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इस्राईल से हैरत अंगेज़ बयान...लिकुड पार्टी के सांसद ने कहा अब अमरीका को भूल जाना बेहतर, रूस और चीन में बनाई जाए पैठ...ईरान का परमाणु समझौता इस्राईल के गले की फांस

इस्राईल से हैरत अंगेज़ बयान...लिकुड पार्टी के सांसद ने कहा अब अमरीका को भूल जाना बेहतर, रूस और चीन में बनाई जाए पैठ...ईरान का परमाणु समझौता इस्राईल के गले की फांस

संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्राईल के राजदूत गिलआद अरदान बार बार अमरीका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन से संपर्क कर रहे थे और इस बात पर ज़ोर दे रहे थे कि इस्राईल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू के लिए उनकी फ़ोन काल बहुत ज़रूरी है।

बाइडन ने नेतनयाहू को फ़ोन किया मगर इस फ़ोन के बाद नेतनयाहू ने एक बैठक बुलाई जो असाधारण है। इसमें वह ईरान के परमाणु समझौते के बारे में बात करना चाहते हैं।

नेतनयाहू मान चुके हैं कि अमरीका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन से उनके मतभेद हैं मगर साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बाइडन से उनकी दोस्ती बीस साल पुरानी है। नेतनयाहू ने यह नहीं बताया कि मतभेद के मुद्दे क्या हैं मगर सब को मालूम है कि बाराक ओबामा के शासनकाल के आख़िरी महीनों में नेतनयाहू ने कांग्रेस की दावत पर अमरीका का दौर किया था और इस तरह उन्होंने ओबामा प्रशासन को ललकारा था। यह ओबामा के साथ ही उस समय के उप राष्ट्रपति जो बाइडन का खुला अपमान था। नेतनयाहू ने अमरीकी कांग्रेस में जाकर भाषण दिया था और ईरान के साथ किए गए परमाणु समझौते का खुलकर विरोध किया था जिसे ओबामा प्रशासन अपनी कूटनीति की सफलता क़रार दे रहा था।

इस्राईली सांसद अय्यूब क़ुर्रा ने एक बयान में अच्छी तरह समझा दिया कि नेतनयाहू इस समय कितने गहरे संकट में पड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर बाइडन सरकार गोलान हाइट्स को इस्राईल का इलाक़ा मानने से इंकार कर देती है और ईरान के परमाणु समझौते में लौट जाती है तो फिर इस्राईल को चाहिए कि अमरीका को भूल कर चीन और रूस का दामन थामे। उन्होंने आगे कहा कि अमरीका के कहने पर इस्राईल ने चीन के साथ एक अरब डालर का हथियार सौदा ठंडे बस्ते में डाल दिया था अब ज़रूरत है कि उस डील को फिर से जीवित किया जाए।

अय्यूब क़ुर्रा वैसे तो नेतनयाहू की पार्टी के सांसद हैं मगर उनके बयान का महत्व इस लिए बढ़ जाता है कि वह नेतनयाहू के बहुत क़रीबी लोगों में हैं। यह पहला मौक़ा है कि इस्राईल के भीतर अमरीका को लेकर इस प्रकार का धमकी भरा बयान दिया जा रहा है। कुछ लोग तो यह मान रहे हैं कि ख़ुद नेतनयाहू ने पर्दे के पीछे से यह बयान दिलवाया है।

इस प्रकार का बयान तब आया है जब बाइडन ने चीन और रूस को लेकर कड़े बयान दिए हैं और चीन को धमकी दी है कि मानवाधिकारों के हनन के मामले में उसे भारी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने रूस को धमकी दी कि मास्को की शत्रुतापूर्ण नीतियों, अमरीकी चुनाव में हस्तक्षेप और साइबर हमलों पर वाशिंग्टन के ख़ामोश रहने का ज़माना बीत चुका है।

नेतनयाहू ने जो पैंतरा बदला है वह कोई नई बात नहीं है क्योंकि सोवियत संघ संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्राईल को मान्यता देने में आगे आगे था मगर ज़ायोनियों ने हमेशा अमरीका का साथ दिया तो अब अगर वह पाला बदलता है तो इसमें बहुत ज़्यादा आश्चर्य की गुंजाइश नहीं है।

मगर यहां सवाल यह है कि अमरीका और पश्चिम ने इस्राईल को बाक़ी रखने के लिए सैकड़ों अरब डालर की रक़म ख़र्च की है क्या वह बर्दाश्त करेंगे कि इस्राईल उनके ख़ैमे से निकल जाए? इसका जवाब तो हमें नहीं मालूम मगर इतना ज़रूर पता है कि इस्राईली सरकार इस समय गहरे संकट में फंसी हुई है।

मध्यपूर्व के इलाक़े में गहरे बदलाव हो रहे हैं, सबसे बड़ा बदलाव तो उस प्रतिरोधक मोर्चे का लगातार मज़बूत होना है जिसका नेतृत्व ईरान कर रहा है और यह मोर्चा पूरे पश्चिमी एशिया के इलाक़े की तसवीर बदल देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार


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