों का आयोजन किया गया और देश भर में रैलियां निकाली गईं।

राजधानी तेहरान में सुबह से ही लोग हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए सड़कों पर निकल आए और कारों और मोटरसाइकलों पर सवार होकर उन्होंने आज़ादी चौक का रुख़ किया।

1979 में इस्लामी क्रांति की सफलता और शाही शासन के पतन के बाद से ही हर साल 11 फ़रवरी को विशाल रैलियों का आयोजन किया जाता रहा है, लेकिन पिछले दो वर्षों से कोरोना महामारी के कारण रैलियों का आयोजन बड़े पैमाने पर नहीं किया गया।

शुक्रवार को होने वाले समारोहों को 6,300 से ज़्यादा ईरानी और 200 से ज़्यादा विदेशी पत्रकारों ने कवर किया।

आज़ादी चौक पर लोगों ने इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी, वरिष्ठ नेता आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनई और शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी की तस्वीरें हाथों में ले रखी थीं। इस बीच प्रदर्शकारियों ने अमरीकी और इस्राईली झंडों को आग के हवाले भी किया।

ईरानी राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी ने इस अवसर पर जुमे की नमाज़ के दौरान राष्ट्र को संबोधित किया। 

राष्ट्रपति रईसी का कहना था कि आज भी ईरान न पूरब और पश्चिम के अपने नारे पर डटा हुआ है।

ईरानी राष्ट्रपति ने ईरानी राष्ट्र को इस्लामी क्रांति की सफलता की वर्षगांठ पर बधाई देते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति हमें आज़ादी, नैतिकता, न्याय, स्वाधीनता, राष्ट्रीय गौरव, भाईचारे और साम्राज्यवाद और वर्चस्ववाद के ख़िलाफ़ प्रतिरोध सिखाती है। 


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