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इस्राईल, ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर कदापि हमला नहीं करेगा, इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री ने ईरान को दी जाने वाली धमकी का राज़ खोला

इस्राईल, ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर कदापि हमला नहीं करेगा, इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री ने ईरान को दी जाने वाली धमकी का राज़ खोला

इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने कहा कि जायोनी शासन बिल्कुल भी ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला नहीं करेगा।

इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री ने एक भाषण में कहा कि ज़ायोनी शासन ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर कदापि हमला नहीं करेगा और उसकी धमकियों का लक्ष्य अमेरिका को डराना है।

प्राप्त समाचारों के अनुसार एहूद ओलमर्ट ने कहा कि इस्राईल जो यह दावा करता है कि ईरान पर हमले के लिए जो भी ज़रूरी होगा इस्राईल अंजाम देगा तो उसके इस दावे का लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नुकसान पहुंचाने की क्षमता व योग्यता पैदा करने के बजाये अमेरिकियों को डराना है। उन्होंने कहा कि इस्राईल दस साल पहले इस परिणाम पर पहुंच गया था कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करने की तैयारी केवल अरबों डालर को बर्बाद करना है।

उन्होंने जायोनी शासन के वर्तमान मंत्रिमंडल की नीतियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में नफ्ताली बेनेट की नीतियां अमेरिका- इस्राईल टकराव का कारण बनेंगी। इसी प्रकार एहूद ओलमर्ट ने जायोनी प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के हालिया उस दावे पर चिंता प्रकट की जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान और बड़ी शक्तियों के बीच कोई संभावित सहमति बनती है तो इस्राईल उसके प्रति कटिबद्ध नहीं रहेगा।

इसी प्रकार उन्होंने इस्राईल के वर्तमान प्रधानमंत्री को नसीहत करते हुए कहा कि नफ्ताली बेनेट को चाहिये कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की कूटनीतिक वार्ता के साथ कदम आगे बढ़ायें और शत्रुतापूर्ण बयान देने से परहेज़ करें। उन्होंने कहा कि निर्णायक चुनौतियों का सामना व मुकाबला करने में इस्राईल अमेरिका से बेनियाज़ नहीं हो सकता।

इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुकाबला करने में नेतनयाहू और ट्रंप सरकार के बीच सहकारिता बड़ी भूल थी जो इस्राईल के लिए बड़े नुकसान का कारण बनी।

जानकार हल्कों का मानना है कि इस्राईल के अंदर ही नहीं बल्कि उसके मूल समर्थकों और आक़ाओं के अंदर भी ईरान पर हमला करने का साहस नहीं है क्योंकि इस्राईल और उसके समर्थक ईरान के करारे जवाब और उसके अंजाम से भली-भांति अवगत हैं और अगर उनके अंदर ईरान पर हमला करने का साहस होता तो बहुत पहले कर चुके होते। 


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